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MP News: 2028 की तैयारी या अंदरूनी लड़ाई? कांग्रेस में दिग्गजों से छात्र संगठनों तक बढ़ी कलह,संगठन पर उठे सवाल
Wed, 01 Jul 2026 06:02 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Wed, 01 Jul 2026 06:02 PM IST
सार
मध्य प्रदेश कांग्रेस में उज्जैन भूमि विवाद पर नेताओं के विरोधाभासी बयान, यूथ कांग्रेस की बैठक में धक्का-मुक्की और एनएसयूआई में अनुशासनहीनता के मामले सामने आने से संगठनात्मक एकता पर सवाल उठ रहे हैं। चुनावी तैयारियों के बीच पार्टी नेतृत्व एकजुटता का दावा कर रहा है, लेकिन लगातार सामने आ रहे विवाद कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बनते दिख रहे हैं।
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दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में दो दशक से अधिक समय से सत्ता से बाहर कांग्रेस 2028 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में संगठन को मजबूत करने में जुटी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी लगातार संगठनात्मक बैठकों और आंदोलनों के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर पार्टी के भीतर दिग्गज नेताओं से लेकर छात्र संगठनों तक सामने आ रहे विवाद कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। हाल के दिनों में उज्जैन भूमि आवंटन विवाद पर नेताओं के अलग-अलग बयान, यूथ कांग्रेस की बैठक में धक्का-मुक्की और एनएसयूआई में अनुशासनहीनता जैसे घटनाक्रमों ने संगठन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस इन अंदरूनी मतभेदों को खत्म कर 2028 और 2029 के चुनाव से पहले खुद को मजबूत कर पाएगी?
उज्जैन भूमि विवाद पर खुलकर सामने आए मतभेद
उज्जैन भूमि आवंटन मामले को लेकर हुई कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बयान पर कई नेताओं ने नाराजगी जताई। विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जिस मुद्दे को गंभीरता से उठाया, उस पर अलग-अलग बयान आने से कार्यकर्ताओं में भ्रम पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि जनता पूछेगी कि आखिर सही कौन है। पूर्व विधायक प्रवीण पाठक ने भी बैठक में कहा कि यदि वरिष्ठ नेता ही प्रदेश अध्यक्ष के रुख को कमजोर करेंगे तो मैदान में संघर्ष कर रहे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटेगा और पार्टी की मुहिम कमजोर पड़ेगी। बैठक के दौरान बढ़ते विवाद के बीच प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि पूरे मामले की जानकारी कांग्रेस आलाकमान को भेज दी गई है और आगे की रणनीति केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश के अनुसार तय होगी।
यूथ कांग्रेस की बैठक में धक्का-मुक्की
संगठनात्मक मजबूती के दावों के बीच भोपाल में आयोजित यूथ कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक विवादों में घिर गई। संगठनात्मक समीक्षा के दौरान मऊगंज विधानसभा अध्यक्ष आशुतोष ने कार्यों के मूल्यांकन वाले ऐप को फर्जी बताया। इसके बाद प्रदेश सचिव सलमान गौरी और आशुतोष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। स्थिति बिगड़ने पर प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शांत कराया। बाद में वरिष्ठ नेताओं ने दोनों पदाधिकारियों को बैठक कक्ष से बाहर भेजा, जिसके बाद समीक्षा बैठक दोबारा शुरू हुई।
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यह भी पढ़ें-दिग्विजय के विरोध में खुलकर उतरीं कांग्रेस महासचिव: बोलीं-पुत्र मोह में संगठन को नुकसान पहुंचा रहे,हो कार्रवाई
एनएसयूआई में भी अनुशासन पर सवाल
कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई में भी अनुशासनहीनता की तस्वीर सामने आई है। मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा चुनाव नामांकन निरस्त होने के विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन करने का निर्देश सभी जिला अध्यक्षों को दिया गया था, लेकिन कई जिलों में कार्यक्रम ही आयोजित नहीं किया गया। इस पर संगठन ने संबंधित जिला अध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किए, लेकिन कई पदाधिकारियों ने जवाब तक नहीं दिया। इसके बाद भोपाल में बुलाई गई प्रदेश स्तरीय बैठक में भी आधे से ज्यादा जिला अध्यक्ष और कई पदाधिकारी अनुपस्थित रहे, जबकि प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने बैठक में सभी की उपस्थिति अनिवार्य बताई थी। हालांकि प्रदेश प्रभारी रविंद्र दांगी ने संगठन में किसी भी तरह के मतभेद से इनकार करते हुए कहा कि कुछ पदाधिकारी व्यक्तिगत कारणों से बैठक में नहीं पहुंच सके।
