{"_id":"697b63443c04decd1902c679","slug":"satna-news-road-widening-in-chitrakoot-has-brought-a-centre-of-faith-under-its-purview-with-action-against-the-gaurihar-temple-causing-uproar-satna-news-c-1-1-noi1431-3892248-2026-01-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"गौरीहार मंदिर ध्वस्तीकरण मामला: ड्रोन निगरानी में चली JCB, ऐन वक्त पर हाईकोर्ट के आदेश से बदली प्रशासन की दिशा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गौरीहार मंदिर ध्वस्तीकरण मामला: ड्रोन निगरानी में चली JCB, ऐन वक्त पर हाईकोर्ट के आदेश से बदली प्रशासन की दिशा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना
Published by: सतना ब्यूरो
Updated Thu, 29 Jan 2026 07:47 PM IST
विज्ञापन
सार
Satna News: चित्रकूट में सड़क चौड़ीकरण के दौरान प्रशासन ने प्राचीन गौरीहार मंदिर का हिस्सा ध्वस्त किया है। कार्रवाई के बीच हाईकोर्ट का स्टे आया है। पढ़ें पूरी खबर
गौरीहार मंदिर पर बुलडोजर रोका गया
- फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन
विस्तार
धर्म, आस्था और विरासत के लिए प्रसिद्ध चित्रकूट में बुधवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत प्रशासन ने प्राचीन गौरीहार मंदिर के एक हिस्से को ध्वस्त करना शुरू कर दिया। ऐतिहासिक महत्व रखने वाले इस मंदिर पर चली कार्रवाई ने न सिर्फ श्रद्धालुओं की भावनाओं को झकझोरा, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया और संवैधानिक संरक्षण को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए।
प्रशासनिक तैयारी से पहले ही संकेत मिलने लगे थे
बुधवार सुबह से ही गौरीहार मंदिर के आसपास असामान्य हलचल देखी गई। मंदिर परिसर के बाहर भारी पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारी और मशीनें तैनात कर दी गई थीं। सड़क चौड़ीकरण के नक्शे में मंदिर की बारादरी को बाधा मानते हुए उसे हटाने का निर्णय लिया गया था। इस दौरान क्षेत्र में धारा-144 जैसी स्थिति निर्मित रही, जिससे आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई।
ड्रोन कैमरों से निगरानी, फिर चला बुलडोजर
कार्रवाई शुरू करने से पहले मंदिर परिसर की ड्रोन कैमरे से रिकॉर्डिंग कराई गई, ताकि भविष्य में किसी विवाद की स्थिति से बचा जा सके। इसके बाद मंदिर की बारादरी में रखी मूर्तियों, धार्मिक सामग्री और अन्य सामान को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया। तैयारी पूरी होते ही एक पोकलैंड और चार JCB मशीनों ने मंदिर के हिस्से को तोड़ना शुरू किया लगभग एक घंटे तक चले इस ध्वस्तीकरण में मंदिर की ऐतिहासिक संरचना को आंशिक नुकसान पहुँचा।
ऐन वक्त पर हाईकोर्ट का आदेश, बदली कार्रवाई की दिशा
जब ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी थी, तभी प्रशासनिक अधिकारियों को हाईकोर्ट द्वारा स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) जारी किए जाने की जानकारी मिली। आदेश मिलते ही बुलडोजर रोक दिए गए और मंदिर परिसर में काम तत्काल बंद कर दिया गया। इसके बाद प्रशासन ने अपनी मशीनें और अमला हटाकर गायत्री मंदिर क्षेत्र की ओर मोड़ दिया, जहां सड़क परियोजना के अंतर्गत बाउंड्री वॉल हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।
पढे़ं: गुना कोषालय में करोड़ों का स्टाम्प घोटाला, खंजाची पर FIR से मचा हड़कंप; डबल लॉक सिस्टम तोड़कर हेराफेरी
श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत, प्रशासन पर उठे सवाल
प्राचीन मंदिर पर हुई कार्रवाई की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए। लोगों का कहना था कि गौरीहार मंदिर केवल एक संरचना नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन पर जल्दबाजी और संवेदनहीनता का आरोप लगाया, वहीं कई संगठनों ने मंदिर संरक्षण को लेकर न्यायिक लड़ाई जारी रखने की बात कही।
