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Sehore News: यूट्यूब की निवेश रील देख एलआईसी अधिकारी फंसे साइबर जाल में, 41.60 लाख रुपये की ठगी; सावधान रहें
Mon, 13 Jul 2026 12:52 PM IST
सीहोर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: सीहोर ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jul 2026 12:52 PM IST
सार
सीहोर में यूट्यूब पर निवेश का विज्ञापन देखकर एलआईसी के एक विकास अधिकारी साइबर ठगी का शिकार हो गए। साइबर अपराधियों ने मोटे मुनाफे का झांसा देकर उनसे 41.60 लाख रुपये की ठगी कर ली। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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साइबर ठगी का मामला।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सीहोर में सोशल मीडिया पर चंद मिनटों में मोटा मुनाफा कमाने का लालच एक बार फिर भारी पड़ गया। इस बार साइबर ठगों ने एलआईसी के विकास अधिकारी को ही अपने जाल में फंसा लिया। यूट्यूब पर दिखाई गई एक निवेश संबंधी रील से शुरू हुई बातचीत आखिरकार 41 लाख 60 हजार रुपये की बड़ी साइबर ठगी में बदल गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) एवं 319(2) के तहत अपराध दर्ज कर साइबर अपराधियों की तलाश शुरू कर दी है।
रील पर क्लिक करते ही खुला साइबर जाल
पुलिस के अनुसार चाणक्यपुरी निवासी संदीप कुमार द्विवेदी, जो एलआईसी में विकास अधिकारी हैं, ने लिखित शिकायत देकर बताया कि 22 मई 2026 को वह यूट्यूब पर रील देख रहे थे। इसी दौरान उन्हें मेग्नम इक्विटी नाम से निवेश का विज्ञापन दिखाई दिया। रील में अधिक मुनाफे का दावा किया गया था और एक पॉप-अप लिंक दिया गया था। लिंक पर क्लिक करते ही वह सीधे व्हाट्सएप चैट पर पहुंच गए, जहां खुद को निवेश विशेषज्ञ बताने वाले लोगों ने उनसे संपर्क किया।
निवेश के नाम पर बनाया भरोसा
शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने खुद को बड़ी निवेश संस्था का प्रतिनिधि बताते हुए दावा किया कि वे कंपनियों के IPO, FPO, OTC और AI आधारित निवेश कम कीमत पर उपलब्ध कराते हैं। इसके बाद उन्होंने एक मोबाइल एप डाउनलोड कराया और उसी एप पर निवेश करने के लिए कहा। शुरुआत में लगातार भरोसा दिलाकर बड़ी कमाई का लालच दिया गया, जिससे शिकायतकर्ता उनके झांसे में आ गया।
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कई बैंक खातों में भेजवाई 41.60 लाख की रकम
पुलिस जांच के अनुसार साइबर ठगों ने अलग-अलग बैंक खातों में कई किस्तों में राशि जमा कराई। शिकायतकर्ता ने 9 जून को 14 लाख रुपये, 8 जून को 6 लाख रुपये, 12 जून को 15 लाख 60 हजार रुपये तथा 1 जुलाई को 6 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के माध्यम से भेज दिए। इस तरह कुल 41 लाख 60 हजार रुपये आरोपियों के खातों में पहुंच गए।
रैंकिंग और इनाम का झांसा देकर बनाए रखा विश्वास
साइबर ठगों ने शिकायतकर्ता का भरोसा बनाए रखने के लिए नया हथकंडा अपनाया। उन्होंने कहा कि जो सबसे अधिक निवेश करेगा, उसकी रैंकिंग बेहतर होगी और उसे इनाम मिलेगा। इसी विश्वास को मजबूत करने के लिए 24 जून को शिकायतकर्ता की पत्नी प्रियंका द्विवेदी के बैंक खाते में 50 हजार रुपये भी ट्रांसफर किए गए। इससे शिकायतकर्ता को लगा कि निवेश पूरी तरह सुरक्षित है और वह लगातार रकम जमा करता रहा।
फर्जी IPO अलॉटमेंट दिखाकर मांगे 22 लाख रुपये
शिकायत में बताया गया कि 6 जुलाई को एप में एक कंपनी का IPO अलॉट होने का संदेश दिखाया गया। एप में मूल राशि और लाभ जोड़कर करीब 22 लाख रुपये अतिरिक्त राशि दिखाई गई, लेकिन खाते का बैलेंस माइनस 22 लाख रुपये दर्शाया गया। आरोपियों ने कहा कि यदि यह अंतर राशि जमा नहीं की गई तो पूरा निवेश सेबी द्वारा जब्त कर लिया जाएगा और निकासी भी संभव नहीं होगी।
बैंक मैनेजर की सलाह से खुला पूरा खेल
लगातार दबाव और नई राशि जमा कराने की मांग के बाद शिकायतकर्ता ने अपनी बैंक शाखा के प्रबंधक से संपर्क किया। बैंक प्रबंधक ने पूरे मामले को साइबर ठगी बताते हुए आगे कोई राशि जमा नहीं करने की सलाह दी और तत्काल पुलिस से शिकायत करने को कहा। इसके बाद पीड़ित सीधे कोतवाली थाना पहुंचा और पूरी घटना की लिखित शिकायत दर्ज कराई।
ये भी पढ़ें- Datia By-Election: एक मंच पर होंगे कई दिग्गज, आशुतोष तिवारी के नामांकन पर BJP का दिखेगा सियासी शक्ति प्रदर्शन
पुलिस ने दर्ज किया केस, साइबर ठगों की तलाश तेज
