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Sehore news: वीआईटी भोपाल में टाइफाइड का तांडव, 15 दिन में 43 छात्र चपेट में; प्रबंधन पर सच्चाई छिपाने के आरोप

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Sat, 25 Apr 2026 06:46 PM IST
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सार

सीहोर स्थित वीआईटी भोपाल में 15 दिनों में 43 छात्र टाइफाइड से संक्रमित पाए गए, जबकि 285 से अधिक छात्र अस्पताल पहुंचे। खाद्य सामग्री की जांच जारी है, लेकिन प्रबंधन इसे सामान्य बीमारी और अफवाह बताकर मामले को हल्का दिखाने की कोशिश कर रहा है।

Sehore news:Typhoid scare at VIT Bhopal: 43 students infected in 15 days, management denies crisis
सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

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सीहोर जिले स्थित वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी में टाइफाइड संक्रमण ने अचानक गंभीर रूप ले लिया है। महज 15 दिनों में 43 छात्रों के संक्रमित पाए जाने से पूरे कैंपस में हड़कंप मच गया है। शुरुआत में यह संख्या 28 थी, जो तेजी से बढ़कर 43 तक पहुंच गई। हालात ऐसे हैं कि लगभग हर दिन नए मरीज सामने आ रहे हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों में चिंता और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं।

बीमारी का असर व्यापक होता जा रहा है। पिछले दो सप्ताह में 285 से अधिक छात्र इलाज के लिए अस्पताल पहुंच चुके हैं। शुक्रवार को करीब 15 छात्र तेज बुखार और कमजोरी की शिकायत लेकर चिरायु मेडिकल कॉलेज पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें वापस भेज दिया गया, लेकिन लगातार बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. अजय गोयनका के अनुसार, गुरुवार को 8 और शुक्रवार को 5 छात्रों की रिपोर्ट टाइफाइड पॉजिटिव आई, जबकि शनिवार को भी दो नए मामलों की पुष्टि हुई है।

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मैस पर उठे सवाल, फूड सैंपल जांच के दायरे मेंसंक्रमण के स्रोत का पता लगाने के लिए फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने कैंपस की मैस की जांच शुरू कर दी है। पनीर, छोले की सब्जी, पानी पुरी मसाला और पीने के पानी के सैंपल लेकर स्टेट फूड लैब भेजे गए हैं। मैस का संचालन मयूरी केटर्स, एबी केटरिंग और रेसन्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है, जिनकी कार्यप्रणाली अब जांच के घेरे में है। 22 अप्रैल को लिए गए सैंपल की रिपोर्ट 7 से 10 दिनों में आने की संभावना है। फूड सेफ्टी ऑफिसर ज्योति बंसल ने इसकी पुष्टि की है। यदि रिपोर्ट में गड़बड़ी पाई जाती है, तो मामला और गंभीर हो सकता है।

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प्रबंधन का दावा ‘स्थिति सामान्य’, छात्रों में नाराजगी
जहां एक ओर छात्र लगातार बीमार हो रहे हैं, वहीं विश्वविद्यालय प्रबंधन इस स्थिति को ‘अफवाह’ बताते हुए सामान्य बीमारी करार दे रहा है। पीआरओ संदीप रघुवंशी के अनुसार, बदलते मौसम के कारण ऐसी बीमारियां होना सामान्य है और 18 हजार छात्रों वाले बड़े कैंपस में कुछ मामलों का सामने आना असामान्य नहीं है। हालांकि, लगातार बढ़ते टाइफाइड मामलों और बड़ी संख्या में छात्रों के अस्पताल पहुंचने से प्रबंधन के इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं।

कैंपस खाली होने लगा, छात्र लौट रहे घर
संक्रमण और भीषण गर्मी के कारण कैंपस धीरे-धीरे खाली होता जा रहा है। प्रथम वर्ष के छात्रों को पहले ही अवकाश दे दिया गया था, जबकि दूसरे और तीसरे वर्ष के छात्र परीक्षाएं समाप्त होते ही घर लौट रहे हैं। थर्ड ईयर के छात्र अमन के अनुसार, अब कैंपस में बहुत कम छात्र बचे हैं और अधिकांश जल्द ही लौटने की तैयारी में हैं। छात्रों का कहना है कि होस्टल और अकादमिक ब्लॉक्स के बीच लंबी दूरी तथा तेज गर्मी ने उनकी स्थिति और खराब कर दी है, जिससे बीमारी का खतरा बढ़ गया है। अब सभी की नजरें फूड सैंपल की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि संक्रमण का कारण मौसम है या कैंपस में कोई गंभीर लापरवाही।

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