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OBC Reservation: ओबीसी आरक्षण पर मैराथन सुनवाई, 20 को फिर होगी बहस, यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीमिंग दोबारा शुरू

Fri, 17 Jul 2026 11:14 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Fri, 17 Jul 2026 11:14 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में ओबीसी को 27% आरक्षण मामले पर हाईकोर्ट में तीसरे दिन भी सुनवाई जारी रही। याचिकाकर्ताओं ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से राय न लेने और पर्याप्त अध्ययन न होने का तर्क दिया। कोर्ट ने 20 जुलाई को अगली सुनवाई तय की तथा यूट्यूब लाइव स्ट्रीमिंग दोबारा शुरू कराने के निर्देश दिए।

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OBC Reservation: Marathon hearing OBC reservation, debate to resume on 20th, live streaming resumes on YouTube
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक और न्यायाधीश विनय सराफ की विशेष युगलपीठ के समक्ष शुक्रवार को ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े करीब 100 मामलों पर लगातार तीसरे दिन मैराथन सुनवाई हुई। अब मामले की नियमित सुनवाई 20 जुलाई को दोपहर 2.30 बजे से होगी। सुनवाई के दौरान यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीमिंग पिछले दो दिनों से बंद रहने पर ओबीसी पक्ष के अधिवक्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई, इसके बाद न्यायालय ने गुरुवार की कार्यवाही का सीधा प्रसारण फिर शुरू करा दिया।
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सुनवाई में सामान्य वर्ग के याचिकाकर्ताओं और यूथ फॅार इक्वेलिटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी और गोपाल शंकर नारायण ने अपनी दलीलें पूरी कीं। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप संचेती की बहस सोमवार को जारी रहेगी। 
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महाजन आयोग ने 35 फीसदी की अनुशंसा की थी
बहस के दौरान 1983 के महाजन आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि आयोग ने ओबीसी के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण की अनुशंसा की थी। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि 2019 में 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से पहले राज्य सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 338-बी के तहत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से राय नहीं ली, इसलिए संशोधन कानून वैधानिक कसौटी पर खरा नहीं उतरता। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी पूछा कि 2014 में एकलपीठ द्वारा याचिका निरस्त किए जाने के बाद राज्य सरकार ने उस आदेश के विरुद्ध अपील क्यों नहीं की। वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि इस आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी पहले से लंबित है। याचिकाकर्ताओं ने इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से पहले आवश्यक अध्ययन नहीं किया गया। 

मध्य प्रदेश में क्या बाधा
वहीं, कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने मंडल आयोग के आधार पर ओबीसी आरक्षण को मान्यता दी है तो मध्यप्रदेश में इसे लागू करने में क्या बाधा रही। याचिकाकर्ताओं का जवाब था कि 50 प्रतिशत की सीमा तथा बदलती परिस्थितियों का समुचित परीक्षण किए बिना कानून बनाया गया।
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