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MP News: ओंकारेश्वर में नाव संचालन पर सख्ती, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने जारी किए कड़े नियम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर Published by: खंडवा ब्यूरो Updated Thu, 12 Mar 2026 09:17 PM IST
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सार

ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी में संचालित नावों को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त नियम लागू कर दिए हैं। कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नावों की गति, क्षमता, लाइफ जैकेट और सुरक्षा उपकरण अनिवार्य करने के निर्देश जारी किए हैं।

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जिला प्रशासन ने सख्त नियम लागू किए। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

विश्व प्रसिद्ध तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु नर्मदा नदी के दोनों तटों पर स्थित घाटों और मंदिरों तक पहुंचने के लिए नावों का उपयोग करते हैं। विशेष रूप से ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर, ममलेश्वर मंदिर और नर्मदा के पवित्र घाटों के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नावें महत्वपूर्ण परिवहन साधन हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने नाव संचालन को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

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कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी ऋषव गुप्ता ने नर्मदा नदी में संचालित नावों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का पालन अनिवार्य करते हुए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। यह आदेश आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 30 और 34 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किया गया है।

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प्रशासन के संज्ञान में आया है कि कई स्थानों पर नाव संचालक नावों में लगे आउटबोर्ड मोटर (ओबीएम) के माध्यम से नावों को तेज गति से चलाते हैं। इसके अलावा कई बार निर्धारित क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं को नाव में बैठा लिया जाता है और यात्रियों को सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट भी उपलब्ध नहीं कराई जाती। ऐसी स्थिति में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य कर दिया है।

इन क्षेत्रों में लागू रहेगा आदेश
जारी आदेश के अनुसार ओंकारेश्वर, मोरटक्का, हनुमंतिया और सिंगाजी समाधि स्थल क्षेत्र में नर्मदा नदी में संचालित होने वाली सभी नावों को नियंत्रित गति में चलाना अनिवार्य होगा। इन क्षेत्रों में धार्मिक आस्था और पर्यटन के कारण वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। विशेषकर त्योहारों, पर्वों और अवकाश के दिनों में ओंकारेश्वर में भीड़ और अधिक बढ़ जाती है।

नावों के बीच न्यूनतम 30 मीटर की दूरी
नदी में संचालित होने वाली नावों के बीच लगभग 30 मीटर की सुरक्षा दूरी बनाए रखना अनिवार्य किया गया है। इससे नावों के आपस में टकराने या संतुलन बिगड़ने जैसी घटनाओं से बचाव किया जा सकेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी नाव संचालकों को अपना विधिवत पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। साथ ही किसी भी नाव में उसकी निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने की अनुमति नहीं होगी।

लाइफ जैकेट पहनना होगा जरूरी
नाव में बैठने वाले प्रत्येक यात्री को लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य होगा। नाव संचालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नाव में पर्याप्त संख्या में लाइफ जैकेट उपलब्ध हों और यात्रियों को पहनाकर ही नाव यात्रा कराई जाए।

नाव में रखने होंगे सुरक्षा उपकरण
नावों में सुरक्षा मानकों के अनुसार लाइफबॉय, रस्सी, अतिरिक्त लाइफ जैकेट तथा डूबने से बचाव के उपकरण रखना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा किसी आपात स्थिति में यात्रियों को सचेत करने के लिए मिनी लाउड हेलर भी रखना होगा।

नावों पर लगानी होगी रेडियम पट्टी
रात्रि या कम दृश्यता की स्थिति में दुर्घटनाओं से बचाव के लिए नाव के ऊपरी हिस्से में चारों ओर रेडियम पट्टी लगाना अनिवार्य किया गया है, जिससे दूर से भी नाव स्पष्ट दिखाई दे सके।

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नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई
कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने निर्देश दिए हैं कि नाव संचालक समय-समय पर होमगार्ड, नागरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। आदेश का उल्लंघन करने वाले नाव संचालकों के विरुद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन का कहना है कि ओंकारेश्वर जैसे विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इन निर्देशों के पालन से नर्मदा नदी में नाव संचालन अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित हो सकेगा तथा श्रद्धालुओं को सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा।


 

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