सतपुड़ा का नया साइलेंट कमांडो: शिकारी और तस्करों पर भारी पड़ रहा डॉग अपोलो, सूंघकर पकड़ता है अपराधी
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में तैनात बेल्जियन मैलिनोइस डॉग अपोलो अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी रोकने में अहम भूमिका निभा रहा है। हाल ही में उसके स्वास्थ्य परीक्षण में वह पूरी तरह फिट मिला। उसकी ट्रैकिंग क्षमता से वन विभाग के एंटी-पोचिंग अभियान को मजबूती मिली है।
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जिस बेल्जियन मैलिनोइस डॉग ब्रीड की फुर्ती, सूंघने की क्षमता और ट्रैकिंग स्किल्स की चर्चा दुनिया भर में होती है, उसी नस्ल का प्रशिक्षित डॉग 'अपोलो' अब मध्यप्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा का मजबूत प्रहरी बन चुका है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसी नस्ल के प्रशिक्षित डॉग का इस्तेमाल अमेरिका के ऑपरेशन नेप्च्यून स्पीयर के दौरान भी किया गया था। अब यही हाई-परफॉर्मेंस ब्रीड सतपुड़ा के घने जंगलों में अवैध शिकारियों और वन्यजीव तस्करों की गतिविधियों पर नजर रखने में वन विभाग की मदद कर रही है। अपोलो की तैनाती के बाद शिकारियों में खौफ और वन विभाग के आत्मविश्वास में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
साल 2025 से सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में तैनात अपोलो का हाल ही में नर्मदापुरम संभागीय पशु चिकित्सालय में रूटीन हेल्थ चेकअप कराया गया। वन विभाग की डॉग स्क्वॉड टीम उसे विशेष वाहन से अस्पताल लेकर पहुंची, जहां संयुक्त समिति की मौजूदगी में उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। पशु चिकित्सक डॉ. अरविंद गुप्ता के अनुसार अपोलो पूरी तरह स्वस्थ और फिट पाया गया। बेहतर फिटनेस बनाए रखने के लिए उसे कैल्शियम और मल्टीविटामिन सप्लीमेंट देने की सलाह दी गई है।
हालांकि, अपोलो की सबसे बड़ी ताकत उसकी मेडिकल फिटनेस नहीं, बल्कि उसकी असाधारण सूंघने और ट्रैकिंग की क्षमता है। उसे विशेष रूप से अवैध शिकार, वन्यजीव तस्करी और अपराधियों की तलाश के लिए प्रशिक्षित किया गया है। घटनास्थल से मिले मामूली सुरागों के आधार पर संदिग्धों तक पहुंचना, अवैध शिकार में इस्तेमाल हथियारों और वाहनों का पता लगाना तथा अपराधियों की गतिविधियों को ट्रैक करना उसकी विशेषता है। यही कारण है कि वन विभाग के एंटी-पोचिंग ऑपरेशन में अपोलो सबसे भरोसेमंद सदस्य बन गया है।
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वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अपोलो की जिम्मेदारी केवल जंगलों तक सीमित नहीं है। वह जंगल से लगे गांवों, हाट-बाजारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी नियमित सर्च ऑपरेशन में हिस्सा लेता है। उसकी तैनाती के बाद वन्यजीव तस्करों और शिकारियों की गतिविधियों पर पहले से अधिक प्रभावी निगरानी रखी जा रही है। विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड का यह संयोजन वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सतपुड़ा के जंगलों में अब शिकारियों के लिए चुनौती केवल वनकर्मियों की गश्त नहीं, बल्कि चार पैरों पर दौड़ता एक ऐसा 'साइलेंट कमांडो' भी है, जो बिना शोर किए सुराग सूंघता है और अपराधियों तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाता है। अपोलो की मौजूदगी साफ संदेश देती है कि अब जंगल में वन्यजीवों का शिकार करना पहले जितना आसान नहीं रह गया है।