फिलहाल राहत, लेकिन विवाद बरकरार
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से गौरीहार मंदिर के शेष हिस्से को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन सड़क चौड़ीकरण परियोजना को लेकर विवाद अभी थमा नहीं है। प्रशासन का कहना है कि विकास कार्य आवश्यक हैं, जबकि श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों का तर्क है कि विकास और विरासत के बीच संतुलन बनाया जाना चाहिए।
आने वाले दिनों में बढ़ सकती है कानूनी और राजनीतिक हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह मामला अब केवल स्थानीय नहीं रहा। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस पर कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज हो सकती है।
Trending Videos
प्रशासनिक तैयारी से पहले ही संकेत मिलने लगे थे
बुधवार सुबह से ही गौरीहार मंदिर के आसपास असामान्य हलचल देखी गई। मंदिर परिसर के बाहर भारी पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारी और मशीनें तैनात कर दी गई थीं। सड़क चौड़ीकरण के नक्शे में मंदिर की बारादरी को बाधा मानते हुए उसे हटाने का निर्णय लिया गया था। इस दौरान क्षेत्र में धारा-144 जैसी स्थिति निर्मित रही, जिससे आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
ड्रोन कैमरों से निगरानी, फिर चला बुलडोजर
कार्रवाई शुरू करने से पहले मंदिर परिसर की ड्रोन कैमरे से रिकॉर्डिंग कराई गई, ताकि भविष्य में किसी विवाद की स्थिति से बचा जा सके। इसके बाद मंदिर की बारादरी में रखी मूर्तियों, धार्मिक सामग्री और अन्य सामान को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया। तैयारी पूरी होते ही एक पोकलैंड और चार JCB मशीनों ने मंदिर के हिस्से को तोड़ना शुरू किया लगभग एक घंटे तक चले इस ध्वस्तीकरण में मंदिर की ऐतिहासिक संरचना को आंशिक नुकसान पहुँचा।
ऐन वक्त पर हाईकोर्ट का आदेश, बदली कार्रवाई की दिशा
जब ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी थी, तभी प्रशासनिक अधिकारियों को हाईकोर्ट द्वारा स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) जारी किए जाने की जानकारी मिली। आदेश मिलते ही बुलडोजर रोक दिए गए और मंदिर परिसर में काम तत्काल बंद कर दिया गया। इसके बाद प्रशासन ने अपनी मशीनें और अमला हटाकर गायत्री मंदिर क्षेत्र की ओर मोड़ दिया, जहां सड़क परियोजना के अंतर्गत बाउंड्री वॉल हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।
पढे़ं: गुना कोषालय में करोड़ों का स्टाम्प घोटाला, खंजाची पर FIR से मचा हड़कंप; डबल लॉक सिस्टम तोड़कर हेराफेरी
श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत, प्रशासन पर उठे सवाल
प्राचीन मंदिर पर हुई कार्रवाई की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए। लोगों का कहना था कि गौरीहार मंदिर केवल एक संरचना नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन पर जल्दबाजी और संवेदनहीनता का आरोप लगाया, वहीं कई संगठनों ने मंदिर संरक्षण को लेकर न्यायिक लड़ाई जारी रखने की बात कही।
फिलहाल राहत, लेकिन विवाद बरकरार
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से गौरीहार मंदिर के शेष हिस्से को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन सड़क चौड़ीकरण परियोजना को लेकर विवाद अभी थमा नहीं है। प्रशासन का कहना है कि विकास कार्य आवश्यक हैं, जबकि श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों का तर्क है कि विकास और विरासत के बीच संतुलन बनाया जाना चाहिए।
आने वाले दिनों में बढ़ सकती है कानूनी और राजनीतिक हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह मामला अब केवल स्थानीय नहीं रहा। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस पर कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज हो सकती है।

कमेंट
कमेंट X