कोतवाली थाने ने शिकायत की जांच के बाद प्रथम दृष्टया साइबर धोखाधड़ी का मामला पाते हुए अज्ञात आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) और 319(2) के तहत एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। कोतवाली टीआई रविंद्र यादव ने बताया कि पुलिस व्हाट्सएप चैट, बैंक खातों, मोबाइल एप, ट्रांजेक्शन डिटेल और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर साइबर अपराधियों की पहचान करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सोशल मीडिया पर दिखने वाले निवेश के झांसे से बचना चाहिए और किसी भी अनजान एप या लिंक पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करनी चाहिए।
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रील पर क्लिक करते ही खुला साइबर जाल
पुलिस के अनुसार चाणक्यपुरी निवासी संदीप कुमार द्विवेदी, जो एलआईसी में विकास अधिकारी हैं, ने लिखित शिकायत देकर बताया कि 22 मई 2026 को वह यूट्यूब पर रील देख रहे थे। इसी दौरान उन्हें मेग्नम इक्विटी नाम से निवेश का विज्ञापन दिखाई दिया। रील में अधिक मुनाफे का दावा किया गया था और एक पॉप-अप लिंक दिया गया था। लिंक पर क्लिक करते ही वह सीधे व्हाट्सएप चैट पर पहुंच गए, जहां खुद को निवेश विशेषज्ञ बताने वाले लोगों ने उनसे संपर्क किया।
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निवेश के नाम पर बनाया भरोसा
शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने खुद को बड़ी निवेश संस्था का प्रतिनिधि बताते हुए दावा किया कि वे कंपनियों के IPO, FPO, OTC और AI आधारित निवेश कम कीमत पर उपलब्ध कराते हैं। इसके बाद उन्होंने एक मोबाइल एप डाउनलोड कराया और उसी एप पर निवेश करने के लिए कहा। शुरुआत में लगातार भरोसा दिलाकर बड़ी कमाई का लालच दिया गया, जिससे शिकायतकर्ता उनके झांसे में आ गया।
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कई बैंक खातों में भेजवाई 41.60 लाख की रकम
पुलिस जांच के अनुसार साइबर ठगों ने अलग-अलग बैंक खातों में कई किस्तों में राशि जमा कराई। शिकायतकर्ता ने 9 जून को 14 लाख रुपये, 8 जून को 6 लाख रुपये, 12 जून को 15 लाख 60 हजार रुपये तथा 1 जुलाई को 6 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के माध्यम से भेज दिए। इस तरह कुल 41 लाख 60 हजार रुपये आरोपियों के खातों में पहुंच गए।
रैंकिंग और इनाम का झांसा देकर बनाए रखा विश्वास
साइबर ठगों ने शिकायतकर्ता का भरोसा बनाए रखने के लिए नया हथकंडा अपनाया। उन्होंने कहा कि जो सबसे अधिक निवेश करेगा, उसकी रैंकिंग बेहतर होगी और उसे इनाम मिलेगा। इसी विश्वास को मजबूत करने के लिए 24 जून को शिकायतकर्ता की पत्नी प्रियंका द्विवेदी के बैंक खाते में 50 हजार रुपये भी ट्रांसफर किए गए। इससे शिकायतकर्ता को लगा कि निवेश पूरी तरह सुरक्षित है और वह लगातार रकम जमा करता रहा।
फर्जी IPO अलॉटमेंट दिखाकर मांगे 22 लाख रुपये
शिकायत में बताया गया कि 6 जुलाई को एप में एक कंपनी का IPO अलॉट होने का संदेश दिखाया गया। एप में मूल राशि और लाभ जोड़कर करीब 22 लाख रुपये अतिरिक्त राशि दिखाई गई, लेकिन खाते का बैलेंस माइनस 22 लाख रुपये दर्शाया गया। आरोपियों ने कहा कि यदि यह अंतर राशि जमा नहीं की गई तो पूरा निवेश सेबी द्वारा जब्त कर लिया जाएगा और निकासी भी संभव नहीं होगी।
बैंक मैनेजर की सलाह से खुला पूरा खेल
लगातार दबाव और नई राशि जमा कराने की मांग के बाद शिकायतकर्ता ने अपनी बैंक शाखा के प्रबंधक से संपर्क किया। बैंक प्रबंधक ने पूरे मामले को साइबर ठगी बताते हुए आगे कोई राशि जमा नहीं करने की सलाह दी और तत्काल पुलिस से शिकायत करने को कहा। इसके बाद पीड़ित सीधे कोतवाली थाना पहुंचा और पूरी घटना की लिखित शिकायत दर्ज कराई।
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पुलिस ने दर्ज किया केस, साइबर ठगों की तलाश तेज
कोतवाली थाने ने शिकायत की जांच के बाद प्रथम दृष्टया साइबर धोखाधड़ी का मामला पाते हुए अज्ञात आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) और 319(2) के तहत एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। कोतवाली टीआई रविंद्र यादव ने बताया कि पुलिस व्हाट्सएप चैट, बैंक खातों, मोबाइल एप, ट्रांजेक्शन डिटेल और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर साइबर अपराधियों की पहचान करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सोशल मीडिया पर दिखने वाले निवेश के झांसे से बचना चाहिए और किसी भी अनजान एप या लिंक पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करनी चाहिए।
