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प्रतिमा पर रार: एमपी के इस पूर्व मंत्री की प्रतिमा लगाने पर भड़का विवाद, 100 मीटर का दायरा सील; जानें वजह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीधी
Published by: सीधी ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jun 2026 06:01 PM IST
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सार
सीधी में पूर्व शिक्षामंत्री एवं सात बार विधायक रहे इन्द्रजीत पटेल की बिना अनुमति स्थापित प्रतिमा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिमा स्थल के आसपास 100 मीटर क्षेत्र को प्रतिबंधित घोषित कर दिया है।
सीधी में भारी पुलिस बल तैनात
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
सीधी में पूर्व शिक्षामंत्री और सात बार विधायक रहे इन्द्रजीत पटेल की प्रतिमा स्थापना को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। बिना अनुमति प्रतिमा स्थापित किए जाने के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए प्रतिमा स्थल के आसपास 100 मीटर क्षेत्र को प्रतिबंधित घोषित कर दिया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है।
सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका
पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के सामने स्थापित की गई प्रतिमा को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह अलर्ट मोड में है। जिला कलेक्टर विकास मिश्रा ने जारी आदेश में कहा है कि बिना अनुमति और पूर्व सूचना के प्रतिमा स्थापित किए जाने से कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न हो गई है।
100 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित
इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने प्रतिमा स्थल के चारों ओर 100 मीटर के दायरे को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया है। आदेश के अनुसार इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की गतिविधि पर प्रशासन की कड़ी निगरानी रहेगी, ताकि किसी भी संभावित विवाद या अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।
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प्रशासन ने लगाई धारा 163
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत एकपक्षीय रूप से लागू किया गया है। प्रशासन का कहना है कि परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से नोटिस देना और सुनवाई करना संभव नहीं था, इसलिए तत्काल प्रभाव से यह निर्णय लिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं पूरे क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
ये भी पढ़ें- MP Rajya Sabha Election: नटराजन के सामने केवट, खरीद-फरोख्त की आशंका के बीच क्या बोले कांग्रेस के दिग्गज?
गौरतलब है कि रविवार देर रात इन्द्रजीत पटेल की प्रतिमा समर्थकों द्वारा प्रस्तावित स्थल पर स्थापित की गई थी। इसके बाद से जहां समर्थक इसे जनभावनाओं का सम्मान बता रहे हैं, वहीं विरोधी पक्ष प्रतिमा स्थापना की वैधानिक प्रक्रिया और अनुमति को लेकर सवाल उठा रहा है।
फिलहाल प्रशासन का फोकस कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर है। लेकिन प्रतिमा स्थापना से शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर चर्चा का विषय बन चुका है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है और इस पूरे मामले का राजनीतिक असर किस दिशा में जाता है।
सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका
पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के सामने स्थापित की गई प्रतिमा को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह अलर्ट मोड में है। जिला कलेक्टर विकास मिश्रा ने जारी आदेश में कहा है कि बिना अनुमति और पूर्व सूचना के प्रतिमा स्थापित किए जाने से कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न हो गई है।
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100 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित
इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने प्रतिमा स्थल के चारों ओर 100 मीटर के दायरे को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया है। आदेश के अनुसार इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की गतिविधि पर प्रशासन की कड़ी निगरानी रहेगी, ताकि किसी भी संभावित विवाद या अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।
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कलेक्टर द्वारा जारी आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत एकपक्षीय रूप से लागू किया गया है। प्रशासन का कहना है कि परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से नोटिस देना और सुनवाई करना संभव नहीं था, इसलिए तत्काल प्रभाव से यह निर्णय लिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं पूरे क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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गौरतलब है कि रविवार देर रात इन्द्रजीत पटेल की प्रतिमा समर्थकों द्वारा प्रस्तावित स्थल पर स्थापित की गई थी। इसके बाद से जहां समर्थक इसे जनभावनाओं का सम्मान बता रहे हैं, वहीं विरोधी पक्ष प्रतिमा स्थापना की वैधानिक प्रक्रिया और अनुमति को लेकर सवाल उठा रहा है।
फिलहाल प्रशासन का फोकस कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर है। लेकिन प्रतिमा स्थापना से शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर चर्चा का विषय बन चुका है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है और इस पूरे मामले का राजनीतिक असर किस दिशा में जाता है।

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