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एमपी में बारिश ने मचाई तबाही: नदी-नाले उफने, रास्ते बंद; स्कूलों में छुट्टी,10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

Tue, 11 Aug 2026 07:20 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Tue, 11 Aug 2026 07:20 AM IST
सार

मध्य प्रदेश में सक्रिय रहे मजबूत मानसूनी सिस्टम से कई जिलों में भारी बारिश हुई। भोपाल में 24 घंटे में 7 इंच पानी गिरा। विदिशा, सीहोर और मंडला में भी हालात बिगड़े। आज 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। 12 अगस्त के आसपास नए कम दबाव के क्षेत्र के बनने से अगले चार दिन फिर भारी बारिश की संभावना है।

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Rain wreaks havoc in MP: Rivers and streams overflow, roads blocked, schools closed; heavy rain alert for 10 d
मध्य प्रदेश में बारिश से जलमग्न हुए कई जिले - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाया है। पिछले दो दिनों में सक्रिय रहे मजबूत मौसम तंत्र ने प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश कराई। राजधानी भोपाल में महज 24 घंटे में करीब 7 इंच पानी गिरने से निचले इलाकों और कॉलोनियों में जलभराव की स्थिति बन गई। कई जगह सड़कें और रास्ते पानी में डूब गए, जबकि नदियों और नालों के उफान पर आने से आवागमन प्रभावित हुआ। बारिश का सबसे ज्यादा असर भोपाल, सीहोर, शाजापुर, विदिशा, मंडला और राजगढ़ में दिखाई दिया। राजगढ़ के ब्यावरा में रेलवे अंडरपास में पानी भरने से करीब 25 गांवों का संपर्क टूट गया। विदिशा में बाढ़ के पानी में 17 लोग फंस गए, जिन्हें बचाव दल ने सुरक्षित बाहर निकाला। लगातार बारिश और जलभराव को देखते हुए भोपाल और आगर-मालवा में स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। प्रशासन ने लोगों से नदी, नाले और जलभराव वाले रास्तों से दूर रहने की अपील की है।
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इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम केंद्र ने मंगलवार को नीमच, मंदसौर, रतलाम, आलीराजपुर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, शिवपुरी, श्योपुर और मुरैना में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, इंदौर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, दतिया, अशोकनगर, भिंड, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
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डैमों में बढ़ा पानी, गेट खोलकर छोड़ा गया
भारी बारिश का असर जलाशयों पर भी पड़ा है। जोहिला बांध के दो गेट खोलकर पानी छोड़ा गया। भोपाल के कलियासोत और केरवा तथा सीहोर के कोलार बांध में भी जलस्तर तेजी से बढ़ा है। भोपाल के बड़े तालाब का जलस्तर भी करीब तीन फीट बढ़ गया है।

12 अगस्त के आसपास फिर बन सकता है नया कम दबाव का क्षेत्र
मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, 10 अगस्त को उत्तर मध्य प्रदेश और आसपास कम दबाव का क्षेत्र बना था। इसके साथ चक्रवाती परिसंचरण भी सक्रिय रहा, जो करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला था। मानसून की द्रोणिका भी इसी तंत्र से होकर गुजर रही थी। इसी वजह से प्रदेश के कई हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश हुई। अब उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में नया चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हुआ है। इसके प्रभाव से करीब 12 अगस्त के आसपास नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। ऐसे में अगले चार दिन मध्य प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

19 इंच बारिश, फिर भी सामान्य से 15 प्रतिशत पीछे
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में अब तक करीब 19 इंच यानी 483 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। सामान्य तौर पर इस अवधि में करीब 22.5 इंच यानी 571.4 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी। इस हिसाब से प्रदेश अभी भी सामान्य बारिश से करीब 15 प्रतिशत पीछे है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी करीब 18 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 13 प्रतिशत है।


46 जिलों में सामान्य से कम बारिश 
प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश की कमी अधिक बनी हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया समेत कई जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। पश्चिमी हिस्से के भी कई जिले बारिश के मामले में पिछड़े हुए हैं। हालांकि भोपाल, गुना, सीहोर, ग्वालियर, अनूपपुर, भिंड, बुरहानपुर, देवास और खरगोन में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है।

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जुलाई का कोटा पूरा, लेकिन जून की कमी अभी बाकी
मानसून की शुरुआत इस बार कमजोर रही थी। जून में प्रदेश में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई। जुलाई में कई बार मानसून के सक्रिय और कमजोर होने का दौर चला। जुलाई के आखिरी सप्ताह में मजबूत सिस्टम सक्रिय होने के बाद बारिश ने रफ्तार पकड़ी और महीने का बारिश कोटा पूरा हो गया। इसके बावजूद जून की कमी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। अब अगस्त में सक्रिय होने वाला नया सिस्टम प्रदेश के बारिश के आंकड़ों में सुधार ला सकता है। मध्य प्रदेश में सामान्य मानसूनी बारिश करीब 37.3 इंच मानी जाती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में सामान्य बारिश 38 से 39 इंच के आसपास रहती है।

 
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