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Sehore News: नर्मदा जयंती पर भैरूंदा से नीलकंठ तक दंडवत यात्रा, दीपों से होगा मां का श्रृंगार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: सीहोर ब्यूरो
Updated Fri, 23 Jan 2026 09:05 PM IST
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सार
Sehore News: 25 जनवरी को मां नर्मदा जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर नवा परायण समिति और नगर परिषद अध्यक्ष मारुति शिशिर के नेतृत्व में गांधी चौक से नीलकंठ घाट तक विशाल दंडवत यात्रा निकाला जाएगा।
नर्मदा
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विस्तार
सीहोर जिले के भैरूंदा नगर में जीवनदायिनी मां नर्मदा की जयंती इस वर्ष भी अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। 25 जनवरी, रविवार को नर्मदा जयंती के अवसर पर पूरा नगर भक्ति के रंग में रंगा नजर आएगा। प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी नवा परायण समिति और नगर परिषद अध्यक्ष मारुति शिशिर के नेतृत्व में विशाल दंडवत यात्रा एवं चल समारोह का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिक भक्ति का सशक्त उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।
छोटा बाजार से प्रारंभ होगी यात्रा
नगर परिषद अध्यक्ष मारुति शिशिर ने बताया कि दंडवत यात्रा और चल समारोह रविवार, 25 जनवरी को सुबह 9 बजे गांधी चौक, छोटा बाजार से प्रारंभ होगा। यह यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई मां नर्मदा के पावन तट नीलकंठ पहुंचेगी। दंडवत यात्रा में श्रद्धालु लगभग आठ किलोमीटर की दूरी दंडवत करते हुए तय करेंगे। अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और मां नर्मदा के प्रति अटूट श्रद्धा के साथ श्रद्धालु इस कठिन लेकिन पुण्यदायी यात्रा में सहभागी बनेंगे।
व्यापारियों और श्रद्धालुओं से सहभागिता की अपील
आयोजन समिति ने नगर के सभी दुकानदारों और व्यापारियों से विशेष आग्रह किया है कि वे इस पावन अवसर पर सुबह लगभग दो घंटे के लिए अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर चल समारोह में सम्मिलित हों। समिति का उद्देश्य है कि पूरा नगर एकजुट होकर मां नर्मदा की भक्ति में सहभागी बने। दंडवत यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए नीलकंठ घाट पर विशेष भोजन व्यवस्था भी की गई है, जिससे यात्रा पूर्ण करने के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद और भोजन सुलभ हो सके।
नीलकंठ तट पर दिव्यता और दीपों की छटा
नर्मदा जयंती की रात्रि में नीलकंठ तट का दृश्य अत्यंत अलौकिक और भावविभोर करने वाला होता है। मां नर्मदा का भव्य श्रृंगार किया जाएगा, जो भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनेगा। संध्या होते ही हजारों महिला-पुरुष श्रद्धालु मां नर्मदा में स्नान कर दीपदान करेंगे। दीपों की रोशनी से पूरा तट जगमगा उठेगा और वातावरण भक्तिमय हो जाएगा। शाम 6 बजे होने वाली महाआरती में हजारों कंठों से नर्मदाष्टक का सामूहिक गान संपूर्ण क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगा।
पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश
आयोजन समिति ने इस वर्ष पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व दिया है। मां नर्मदा को कचरा मुक्त रखने के संकल्प के साथ श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे प्लास्टिक या डिस्पोजेबल दीयों का उपयोग न करें। इसके स्थान पर घर से आटे के दीये बनाकर लाने का आग्रह किया गया है। आटे के दीये न केवल धार्मिक रूप से पवित्र माने जाते हैं, बल्कि जल में प्रवाहित होने के बाद जलीय जीवों और मछलियों के आहार के रूप में भी उपयोगी सिद्ध होते हैं। यह पहल आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण का सुंदर संदेश देती है।
ये भी पढ़ें: बैटरी ट्राइसाइकिल को लेकर दिव्यांग युवक ने किया हंगामा, कलेक्टर को हटाने की कर दी मांग
