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एमपी में फिर पतंग के मांझे ने काटा गला: बुधनी में बाइक सवार खून से लथपथ, जिंदगी और मौत के बीच लड़ रहा जंग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: सीहोर ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jan 2026 08:05 AM IST
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सार
Sehore: बुधनी में ड्यूटी पर जा रहे बाइक सवार युवक का गला प्रतिबंधित पतंग के मांझे से कट गया। हेलमेट पहनने के बावजूद उसे गंभीर चोट आई। हालांकि उसे समय पर अस्पताल पहुंचाया गया।
सांकेतिक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सीहोर जिले के बुधनी नगर में एक सामान्य सुबह उस वक्त भयावह बन गई, जब रोज की तरह ड्यूटी पर जा रहा एक युवक अचानक जिंदगी और मौत के बीच झूल गया। माना क्षेत्र के नयन गार्डन के पास सड़क पर फैले पतंग के खतरनाक मांझे ने बाइक सवार युवक के गले पर ऐसा वार किया कि पलभर में खून की धार बहने लगी। यह हादसा न केवल पीड़ित परिवार, बल्कि मौके पर मौजूद हर व्यक्ति के लिए रोंगटे खड़े कर देने वाला था।
घायल युवक की पहचान 43 वर्षीय सुखदेव वर्मा पिता हीरालाल के रूप में हुई है। वह एक अन्य व्यक्ति के साथ बाइक से अपनी कंपनी की ड्यूटी पर जा रहे थे। रास्ते में उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि सड़क पर फैला एक पतला सा मांझा उनकी जान लेने को तैयार बैठा है। जैसे ही बाइक आगे बढ़ी, मांझा गले में फंस गया और तेज झटके के साथ गला कट गया।
पढे़ं: जबलपुर-बरेला कार हादसा: रफ्तार की शिकार तीन और महिलाओं ने तोड़ा दम, दो लड़ रहीं मौत से जंग; अब तक पांच की मौत
हेलमेट भी नहीं दे सका पूरी सुरक्षा
सुखदेव वर्मा ने बताया कि उन्होंने हेलमेट पहन रखा था, लेकिन हेलमेट की नीचे लगी बद्दी मांझे की धार नहीं झेल सकी। बद्दी कटते ही मांझा सीधे गले से टकराया और गहरी चोट लग गई। कुछ ही सेकंड में अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। सड़क पर गिरते खून ने यह साफ कर दिया कि मामला कितना गंभीर है। हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों और परिजनों ने इंसानियत की मिसाल पेश की। बिना समय गंवाए घायल सुखदेव को निजी मधुबन अस्पताल ले जाया गया। रास्ते भर उनकी हालत नाजुक बनी रही, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया। चिकित्सकों के अनुसार यदि कुछ मिनट की भी देरी होती, तो परिणाम बेहद दुखद हो सकता था।
प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम बिक रहा मौत का सामान
यह घटना एक बार फिर पतंगबाजी में इस्तेमाल होने वाले प्रतिबंधित और खतरनाक मांजे पर गंभीर सवाल खड़े करती है। प्रशासन द्वारा बार-बार चेतावनी और प्रतिबंध के बावजूद यह जानलेवा मांझा बाजार में आसानी से उपलब्ध है। हर साल ऐसे मांजे से राहगीर, बच्चे और पक्षी घायल होते हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई का अभाव साफ नजर आता है। फिलहाल इस मामले में पुलिस में कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन यह हादसा समाज और प्रशासन दोनों के लिए चेतावनी है। थोड़ी-सी लापरवाही किसी की जिंदगी छीन सकती है। जरूरत है कि प्रतिबंधित मांझे पर सख्ती से रोक लगे और लोग भी समझें कि मनोरंजन के नाम पर किसी की जान खतरे में डालना अमानवीय है।
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घायल युवक की पहचान 43 वर्षीय सुखदेव वर्मा पिता हीरालाल के रूप में हुई है। वह एक अन्य व्यक्ति के साथ बाइक से अपनी कंपनी की ड्यूटी पर जा रहे थे। रास्ते में उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि सड़क पर फैला एक पतला सा मांझा उनकी जान लेने को तैयार बैठा है। जैसे ही बाइक आगे बढ़ी, मांझा गले में फंस गया और तेज झटके के साथ गला कट गया।
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सुखदेव वर्मा ने बताया कि उन्होंने हेलमेट पहन रखा था, लेकिन हेलमेट की नीचे लगी बद्दी मांझे की धार नहीं झेल सकी। बद्दी कटते ही मांझा सीधे गले से टकराया और गहरी चोट लग गई। कुछ ही सेकंड में अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। सड़क पर गिरते खून ने यह साफ कर दिया कि मामला कितना गंभीर है। हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों और परिजनों ने इंसानियत की मिसाल पेश की। बिना समय गंवाए घायल सुखदेव को निजी मधुबन अस्पताल ले जाया गया। रास्ते भर उनकी हालत नाजुक बनी रही, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया। चिकित्सकों के अनुसार यदि कुछ मिनट की भी देरी होती, तो परिणाम बेहद दुखद हो सकता था।
प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम बिक रहा मौत का सामान
यह घटना एक बार फिर पतंगबाजी में इस्तेमाल होने वाले प्रतिबंधित और खतरनाक मांजे पर गंभीर सवाल खड़े करती है। प्रशासन द्वारा बार-बार चेतावनी और प्रतिबंध के बावजूद यह जानलेवा मांझा बाजार में आसानी से उपलब्ध है। हर साल ऐसे मांजे से राहगीर, बच्चे और पक्षी घायल होते हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई का अभाव साफ नजर आता है। फिलहाल इस मामले में पुलिस में कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन यह हादसा समाज और प्रशासन दोनों के लिए चेतावनी है। थोड़ी-सी लापरवाही किसी की जिंदगी छीन सकती है। जरूरत है कि प्रतिबंधित मांझे पर सख्ती से रोक लगे और लोग भी समझें कि मनोरंजन के नाम पर किसी की जान खतरे में डालना अमानवीय है।
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