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MP Panchayat Chunav: अमेरिका रिटर्न पैड जीजी निर्विरोध सरपंच, 11 महिलाओं को पंच बना ग्रामीणों ने पेश की मिसाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नरसिंहपुर
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Wed, 15 Jun 2022 09:18 AM IST
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सार
अमेरिका रिटर्न माया को लोग पैड वूमेन और पैड जीजी के नाम से जानते हैं। माया समाज सेविका हैं उनके बेहतरीन कार्यों को देखते हुए ग्रामीणों ने उन्हें निर्विरोध सरपंच चुना है। माया के अलावा ग्रामीणों ने 11 महिलाओं को निर्विरोध पंच चुनकर मिसाल पेश की है।
अमेरिका रिटर्न माया।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
नरसिंहपुर के साईंखेड़ा तहसील से सरपंच प्रत्याशी माया विश्वकर्मा काफी सुर्खियों में हैं। अमेरिका रिटर्न माया को लोग पैड वूमेन और पैड जीजी के नाम से जानते हैं। माया समाज सेविका हैं उनके बेहतरीन कार्यों को देखते हुए ग्रामीणों ने उन्हें निर्विरोध सरपंच चुना है। माया के अलावा ग्रामीणों ने 11 महिलाओं को निर्विरोध पंच चुनकर मिसाल पेश की है।
माया विश्वकर्मा ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को में ब्लड कैंसर पर रिसर्च किया। वह अमेरिका में रहकर एक अच्छी जिंदगी जी रही थीं, लेकिन उनके दिल में अपने देश और प्रदेश के लिए कुछ अच्छा करने का जज्बा था। वह भारत लौटी और गरीब तबके के लोगों के लिए कुछ करने का मन बनाया। लोगों के लिए कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश में माया ने अपनी नौकरी को भी कुर्बान कर दिया।
साईंखेड़ा में सभी माया को 'पैड जीजी' के नाम से जानते हैं। माया सुकर्मा फाउंडेशन के जरिए सोशल वर्क करती हैं। उनके सरपंच बनने से गांव के लोग खासकर महिलाएं काफी खुश हैं। हालांकि यह माया का पहला चुनाव नहीं है। वह 2014 में आम आदमी पार्टी से होशंगाबाद संसदीय क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव लड़ चुकी हैं लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
मिल चुके हैं कई सामाजिक पुरस्कार
सुकर्मा फाउंडेशन के जरिए माया विश्वकर्मा जनसेवा के काम छोटे-छोटे गांव और कस्बों में करती हैं। गरीब बस्तियों की महिलाओं को माहवारी के दौरान उनको होने वाली समस्याएं एवं पैड की उपयोगिता और लाभ बताकर जागरूक करने के लिए उन्हें कई बार सामाजिक पुरस्कार मिल चुके हैं।
महिलाओं को करती हैं जागरूक
माया ग्रामीण महिलाओं को सेनेटरी पैड के प्रति जागरूक करती हैं। भारत आने के बाद वह अरुणाचलम भारत के पैडमैन से मिली और उनसे प्रेरणा लेकर गांव में सेनेटरी पैड बनाने का काम शुरू किया। जहां आज का युवा देश को छोड़ विदेशों में जाकर बसने और मोटी आमदनी करने का सपना संजोता है, वहीं, माया का देश सेवा का जज्बा काबिलेतारीफ है।
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माया विश्वकर्मा ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को में ब्लड कैंसर पर रिसर्च किया। वह अमेरिका में रहकर एक अच्छी जिंदगी जी रही थीं, लेकिन उनके दिल में अपने देश और प्रदेश के लिए कुछ अच्छा करने का जज्बा था। वह भारत लौटी और गरीब तबके के लोगों के लिए कुछ करने का मन बनाया। लोगों के लिए कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश में माया ने अपनी नौकरी को भी कुर्बान कर दिया।
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साईंखेड़ा में सभी माया को 'पैड जीजी' के नाम से जानते हैं। माया सुकर्मा फाउंडेशन के जरिए सोशल वर्क करती हैं। उनके सरपंच बनने से गांव के लोग खासकर महिलाएं काफी खुश हैं। हालांकि यह माया का पहला चुनाव नहीं है। वह 2014 में आम आदमी पार्टी से होशंगाबाद संसदीय क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव लड़ चुकी हैं लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
मिल चुके हैं कई सामाजिक पुरस्कार
सुकर्मा फाउंडेशन के जरिए माया विश्वकर्मा जनसेवा के काम छोटे-छोटे गांव और कस्बों में करती हैं। गरीब बस्तियों की महिलाओं को माहवारी के दौरान उनको होने वाली समस्याएं एवं पैड की उपयोगिता और लाभ बताकर जागरूक करने के लिए उन्हें कई बार सामाजिक पुरस्कार मिल चुके हैं।
महिलाओं को करती हैं जागरूक
माया ग्रामीण महिलाओं को सेनेटरी पैड के प्रति जागरूक करती हैं। भारत आने के बाद वह अरुणाचलम भारत के पैडमैन से मिली और उनसे प्रेरणा लेकर गांव में सेनेटरी पैड बनाने का काम शुरू किया। जहां आज का युवा देश को छोड़ विदेशों में जाकर बसने और मोटी आमदनी करने का सपना संजोता है, वहीं, माया का देश सेवा का जज्बा काबिलेतारीफ है।

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