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MP: डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में AISF व ABVP आमने-सामने, इस शैक्षणिक कार्यक्रम को लेकर हुआ विवाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
Published by: सागर ब्यूरो
Updated Sat, 21 Feb 2026 06:12 PM IST
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सार
डॉ. हरि सिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर में यौन एजुकेशन विषय पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम को लेकर छात्र संगठनों के बीच विवाद हो गया। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन द्वारा आयोजित परिचर्चा का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विरोध किया
आयोजित परिचर्चा का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विरोध किया।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सागर के डॉ. हरि सिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर में उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) और एबीवीपी (ABVP) के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। विवाद की वजह विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित यौन एजुकेशन विषयक जागरूकता कार्यक्रम बना, जिसे लेकर दोनों छात्र संगठनों के बीच तीखी बहस और नारेबाजी शुरू हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एआईएसएफ द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में एजुकेशन को लेकर एक परिचर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में यौन शिक्षा और उससे जुड़े सामाजिक पहलुओं पर जागरूकता बढ़ाना बताया गया। इसी दौरान एबीवीपी के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और कार्यक्रम की विषयवस्तु पर आपत्ति जताते हुए इसका विरोध करने लगे।
देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच बहस तेज हो गई और परिसर में नारेबाजी शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया था। सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों को थाने बुलाकर समझाइश दी।
विरोध के बाद लगे ये नारे
एबीवीपी के विश्वविद्यालय अध्यक्ष गौरव मिश्रा ने आरोप लगाया कि AISF के सदस्य एजुकेशन के नाम पर छात्राओं को बरगलाने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया, तो दूसरी ओर से “मनुवाद मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए गए। मिश्रा ने बयान दिया कि “हम सागर विश्वविद्यालय को जेएनयू नहीं बनने देंगे।” उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से ऐसे कार्यक्रमों की पूर्व अनुमति और निगरानी सुनिश्चित करने की मांग भी की।
एबीवीपी के आरोपों को खारिज किया
वहीं, AISF के सदस्यों ने एबीवीपी के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि कार्यक्रम पूरी तरह जागरूकता पर केंद्रित था और इसमें किसी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री शामिल नहीं थी। AISF का आरोप है कि वे शांतिपूर्वक चर्चा कर रहे थे, तभी दूसरे पक्ष के कार्यकर्ता वहां पहुंचे और “मॉब अटैक” जैसी स्थिति बना दी। उनका कहना था कि कुछ लोगों ने यह भी कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र में एजुकेशन जैसे विषयों पर चर्चा नहीं की जानी चाहिए।
मामले पर सिविल लाइन थाना प्रभारी आनंद ठाकुर ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में दो छात्र संगठनों के बीच विवाद की सूचना मिली थी। पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को थाने लाकर समझाइश दी गई। दोनों ओर से लिखित शिकायतें प्राप्त हुई हैं और मामले की जांच की जा रही है। फिलहाल परिसर में स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
ये भी पढ़ें- Indore News: भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच पथराव, एक दूसरे पर फेंके पत्थर, टमाटर और बोतलें
घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्र राजनीति एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। जहां एक ओर कुछ छात्र एजुकेशन जैसे विषयों पर खुली चर्चा को जरूरी मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ संगठन इसे सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों से जोड़कर देख रहे हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन परिसर में एहतियातन निगरानी बढ़ा दी गई है।
छात्र संगठनों के कार्यकर्ता
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प्राप्त जानकारी के अनुसार, एआईएसएफ द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में एजुकेशन को लेकर एक परिचर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में यौन शिक्षा और उससे जुड़े सामाजिक पहलुओं पर जागरूकता बढ़ाना बताया गया। इसी दौरान एबीवीपी के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और कार्यक्रम की विषयवस्तु पर आपत्ति जताते हुए इसका विरोध करने लगे।
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देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच बहस तेज हो गई और परिसर में नारेबाजी शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया था। सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों को थाने बुलाकर समझाइश दी।
विरोध के बाद लगे ये नारे
एबीवीपी के विश्वविद्यालय अध्यक्ष गौरव मिश्रा ने आरोप लगाया कि AISF के सदस्य एजुकेशन के नाम पर छात्राओं को बरगलाने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया, तो दूसरी ओर से “मनुवाद मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए गए। मिश्रा ने बयान दिया कि “हम सागर विश्वविद्यालय को जेएनयू नहीं बनने देंगे।” उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से ऐसे कार्यक्रमों की पूर्व अनुमति और निगरानी सुनिश्चित करने की मांग भी की।
एबीवीपी के आरोपों को खारिज किया
वहीं, AISF के सदस्यों ने एबीवीपी के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि कार्यक्रम पूरी तरह जागरूकता पर केंद्रित था और इसमें किसी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री शामिल नहीं थी। AISF का आरोप है कि वे शांतिपूर्वक चर्चा कर रहे थे, तभी दूसरे पक्ष के कार्यकर्ता वहां पहुंचे और “मॉब अटैक” जैसी स्थिति बना दी। उनका कहना था कि कुछ लोगों ने यह भी कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र में एजुकेशन जैसे विषयों पर चर्चा नहीं की जानी चाहिए।
मामले पर सिविल लाइन थाना प्रभारी आनंद ठाकुर ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में दो छात्र संगठनों के बीच विवाद की सूचना मिली थी। पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को थाने लाकर समझाइश दी गई। दोनों ओर से लिखित शिकायतें प्राप्त हुई हैं और मामले की जांच की जा रही है। फिलहाल परिसर में स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
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घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्र राजनीति एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। जहां एक ओर कुछ छात्र एजुकेशन जैसे विषयों पर खुली चर्चा को जरूरी मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ संगठन इसे सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों से जोड़कर देख रहे हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन परिसर में एहतियातन निगरानी बढ़ा दी गई है।
छात्र संगठनों के कार्यकर्ता

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