Ratlam News: रतलाम अलनीनो से प्रभावित जिला घोषित, 98 प्रतिशत हो चुकी है बोवनी, मात्र 9 इंच हुई बारिश
रतलाम जिले में खरीफ फसल की लगभग 98 प्रतिशत बोवनी पूरी हो चुकी है, लेकिन बारिश रुकने से फसलें संकट में हैं। अलनीनो के कारण सूखे की आशंका बढ़ गई है। कृषि विभाग ने किसानों को फसल बीमा कराने और खेतों में नमी बनाए रखने के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
रतलाम जिले में खरीफ फसल की लगभग 98 प्रतिशत बोवनी पूरी हो चुकी है, लेकिन बारिश रुकने से फसलें संकट में हैं। अलनीनो के कारण सूखे की आशंका बढ़ गई है। कृषि विभाग ने किसानों को फसल बीमा कराने और खेतों में नमी बनाए रखने के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
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रतलाम जिले में खरीफ फसल की 98 प्रतिशत बोवनी हो चुकी है। मानसून के विलंब से आने से बोवनी भी लेट हुई है। भारत सरकार द्वारा रतलाम जिले को अलनीनो से प्रभावित जिलों में घोषित किया गया है। अलनीनो के कारण जिले में अल्पवर्षा व सूखा की स्थिति बनने की संभावना बनी हुई है। करीब एक सप्ताह से बारिश को ब्रेक लगा हुआ है। बादल छा रहे लेकिन बारिश नहीं हो रही है। फसलों को अब बारिश का इंतजार है। किसानों का कहना है कि पांच-सात दिन में बारिश नहीं हुई तो फसलें खराब होने लगेंगी।
रतलाम जिले में इस साल कृषि विभाग द्वारा तीन लाख 37 हजार 348 हेक्टेयेर क्षेत्र में खरीफ फसल की बोवनी का लक्ष्य रखा गया है। अब तक जिले में तीन लाख 28 हजार 176 हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी की जा चुकी है। इस प्रकार जिले में 97.28 प्रतिशत बोवनी की जा चुकी है। जिले में इस साल मानसून सत्र में 16 जुलाई 2026 तक मात्र नौ इंच बारिश (228.38 मिलीमीटर) ही बारिश हुई है, जबकि पिछले वर्ष इस अवधि तक करीब 16 इंच बारिश (405.75 मिलीमीटर बारिश हो चुकी थी।
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गौरतलब है कि जिले में 1 जून 15 जून के मध्य मानसून आ जाता है, लेकिन इस साल मानसून 27 जुलाई से आया। जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश हुई। वहीं 1 से 15 जून के बीच जिले के कुछ इलाकों में प्री-मानसून की 2 से 3 इंच बारिश होने पर किसानों ने सोयाबीन फसल की बोवनी कर दी थी। इसके बाद मानसून की खेंच के चलते उनकी फसल खराब हो गई और उन्हें बाद में जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश होने से पुन: बोवनी करना पड़ी। ग्राम धामनोद के किसान सुरेश पाटीदार ने बताया कि उन्होंने चार बीघा क्षेत्र में जुलाई के प्रथम सप्ताह में सोयाबीन की बोवनी की थी। 4 से 8 जुलाई के बीच हुई तेज बारिश से खेतों में पानी भर गया था, जिससे फसल खराब हो गई और फिर 10 जुलाई को दोबारा बोवनी करना पड़ी। अब बारिश नहीं हो रही है, जिससे फिर फसल खराब होने की आशंका है। वहीं ग्राम मथूरी के किसान समरथ पाटीदार ने बताया कि काली मिट्टी वाले खेतों में नमी बनी हुई है, वहीं पथरीले इलाके के खेतों में नमी खत्म हो रही और अब फसलों को पानी की जरूरत है। चार-पांच दिन में बारिश नहीं होती है तो फसलें खराब होने लगेंगी। उधर, कृषि विभाग के उप संचालक भीखा वास्के ने बताया कि अधिकांश खेतों में नमी है। किसानों को खेतों में डोरे चलाने और चारा मारने वाली दवा का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। बारिश की जरूरत तो है।
सबसे ज्यादा सोयाबीन का रकबा
रतलाम जिले में खरीफ फसल के दौरान सबसे ज्यादा किसान सोयाबीन की फसल लेते हैं, इस कारण सोयाबीन की बोवनी का रकबा सबसे ज्यादा दो लाख 81 हजार 533 हेक्टेयर क्षेत्र में रखा गया है। वहीं मक्का 27010, धान 50, ज्वार 250, उड़द 825, मूंग 235, अरहर 270, तिल 475, मूंगफली 1750 और कपास की फसल का लक्ष्य 14 हजार 950 हेक्टर क्षेत्र रखा गया है। खरीफ की करीब 98 प्रतिशत बोवनी की जा चुकी है और किसान फसलों की देख रेख करने के साथ अब बारिश आने का इंतजार कर रहे है।
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फसल बीमा योजना का लाभ उठाएं
किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा जारी प्रेस रीलिज के अनुसार भारत सरकार द्वारा रतलाम को अलनीनो से प्रभावित जिलों में घोषित किया है। अलनीनो के कारण रतलाम जिले में अल्प वर्षा व सूखा की स्थिति बनने की संभावना बनी हुई है, जिससे खरीफ फसलों को नुकसान होने की संभावना है। प्रभानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 31 जुलाई तक अधिसूचित खरीफ फसलों का बीमा किया जाएगा। फसल बीमा के लिए किसान आवेदन, आधार कार्ड, बैंक पासबुक व भूमि संबधी पावती की फोटोकॉपी, बुवाई प्रमाण-पत्र, मोबाइल नंबर, फार्मर आईडी होना जरूरी है। सोयाबीन फसल के लिए 1040 रुपये प्रति हेक्टर प्रीमियम, मक्का के लिए 800 रुपये तथा कपास के लिए 3150 रुपये प्रीमियम निर्धारित की गई है। जिले में बड़े पैमाने पर फसलों की क्षति की संभावना को देखते हुए कृषकों को सलाह दी गई है कि वे फसलों के समस्त रकबे का बीमा कराएं, ताकि सूखा, अल्पवर्षा या अन्य किसी प्राकृतिक आपदा के कारण फसलों को नुकसान होने की दशा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल बीमा दावा राशि का लाभ प्राप्त हो सके।
