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खौफनाक मंजर: एक ही अर्थी पर निकले पांच शव, एक ही चिता पर दी गई अंतिम विदाई; कार में जिंदा जले थे पांचों लोग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर
Published by: श्योपुर ब्यूरो
Updated Fri, 01 May 2026 05:03 PM IST
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सार
अलवर एक्सप्रेस-वे हादसे में श्योपुर के एक ही परिवार के पांच लोगों की जलकर मौत हो गई थी। उसके बाद आज का दृश्य भी डरावना था। बक्सों में भरकर लाशें गांव पहुंची थीं। एक ही चिता पर सभी पांचों शवों को रखकर निकाला गया। जिसने भी ये दिल दहला देने वाला दृश्य देखा, अपने आंसू नहीं रोक सका।
श्योपुर में लाशों के बक्से चिता पर रखते रिश्तेदार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान के अलवर में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर हुए भीषण सड़क हादसे ने श्योपुर के चैनपुरा गांव को झकझोर कर रख दिया। हादसे में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की जलकर मौत हो गई थी। शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे जब एक ही अर्थी पर पांच कार्टन में रखी अस्थियों की अंतिम यात्रा निकली तो पूरा गांव शोक में डूब गया। निजी खेत में एक ही चिता पर पांचों कार्टन रखकर अंतिम संस्कार किया गया। दामाद विनोद आदिवासी ने मुखाग्नि दी।
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यह दर्दनाक हादसा बुधवार देर रात लक्ष्मणगढ़ के पास एक्सप्रेस-वे के पिलर 115/300 पर हुआ। श्योपुर के चैनपुरा निवासी पार्वती बाई (55), दामाद संतोष (35), बेटी शशि (30), नाती साक्षी (9) और रिश्तेदार छोटीबाई (79) वैष्णो देवी दर्शन के लिए अर्टिगा कार से निकले थे। रात में कार में भीषण आग लग गई। पांचों की मौके पर ही मौत हो गई। ड्राइवर विनोद मेहरा ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसा इतना भयावह था कि शवों की पहचान मुश्किल हो गई। पुलिस ने डीएनए सैंपल लेकर पांच कार्टन में अस्थियां श्योपुर भेजीं।
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आखिरी इच्छा पूरी करने निकला था परिवार
पार्वतीबाई के पति का 20 साल पहले निधन हो चुका था। उनकी दो बेटियां शशि और रचना हैं। शशि की शादी 18 साल पहले सिरसौद निवासी संतोष से हुई थी। संतोष घर जमाई बनकर परिवार संभालता था। बेटी रचना ने बताया कि मां की मानसिक स्थिति दो साल से ठीक नहीं थी। कुछ दिन पहले उन्होंने कहा था कि अब ठीक हूं, वैष्णो देवी जाना है और फिर गंगाजी स्नान करना है। यही उनकी अंतिम इच्छा थी। इसके लिए 24 अप्रैल को अर्टिगा किराए पर लेकर परिवार निकला था। रचना को भी साथ चलने को कहा, लेकिन गर्मी और बच्चों की वजह से वह नहीं गई। लौटकर गंगा स्नान का कार्यक्रम था, पर उससे पहले ही काल ने सब छीन लिया।
कार चालक के परिवार पर भी टूटा पहाड़
कार चला रहे विनोद मेहरा नागदा गांव के रहने वाले थे। वह किराए पर गाड़ी चलाकर परिवार पालते थे। दो बच्चों के पिता विनोद ने करीब 20 हजार रुपये में यात्रा तय की थी। हादसे में उनकी भी मौत हो गई। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। ढाई महीने पहले ही उसके भाई विमल का निधन हुआ था।
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अचानक बना प्लान और चली गई मां
चैनपुरा में हादसे की खबर मिलते ही मातम पसर गया। पड़ोसी जुबराज आदिवासी ने बताया कि उनकी मां छोटीबाई कुछ दिन पहले ही श्योपुर आई थीं। अचानक यात्रा का प्लान बना और संतोष के कहने पर वह भी साथ चली गईं। किसी ने सोचा नहीं था कि यह सफर आखिरी होगा।
पुलिस ने सभी मृतकों का डीएनए टेस्ट कराया है। रिपोर्ट आने के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। फिलहाल परिवार ने कार्टन में आई अस्थियों का ही विधि-विधान से अंतिम संस्कार कर दिया है।
विधायक ने उठाए सवाल
इधर अंतिम संस्कार में पहुंचे कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने प्रशासन और पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ही अर्थी पर पांच चिताएं जलाना बेहद दुखद और व्यवस्था की नाकामी है। विधायक ने बताया कि उन्होंने सरपंच-सचिव को लकड़ी की व्यवस्था के लिए फोन किया था, लेकिन कोई इंतजाम नहीं हुआ। श्मशान घाट न होने के कारण निजी खेत में संस्कार करना पड़ा। उन्होंने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।

अलवर में कार हादसे में मृत लोग।

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