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चंबल में रेत माफियाओं पर चोट: आठ महीने में 27 करोड़ की अवैध रेत मिट्टी में मिलाई, 1020 पर कार्रवाई, 19 जिलाबदर

Thu, 13 Aug 2026 10:17 AM IST
मुरैना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना Published by: मुरैना ब्यूरो Updated Thu, 13 Aug 2026 10:17 AM IST
सार

मुरैना में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद चंबल राष्ट्रीय अभयारण्य में अवैध रेत खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई। जनवरी से 11 अगस्त तक 2.86 लाख घनमीटर रेत नष्ट, 68 वाहन जब्त और 19 रेत माफिया जिलाबदर किए गए। प्रशासन ने ड्रोन निगरानी और रात गश्त बढ़ाकर जीरो टॉलरेंस जारी रखने की बात कही। 

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biggest blow yet against the sand mafia in Chambal region.Illegal sand worth 27 crore rupees mixed with soil
मध्यप्रदेश में रेत माफियाओं पर बड़ी कार्यवाही

विस्तार

मुरैना जिले में सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद चंबल के किनारे जो धूल उड़ रही थी, वह अब रेत माफिया की गाड़ियों की नहीं, बल्कि प्रशासन के हथौड़े की है। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध खनन, भंडारण और परिवहन के खिलाफ पुलिस-प्रशासन ने बीते 8 महीने में ऐसा अभियान चलाया कि माफियाओं के पैरों तले जमीन खिसक गई।

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1 जनवरी से 11 अगस्त 2026 तक कुल 2 लाख 86 हजार 180 घनमीटर अवैध रेत जब्त कर उसे मौके पर ही मिट्टी में मिला दिया गया। इसकी बाजार कीमत करीब 27 करोड़ 7 लाख रुपये आंकी गई है। यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। इस अभियान में सिर्फ रेत ही नहीं, माफिया का पूरा नेटवर्क टारगेट पर था।

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  • 1020 से ज्यादा लोगों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई

  • 19 बड़े रेत माफिया जिलाबदर किए गए

  • 68 भारी वाहन जब्त, जिनकी कीमत करीब 4 करोड़ 64 लाख रुपये

  • 78 प्रकरण दर्ज: 62 अवैध परिवहन, 15 अवैध भंडारण और 1 अवैध उत्खन के

जब्त वाहनों में डंपर, लोडर, ट्रैक्टर, हाइड्रा जैसे मशीनें शामिल हैं। प्रशासन ने रेत को नष्ट करने के साथ-साथ माफिया की कमर तोड़ने पर फोकस किया। राष्ट्रीय अभयारण्य के 44 घाटों और चेकपोस्टों पर एक साथ दबिश दी गई। अभियान में 2 एसएएफ कंपनियों समेत 450 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रहे। इसमें 131 एसएएफ जवान और 25 थानों का बल शामिल था।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अस्थायी नाके बनाए गए और स्थायी बल की ड्यूटी तय की गई। पुलिस-वन विभाग की संयुक्त टीमों ने अवैध रेत परिवहन वाले कच्चे रास्तों को चिह्नित कर गड्ढे खुदवा दिए, ताकि वाहन निकल ही न सकें। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने भी चंबल क्षेत्र का निरीक्षण किया। समिति ने मप्र, राजस्थान और यूपी के कलेक्टर-एसपी के साथ बैठक कर निगरानी तंत्र मजबूत करने को कहा। इसके बाद से घाटों पर ड्रोन और रात में पेट्रोलिंग भी बढ़ाई गई। 2025 में पूरे साल में करीब 29 हजार घनमीटर अवैध रेत नष्ट हुई थी, जिसकी कीमत लगभग 3 करोड़ थी। तब 30 वाहन जब्त हुए और 21 मामले दर्ज हुए थे। लेकिन न भंडारण पर कार्रवाई हुई, न ही बड़े माफियाओं पर शिकंजा कसा। 2026 में आंकड़े खुद बता रहे हैं कि गति और मंशा दोनों बदली है। 8 महीने में जो हुआ, वह पिछले साल की कार्रवाई से नौ गुना ज्यादा है।

मुरैना एसपी धर्मराज मीणा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर चंबल में राष्ट्रीय घड़ियाल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की गई। पुलिस, राजस्व और वन विभाग ने मिलकर रात-दिन मेहनत की। अवैध उत्खन के साम्राज्य को तोड़ने के लिए आगे भी जीरो टॉलरेंस की नीति रहेगी। चंबल सिर्फ रेत का सौदा नहीं है। यह घड़ियाल, डॉल्फिन और सैकड़ों प्रजातियों का घर है। अवैध खन से नदी का प्रवाह और वन्यजीव दोनों खतरे में थे। इस बड़ी कार्रवाई से एक तरफ राजस्व की बचत हुई, दूसरी तरफ अभयारण्य को भी सांस मिली। प्रशासन का कहना है कि आगे भी ड्रोन निगरानी, रात गश्त और मुखबिर तंत्र को और मजबूत किया जाएगा। रेत माफिया के लिए चंबल अब आसान शिकारगाह नहीं रही।

 

 

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