MP News: नसबंदी कराने गई थी तीन बच्चों की मां, तड़प-तड़पकर दम तोड़ा; चिता की राख से निकली कैंची से हंगामा
सीहोर जिले के भैरुंदा में नसबंदी ऑपरेशन के बाद महिला की मौत का मामला सामने आया है। अंतिम संस्कार के बाद राख से सर्जिकल कैंची मिलने का दावा हुआ। परिजनों और संगठनों ने लापरवाही बताते हुए कलेक्ट्रेट घेराव कर दोषी डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग की।
विस्तार
मामला भैरुंदा क्षेत्र के ग्राम सिंहपुर का है। यहां में रहने वाली तीन बच्चों की मां शिवानी भरोसे के साथ सिविल अस्पताल में नसबंदी ऑपरेशन कराने गई थी। किसी ने नहीं सोचा था कि यह सामान्य समझा जाने वाला ऑपरेशन उसकी जिंदगी का आखिरी पड़ाव बन जाएगा। 12 जनवरी को दोपहर में डॉक्टर रुक्मणी गुलहारिया द्वारा शिवानी का नसबंदी ऑपरेशन किया गया। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के कुछ ही घंटों बाद बिना उचित निगरानी के उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। घर पहुंचते ही शिवानी की हालत बिगड़ने लगी, तेज रक्तस्राव शुरू हुआ और दर्द असहनीय हो गया। परिजन उसे दोबारा अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 15 जनवरी को उसने दम तोड़ दिया।
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नसबंदी के ऑपरेशन में क्यों हुई मौत?
भैरुंदा से जिला अस्पताल सीहोर और फिर भोपाल के निजी अस्पताल तक शिवानी को रेफर किया गया। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान आंत कट गई थी, जिससे संक्रमण पूरे शरीर में फैल गया। यह सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इलाज की तमाम कोशिशों के बावजूद शिवानी की जान नहीं बचाई जा सकी। महिला की मौत के बाद गुस्साए परिजन शव लेकर सिविल अस्पताल भैरुंदा पहुंचे और जमकर हंगामा किया। उनका आरोप था कि डॉक्टर की लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। प्रशासन ने समझाइश देकर मामला शांत कराया, लेकिन परिजनों का दर्द और गुस्सा कम नहीं हुआ। अगले दिन भारी मन से शिवानी का अंतिम संस्कार किया गया।
राख से मिली कैंची
अंत्येष्टि के बाद अस्थि संचय के दौरान परिजनों को चिता की राख से कैंची जैसी सर्जिकल चिमटी मिलने का दावा किया गया। यह दृश्य देखकर हर किसी की रूह कांप उठी। भैरुंदा क्षेत्र के ग्राम सिंहपुर निवासी पति नवल सिंह बारेला का कहना है कि यही उपकरण ऑपरेशन के दौरान पेट में छोड़ दिया गया था। हालांकि महिला की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। लेकिन श्मशान में मिला यह 'लोहा' किसी बड़े सच की गवाही दे रहा है। यह कैंची सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह मामला केवल लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य बन जाता है।
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कलेक्ट्रेट घिरा, जय जोहार के नारों से गूंजा परिसर
भैरुंदा सिविल अस्पताल में नसबंदी ऑपरेशन के दौरान हुई गंभीर चूक और उसके बाद बरती गई संवेदनहीनता के खिलाफ बुधवार को जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर ‘जय जोहार’ के नारों से गूंज उठा। भीम आर्मी और सर्व आदिवासी समाज ने कलेक्टर कार्यालय के बाहर उग्र प्रदर्शन कर इसे ‘चिकित्सीय हत्या’ करार दिया और दोषी डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग की। बुधवार को भीम आर्मी और सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले बड़ी संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे। ‘जय जोहार’ के नारों के साथ प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया। समाज के नेताओं ने स्पष्ट कहा कि यह सिस्टम की हत्या है, न कि सिर्फ एक महिला की मौत। प्रदर्शनकारियों ने डॉ. रुक्मणी गुलहारिया की तत्काल गिरफ्तारी, गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर और सेवा से बर्खास्तगी की मांग की। शासन द्वारा प्रस्तावित 2 लाख रुपये की सहायता को समाज ने “सरकारी खैरात” बताते हुए ठुकरा दिया और 3 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग रखी।
बीएमओ ने कहा ऐसे उपकरण का उपयोग नहीं होता
इस मामले में सिविल अस्पताल भैरुंदा के प्रभारी बीएमओ डॉ. प्रफुल्ल कुमार ने कहा कि महिला का नसबंदी ऑपरेशन दूरबीन पद्धति से किया गया था, जिसमें सामान्य तौर पर इस तरह के उपकरण का उपयोग नहीं होता। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है।
यह कोई मेडिकल लापरवाही नहीं, खुली सरकारी हत्या
इस मामले में कांग्रेस के पूर्व विधायक शैलेन्द्र पटेल का कहना है कि यह कोई मेडिकल लापरवाही नहीं, खुली सरकारी हत्या है। अंतिम संस्कार के बाद पेट से निकली कैंची चीख-चीखकर बता रही है कि सरकारी अस्पतालों में मासूम ज़िंदगियां कितनी सस्ती हो चुकी हैं। तीन बच्चों की मां भरोसे के साथ इलाज कराने गई थी, लौटकर आई तो सिर्फ़ मौत। पोस्टमार्टम से पहले ही सच्चाई सामने आ गई। हर झूठ, हर बहाना बेनकाब हो गया। जब चार-चार बार मुख्यमंत्री देने वाला इलाक़ा भी जवाबदेही से खाली हो, तो समझिए सत्ता पूरी तरह संवेदनाहीन हो चुकी है।

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