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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Rainfall increases, yet dams remain parched: 27 reservoirs in MP hold less water than last year; Indira Sagar

बारिश बढ़ी, लेकिन बांध अब भी प्यासे: एमपी के 27 जलाशयों में पिछले साल से कम पानी, इंदिरा सागर सबसे ज्यादा खाली

Wed, 01 Jul 2026 10:25 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Wed, 01 Jul 2026 10:25 AM IST
सार

मध्य प्रदेश में मानसून सक्रिय होने के बावजूद बड़े बांध अभी पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। 30 जून तक प्रदेश के 54 प्रमुख जलाशयों में औसत जलभराव 33.61 प्रतिशत है, जो पिछले साल की तुलना में केवल 1.59 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद 27 जलाशयों में अब भी पिछले साल से कम पानी है। इंदिरा सागर समेत कई बड़े बांधों का जलस्तर चिंता का विषय बना हुआ है।

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Rainfall increases, yet dams remain parched: 27 reservoirs in MP hold less water than last year; Indira Sagar
बांधो की स्तिथ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश में मानसून अब रफ्तार पकड़ने लगा है। पिछले कुछ दिनों में प्रदेश के कई जिलों में झमाझम बारिश हुई है और नदियों का जलस्तर भी बढ़ा है, लेकिन बड़े बांधों की तस्वीर अभी भी राहत देने वाली नहीं है। जल संसाधन विभाग की 30 जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 54 प्रमुख जलाशयों में औसत जलभराव 33.61 प्रतिशत दर्ज किया गया है। पिछले साल 30 जून को यह 32.02 प्रतिशत था। यानी एक साल में जलभराव में सिर्फ 1.59 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, आंकड़ों का दूसरा पहलू चिंता बढ़ाने वाला है। प्रदेश के 54 में से 27 जलाशयों में आज भी पिछले साल की तुलना में कम पानी है। यही वजह है कि लगातार बारिश के बावजूद इस बार प्रदेश के किसी भी बड़े बांध का एक भी गेट नहीं खोला गया है, जबकि नदियों में जलस्तर बढ़ने लगा है।
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इंदिरा सागर समेत कई बड़े बांध अब भी खाली
प्रदेश के सबसे बड़े इंदिरा सागर बांध की स्थिति सबसे ज्यादा चिंता बढ़ा रही है। यहां वर्तमान में 14.72 प्रतिशत जलभराव है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह करीब 24.5 प्रतिशत था। यानी करीब 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसी तरह बरगी में 12.45 प्रतिशत, तवा में 9.03 प्रतिशत, केरवा में 8.13 प्रतिशत, दहोद में 7.50 प्रतिशत, संजय सागर में 3.42 प्रतिशत, बाणसागर में 46.87 प्रतिशत और वाईंगंगा (संजय सरोवर) में 9.21 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है। इन प्रमुख जलाशयों में अभी भी पानी का स्तर सामान्य से काफी कम है।
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इन जलाशयों में मिली राहत
लगातार बारिश का असर कुछ जलाशयों में दिखाई देने लगा है। गांधीसागर (62.62%), हरसी (53.96%), कुटनी (55.66%), मड़ीखेड़ा (64.77%), राजघाट (79.75%), ओंकारेश्वर (39.28%) और पहसारी (34%) जैसे जलाशयों में पिछले साल की तुलना में बेहतर जलभराव दर्ज हुआ है। इससे उम्मीद है कि जुलाई में अच्छी बारिश जारी रही तो अन्य जलाशयों की स्थिति भी सुधर सकती है।
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बारिश से नदियां चढ़ीं, लेकिन खतरे से अभी दूर
पिछले 24 घंटे में प्रदेश के कई कैचमेंट क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। ओंकारेश्वर क्षेत्र में 179.40 मिमी, इंदिरा सागर में 146 मिमी, मोहनपुरा और कुंडलिया परियोजना क्षेत्र में 112.50-112.50 मिमी, पेंच डायवर्जन में 102.40 मिमी, तवा में 84.80 मिमी और वाईंगंगा (संजय सरोवर) क्षेत्र में 83.50 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इस बारिश के बाद नर्मदा, चंबल, बेतवा, केन, पार्वती और तामस समेत प्रमुख नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि सभी नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं और कहीं भी बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है।

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पिछले साल की तुलना में इस बार अलग तस्वीर
पिछले साल जून के आखिर तक लगातार हुई तेज बारिश से कई जलाशयों में तेजी से पानी बढ़ा था और बाद में कई बांधों के गेट खोलकर पानी छोड़ना पड़ा था। इसके उलट इस साल 30 जून तक लगातार बारिश के बावजूद जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के किसी भी प्रमुख बांध का एक भी गेट नहीं खोला गया है। इससे साफ है कि जलाशयों में अभी अतिरिक्त पानी का दबाव नहीं बना है।

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जुलाई की बारिश होगी निर्णायक
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि मानसून अब पूरे प्रदेश में सक्रिय हो रहा है। यदि जुलाई के पहले और दूसरे सप्ताह में लगातार अच्छी बारिश होती है तो बड़े जलाशयों में तेजी से जलभराव बढ़ेगा। इससे खरीफ फसलों की सिंचाई, पेयजल आपूर्ति के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा। वहीं यदि बारिश की रफ्तार धीमी रही तो कई बड़े जलाशयों में पानी की कमी बनी रह सकती है।
 
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