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Omkareshwar News: सिंहस्थ से पहले रेल कनेक्टिविटी बनेगी या नहीं? 20 मिनट के निरीक्षण पर स्थानीयों ने उठाए सवाल
Thu, 02 Jul 2026 12:53 PM IST
खंडवा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
Published by: खंडवा ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2026 12:53 PM IST
सार
सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन, इंदौर और ओंकारेश्वर के बीच रेल संपर्क को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन परियोजना की धीमी रफ्तार और निर्माण कार्यों के कारण चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं। वहीं, महज 20 मिनट के निरीक्षण को लेकर भी स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं।
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सिंहस्थ-2028 की उल्टी गिनती शुरू, रेल परियोजना की रफ्तार बनी चिंता का विषय।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक रामाश्रय पांडे और रतलाम रेल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) अश्विन कुमार ने बुधवार को नवनिर्मित ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया। दोनों अधिकारियों ने इंदौर–खंडवा ब्रॉडगेज परियोजना की प्रगति का जायजा लिया तथा रेलवे अधिकारियों और इंजीनियरों से निर्माण कार्य की जानकारी प्राप्त की।
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निरीक्षण के दौरान पत्रकारों से चर्चा में महाप्रबंधक रामाश्रय पांडे ने कहा कि रेलवे का प्रयास रहेगा कि सिंहस्थ-2028 से पहले ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन तक रेल सेवा शुरू कर दी जाए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी परियोजना का निरीक्षण जारी है, इसलिए संपूर्ण कार्य कब तक पूरा होगा, इस बारे में अभी कोई निश्चित समय-सीमा बताना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि खंडवा से ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन तक ब्रॉडगेज का कार्य पूरा हो चुका है, इसलिए इस खंड पर तकनीकी रूप से ट्रेन संचालन संभव है।
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निरीक्षण से पहले दोनों वरिष्ठ अधिकारी रेलवे विभाग के अधिकारियों और इंजीनियरों के साथ ओंकारेश्वर पहुंचे। उन्होंने नर्मदा तट स्थित रेलवे विश्रामगृह में रात्रि विश्राम किया तथा प्रातः भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन-पूजन के बाद रेलवे स्टेशन पहुंचकर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने उनका स्वागत भी किया।
दो दशक से चल रही है ब्रॉडगेज परियोजना
हैदराबाद से जयपुर तक फैली ऐतिहासिक मीटरगेज लाइन को ब्रॉडगेज में बदलने का कार्य लगभग दो दशकों से चरणबद्ध तरीके से चल रहा है। वर्ष 2016 में ओंकारेश्वर रोड से इंदौर के बीच मीटरगेज रेल सेवा बंद कर दी गई थी, जिसके बाद ब्रॉडगेज निर्माण कार्य शुरू हुआ। हालांकि परियोजना की प्रगति अपेक्षित गति से नहीं हो सकी।
विशेषज्ञों के अनुसार इंदौर और चोरल के बीच दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र, सुरंगों और बड़े पुलों का निर्माण इस परियोजना की सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती है। यही कारण है कि निर्माण कार्य में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।
सिंहस्थ-2028 को लेकर बढ़ी उम्मीदें, चुनौतियां अब भी बरकरार
सिंहस्थ-2028 में अब लगभग 22 महीने का समय शेष है। ऐसे में श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि कम से कम ओंकारेश्वर तक रेल संपर्क समय पर उपलब्ध हो जाएगा। हालांकि वर्तमान स्थिति में यह स्पष्ट नहीं है कि उज्जैन, इंदौर और ओंकारेश्वर के बीच पूर्ण रेल संपर्क सिंहस्थ से पहले स्थापित हो पाएगा या नहीं।
20 मिनट के निरीक्षण पर उठे सवाल
महाप्रबंधक और डीआरएम का निरीक्षण कार्यक्रम अपेक्षाकृत संक्षिप्त रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि हजारों करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में कई स्थानों पर सड़कें, पुल और पुलियाएं अभी भी निर्माणाधीन हैं, जिससे आवागमन प्रभावित हो रहा है और कई जगह निर्माण कार्य की गति धीमी दिखाई देती है। इसी कारण क्षेत्र में यह चर्चा भी रही कि इतने बड़े और जटिल प्रोजेक्ट का महज कुछ मिनटों का निरीक्षण जमीनी चुनौतियों का कितना व्यापक आकलन कर पाया होगा। क्षेत्र के नागरिकों का मानना है कि परियोजना की नियमित और विस्तृत निगरानी, निर्माण कार्य में तेजी तथा समयबद्ध क्रियान्वयन से ही ओंकारेश्वर सहित पूरे निमाड़ क्षेत्र को लंबे समय से प्रतीक्षित रेल सुविधा का लाभ मिल सकेगा।
