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MP: मनरेगा से गांधी का नाम हटाया, शिवराज के गढ़ से 5 से निकलेगी दिग्विजय सिंह की पदयात्रा, सरकार को चेतावनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: तरुणेंद्र चतुर्वेदी
Updated Tue, 30 Dec 2025 05:30 PM IST
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सार
मनरेगा योजना का नाम बदलकर “विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G-RAM-G)” किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले के विरोध में कांग्रेस सड़क पर उतरने जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह सीहोर से पदयात्रा शुरू करने का ऐलान किया है
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना का नाम बदलकर “विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G-RAM-G)” किए जाने के फैसले ने मध्य प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस अब सड़क पर उतरने जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने ऐलान किया है कि वे 5 जनवरी से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर से पदयात्रा शुरू करेंगे। यह यात्रा केवल नाम बदलने का विरोध नहीं बल्कि गांधी के विचारों और गरिमा की रक्षा का आंदोलन होगी।
दिग्विजय सिंह ने सीहोर में मीडिया से बातचीत में कहा कि यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आत्मा की लड़ाई है। सरकार योजनाओं से गांधी का नाम मिटाना चाहती है, यह देश के इतिहास और आत्मा पर हमला है। उन्होंने बताया कि पदयात्रा सीहोर जिले की किसी ग्राम पंचायत से प्रारंभ होगी, ताकि ग्रामीण भारत की आवाज सीधे दिल्ली तक पहुंचे। यह वही ग्रामीण भारत है, जिसके लिए मनरेगा योजना बनी थी और जिसने लाखों गरीब परिवारों को रोज़गार और सम्मान दिया।
नाम बदलने के पीछे सियासत?
कांग्रेस का आरोप है कि मनरेगा का नाम बदलना कोई प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि वैचारिक हमला है। महात्मा गांधी का नाम हटाकर सरकार उस इतिहास को मिटाना चाहती है, जिसने देश को आज़ादी दिलाई और गरीबों को अधिकार दिए। लोकसभा में इस बदलाव से जुड़ा बिल पास होते ही कांग्रेस ने इसे गांधी विरोधी कदम बताया। दिग्विजय सिंह का कहना है कि जो सरकार गांधी को किताबों से हटाने लगी है, वह देश को किस दिशा में ले जा रही है?
गांव से संसद तक गूंजेगी आवाज
पदयात्रा का उद्देश्य केवल विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि ग्रामीण जनचेतना को जगाना है। दिग्विजय सिंह ग्रामीणों, मज़दूरों, किसानों, महिलाओं और युवाओं से संवाद करेंगे। वे बताएंगे कि कैसे मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं बल्कि गरीब की जीवनरेखा है। यह पदयात्रा राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि जन-आंदोलन का बीज है, जो गांव की गलियों से संसद की सीढ़ियों तक पहुंचेगा।
कांग्रेस का बड़ा राजनीतिक संदेश
कांग्रेस इस मुद्दे को 2025 के राजनीतिक एजेंडे का केंद्रीय मुद्दा बनाने जा रही है। पार्टी मानती है कि मनरेगा से गांधी का नाम हटाना उस भारत की आत्मा को ठेस पहुंचाना है जो सत्य, श्रम और समानता पर खड़ा है। दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यह पदयात्रा तब तक रुकेगी नहीं, जब तक सरकार गांधी के नाम को वापस नहीं लाती।
ये भी पढ़ें- MP News: कांग्रेस का दावा- खंडवा ने AI-तस्वीरों से जीता राष्ट्रीय जल पुरस्कार, प्रशासन ने किया खंडन
सीहोर से देश को संदेश
जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती में कहा कि शिवराज सिंह चौहान का गृह जिला सीहोर इस आंदोलन का केंद्र बनना तय है। यह सिर्फ एक नाम बदलने का विरोध नहीं बल्कि यह तय करेगा कि भारत की आत्मा गांधी में रहेगी या सत्ता की राजनीति में खो जाएगी। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम(मनरेगा) योजना का नाम बदलकर विकसित भारत गारन्टी रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G-RAM-G) कर दिया है। लोकसभा में भी योजना के बदलाव को लेकर बिल पास हो गया है। कांग्रेस इसका विरोध जता रही है, आरोप है कि है नाम बदलकर सरकार राष्ट्र पिता महात्मा गांधी का अपमान कर रही है और वह उनका नाम मिटाना चाहती है।
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दिग्विजय सिंह ने सीहोर में मीडिया से बातचीत में कहा कि यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आत्मा की लड़ाई है। सरकार योजनाओं से गांधी का नाम मिटाना चाहती है, यह देश के इतिहास और आत्मा पर हमला है। उन्होंने बताया कि पदयात्रा सीहोर जिले की किसी ग्राम पंचायत से प्रारंभ होगी, ताकि ग्रामीण भारत की आवाज सीधे दिल्ली तक पहुंचे। यह वही ग्रामीण भारत है, जिसके लिए मनरेगा योजना बनी थी और जिसने लाखों गरीब परिवारों को रोज़गार और सम्मान दिया।
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नाम बदलने के पीछे सियासत?
कांग्रेस का आरोप है कि मनरेगा का नाम बदलना कोई प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि वैचारिक हमला है। महात्मा गांधी का नाम हटाकर सरकार उस इतिहास को मिटाना चाहती है, जिसने देश को आज़ादी दिलाई और गरीबों को अधिकार दिए। लोकसभा में इस बदलाव से जुड़ा बिल पास होते ही कांग्रेस ने इसे गांधी विरोधी कदम बताया। दिग्विजय सिंह का कहना है कि जो सरकार गांधी को किताबों से हटाने लगी है, वह देश को किस दिशा में ले जा रही है?
गांव से संसद तक गूंजेगी आवाज
पदयात्रा का उद्देश्य केवल विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि ग्रामीण जनचेतना को जगाना है। दिग्विजय सिंह ग्रामीणों, मज़दूरों, किसानों, महिलाओं और युवाओं से संवाद करेंगे। वे बताएंगे कि कैसे मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं बल्कि गरीब की जीवनरेखा है। यह पदयात्रा राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि जन-आंदोलन का बीज है, जो गांव की गलियों से संसद की सीढ़ियों तक पहुंचेगा।
कांग्रेस का बड़ा राजनीतिक संदेश
कांग्रेस इस मुद्दे को 2025 के राजनीतिक एजेंडे का केंद्रीय मुद्दा बनाने जा रही है। पार्टी मानती है कि मनरेगा से गांधी का नाम हटाना उस भारत की आत्मा को ठेस पहुंचाना है जो सत्य, श्रम और समानता पर खड़ा है। दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यह पदयात्रा तब तक रुकेगी नहीं, जब तक सरकार गांधी के नाम को वापस नहीं लाती।
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सीहोर से देश को संदेश
जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती में कहा कि शिवराज सिंह चौहान का गृह जिला सीहोर इस आंदोलन का केंद्र बनना तय है। यह सिर्फ एक नाम बदलने का विरोध नहीं बल्कि यह तय करेगा कि भारत की आत्मा गांधी में रहेगी या सत्ता की राजनीति में खो जाएगी। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम(मनरेगा) योजना का नाम बदलकर विकसित भारत गारन्टी रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G-RAM-G) कर दिया है। लोकसभा में भी योजना के बदलाव को लेकर बिल पास हो गया है। कांग्रेस इसका विरोध जता रही है, आरोप है कि है नाम बदलकर सरकार राष्ट्र पिता महात्मा गांधी का अपमान कर रही है और वह उनका नाम मिटाना चाहती है।

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