यह भी पढ़ें-यूथ कांग्रेस की बैठक में बवाल: कार्यों की समीक्षा के बीच भिड़े पदाधिकारी, धक्का-मुक्की का वीडियो सामने आया
चुनाव से पहले बड़ी चुनौती
लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों ने कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे और अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर पार्टी प्रदेश सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है, वहीं दूसरी ओर नेताओं और छात्र संगठनों के भीतर बढ़ती खींचतान संगठन की एकजुटता पर असर डालती दिख रही है। ऐसे में 2028 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने संगठन को एकजुट और अनुशासित बनाए रखने की होगी।
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उज्जैन भूमि विवाद पर खुलकर सामने आए मतभेद
उज्जैन भूमि आवंटन मामले को लेकर हुई कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बयान पर कई नेताओं ने नाराजगी जताई। विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जिस मुद्दे को गंभीरता से उठाया, उस पर अलग-अलग बयान आने से कार्यकर्ताओं में भ्रम पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि जनता पूछेगी कि आखिर सही कौन है। पूर्व विधायक प्रवीण पाठक ने भी बैठक में कहा कि यदि वरिष्ठ नेता ही प्रदेश अध्यक्ष के रुख को कमजोर करेंगे तो मैदान में संघर्ष कर रहे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटेगा और पार्टी की मुहिम कमजोर पड़ेगी। बैठक के दौरान बढ़ते विवाद के बीच प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि पूरे मामले की जानकारी कांग्रेस आलाकमान को भेज दी गई है और आगे की रणनीति केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश के अनुसार तय होगी।
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यूथ कांग्रेस की बैठक में धक्का-मुक्की
संगठनात्मक मजबूती के दावों के बीच भोपाल में आयोजित यूथ कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक विवादों में घिर गई। संगठनात्मक समीक्षा के दौरान मऊगंज विधानसभा अध्यक्ष आशुतोष ने कार्यों के मूल्यांकन वाले ऐप को फर्जी बताया। इसके बाद प्रदेश सचिव सलमान गौरी और आशुतोष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। स्थिति बिगड़ने पर प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शांत कराया। बाद में वरिष्ठ नेताओं ने दोनों पदाधिकारियों को बैठक कक्ष से बाहर भेजा, जिसके बाद समीक्षा बैठक दोबारा शुरू हुई।
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एनएसयूआई में भी अनुशासन पर सवाल
कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई में भी अनुशासनहीनता की तस्वीर सामने आई है। मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा चुनाव नामांकन निरस्त होने के विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन करने का निर्देश सभी जिला अध्यक्षों को दिया गया था, लेकिन कई जिलों में कार्यक्रम ही आयोजित नहीं किया गया। इस पर संगठन ने संबंधित जिला अध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किए, लेकिन कई पदाधिकारियों ने जवाब तक नहीं दिया। इसके बाद भोपाल में बुलाई गई प्रदेश स्तरीय बैठक में भी आधे से ज्यादा जिला अध्यक्ष और कई पदाधिकारी अनुपस्थित रहे, जबकि प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने बैठक में सभी की उपस्थिति अनिवार्य बताई थी। हालांकि प्रदेश प्रभारी रविंद्र दांगी ने संगठन में किसी भी तरह के मतभेद से इनकार करते हुए कहा कि कुछ पदाधिकारी व्यक्तिगत कारणों से बैठक में नहीं पहुंच सके।
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चुनाव से पहले बड़ी चुनौती
लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों ने कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे और अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर पार्टी प्रदेश सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है, वहीं दूसरी ओर नेताओं और छात्र संगठनों के भीतर बढ़ती खींचतान संगठन की एकजुटता पर असर डालती दिख रही है। ऐसे में 2028 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने संगठन को एकजुट और अनुशासित बनाए रखने की होगी।
