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एक पिता का संघर्ष: कच्चे मकान में रहकर मजदूरी की...लेकिन बेटियों को खूब पढ़ाया, आज सभी ने गाड़े सफलता के झंडे
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, नीमच
Published by: नीमच ब्यूरो
Updated Mon, 14 Apr 2025 06:09 PM IST
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सार
MP News: सफलता सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। इसे जावद के किसान भरत शर्मा और उनकी बेटियों ने सिद्ध कर दिखाया है। वे झोपड़ी में रहते हैं, घर में टेलीविजन तक नहीं लगा है। पिता ने बेटियों को सिखाया कि खुद पर विश्वास करना सबसे बड़ा साहस है।
भरत शर्मा की बेटियां
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सुविधाओं के साथ सफलता तो हर कोई पा लेता है। लेकिन सुविधाओं के अभाव में सफलता पाना बड़ी बात है। नीमच जिले की जावद तहसील के गरीब किसान भरत शर्मा ने सुविधाओं के अभाव में भी अपनी बेटियों को इतना आगे बढ़ाया कि आज उनकी बड़ी बेटी असम राइफल में देश सेवा कर रही है। दूसरी का मध्यप्रदेश पुलिस में चयन हो गया है। तीसरी बेटी ने बीएसएफ का फिजिकल पास कर लिया है, सिर्फ इंटरव्यू बाकी है। चौथी बेटी विक्रम यूनिवर्सिटी से लांग जंप में नेशनल खेल आई है और पढ़ाई कर रही है।
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किसान की बेटी संजना ने बताया कि हमारे माता-पिता ने हमें शुरू से कहा कि तुमको खुद के दम पर खड़ा होना है, हम सिर्फ तुम्हें पढ़ा सकते हैं। प्रतिभाएं सुविधाओं की मोहताज नहीं होती, इसे जावद के भरत शर्मा और उनकी बेटियों ने सिद्ध कर बताया। जावद के भरत शर्मा और उनके परिवार ने अपना जीवन बड़े ही संघर्ष और गरीबी में बिताया। भरत शर्मा के पास जावद में जीवनदान बालाजी मंदिर के पास से मात्र दो बीघा जमीन है। शादी के बाद जब बेटियों ने जन्म लिया तो भरत ने परिवार के पालन के लिए खुद की खेती के साथ दूसरों के खेतों में भी मजदूरी की।
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भरत शर्मा और उनकी पत्नी
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पढ़ाई के साथ खेलकूद सिखाया
किसान भरत शर्मा खेत पर बने अपने कच्चे मकान में चार बेटियों कल्पना, संजना, सुमन, अनीता और पत्नी के साथ रहते हैं। इनके घर में आज के इस आधुनिक युग में भी भौतिक सुख-सुविधाओं का अभाव है। इनके घर पर आज तक टीवी नहीं आई है। भरत ने बचपन से बेटियों को पढ़ाया और खेल कूद में आगे रखा। उन्होंने अपनी बेटियों को शुरू से ही बताया कि हम गरीब ज़रूर हैं पर अपनी मेहनत से सफलता प्राप्त कर सकते हैं। भरत की चारों बेटियां शासकीय स्कूल और कॉलेज में पढ़ी हैं।
बेटियों ने इन क्षेत्रों में गाड़े सफलता के झंडे
भरत ने बताया कि बेटियां शुरू से ही पढ़ाई के साथ खेल कूद में भी आगे थीं। साल 2016 में दंगल मूवी आई तो गांव वाले बेटियों को दंगल-टू कहने लगे। उस मूवी से हमें भी प्रेरणा मिली। बेटियों ने वर्दी पहनने की इच्छा जताई। उसके बाद खेत पर ही रनिंग ट्रैक बनाकर बेटियों ने तैयारी की। 2021 में कल्पना का आर्मी में चयन हुआ, वह आज असम राइफल में अपनी सेवाएं दे रही हैं। हाल ही में संजना का मप्र पुलिस में आरक्षक के पद पर चयन हुआ है। संजना का ज्वाइनिंग लेटर आना है। तीसरी बेटी सुमन ने भी बीएसएफ फिजिकल निकाल लिया है, इंटरव्यू होना है। चौथी बेटी अनीता नेशनल लांग जंप खेलकर आई है। अभी बीए फस्ट ईयर की पढ़ाई के साथ एयरफोर्स व अन्य भर्ती परीक्षा दे रही है।
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मध्यप्रदेश पुलिस में आरक्षक के पद पर चयनित हुई संजना ने बताया कि हमारे माता-पिता ने हमें शुरू से कहा कि तुमको खुद के दम पर खड़ा होना है। हम सिर्फ़ तुम्हें पढ़ा सकते हैं। हमारे माता- पिता ने हमें कैसे बड़ा किया और पढ़ाया-लिखाया हमने देखा है। इसलिए हम माता-पिता के संघर्ष को बेकार नहीं कर सकते। इसलिए शुरू से मेहनत की। मेरा एमपी पुलिस में सेलेक्शन हो चुका है, जब फिजिकल हुआ तो उसमें मैं प्रथम रही। 100 अंकों में से 96 अंक प्राप्त हुए और मध्यप्रदेश में 5वीं रैंक बनी। हम सभी बहनों ने यूनिवर्सिटी खेली हुई है।
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और क्या बताया भरत शर्मा ने
किसान भरत शर्मा ने कहा कि बेटियां जैसे-जैसे बड़ी होती जाती हैं। मां-बाप के ऊपर समाज और परिवार के लोग शादी का दबाव बनाते हैं। पर इन सब बातों को हमने नज़रअंदाज किया। कभी इन बातों को बेटियों के कानो तक नहीं पहुंचने दिया। मां ने कभी इनसे घर का काम नहीं करवाया। हमने उनके लिए मेहनत की तो हमारी मेहनत को हमारी बेटियों ने सिद्ध किया है।

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