कन्या भोज और सेवा भाव की परंपरा
नीलकंठ नर्मदा जयंती समिति द्वारा लगातार 30वें वर्ष सामाजिक समरसता और सेवा भाव के तहत कन्या भोज का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 24 जनवरी, शनिवार को प्रातः 10 बजे मिलन गार्डन में होगा। इसके अगले दिन 25 जनवरी को नीलकंठ घाट पर सायं 4 बजे से अभिषेक, श्रृंगार एवं दीपदान का कार्यक्रम संपन्न होगा। यह संपूर्ण आयोजन नर्मदा मैया के प्रति श्रद्धा, समाज में सेवा भावना और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को एक साथ साकार करता है।
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छोटा बाजार से प्रारंभ होगी यात्रा
नगर परिषद अध्यक्ष मारुति शिशिर ने बताया कि दंडवत यात्रा और चल समारोह रविवार, 25 जनवरी को सुबह 9 बजे गांधी चौक, छोटा बाजार से प्रारंभ होगा। यह यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई मां नर्मदा के पावन तट नीलकंठ पहुंचेगी। दंडवत यात्रा में श्रद्धालु लगभग आठ किलोमीटर की दूरी दंडवत करते हुए तय करेंगे। अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और मां नर्मदा के प्रति अटूट श्रद्धा के साथ श्रद्धालु इस कठिन लेकिन पुण्यदायी यात्रा में सहभागी बनेंगे।
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व्यापारियों और श्रद्धालुओं से सहभागिता की अपील
आयोजन समिति ने नगर के सभी दुकानदारों और व्यापारियों से विशेष आग्रह किया है कि वे इस पावन अवसर पर सुबह लगभग दो घंटे के लिए अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर चल समारोह में सम्मिलित हों। समिति का उद्देश्य है कि पूरा नगर एकजुट होकर मां नर्मदा की भक्ति में सहभागी बने। दंडवत यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए नीलकंठ घाट पर विशेष भोजन व्यवस्था भी की गई है, जिससे यात्रा पूर्ण करने के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद और भोजन सुलभ हो सके।
नीलकंठ तट पर दिव्यता और दीपों की छटा
नर्मदा जयंती की रात्रि में नीलकंठ तट का दृश्य अत्यंत अलौकिक और भावविभोर करने वाला होता है। मां नर्मदा का भव्य श्रृंगार किया जाएगा, जो भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनेगा। संध्या होते ही हजारों महिला-पुरुष श्रद्धालु मां नर्मदा में स्नान कर दीपदान करेंगे। दीपों की रोशनी से पूरा तट जगमगा उठेगा और वातावरण भक्तिमय हो जाएगा। शाम 6 बजे होने वाली महाआरती में हजारों कंठों से नर्मदाष्टक का सामूहिक गान संपूर्ण क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगा।
पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश
आयोजन समिति ने इस वर्ष पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व दिया है। मां नर्मदा को कचरा मुक्त रखने के संकल्प के साथ श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे प्लास्टिक या डिस्पोजेबल दीयों का उपयोग न करें। इसके स्थान पर घर से आटे के दीये बनाकर लाने का आग्रह किया गया है। आटे के दीये न केवल धार्मिक रूप से पवित्र माने जाते हैं, बल्कि जल में प्रवाहित होने के बाद जलीय जीवों और मछलियों के आहार के रूप में भी उपयोगी सिद्ध होते हैं। यह पहल आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण का सुंदर संदेश देती है।
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कन्या भोज और सेवा भाव की परंपरा
नीलकंठ नर्मदा जयंती समिति द्वारा लगातार 30वें वर्ष सामाजिक समरसता और सेवा भाव के तहत कन्या भोज का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 24 जनवरी, शनिवार को प्रातः 10 बजे मिलन गार्डन में होगा। इसके अगले दिन 25 जनवरी को नीलकंठ घाट पर सायं 4 बजे से अभिषेक, श्रृंगार एवं दीपदान का कार्यक्रम संपन्न होगा। यह संपूर्ण आयोजन नर्मदा मैया के प्रति श्रद्धा, समाज में सेवा भावना और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को एक साथ साकार करता है।

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