Lokayukta Action: सिंगरौली में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते अधिकारी गिरफ्तार
सिंगरौली के बैढ़न आदिवासी विकास विभाग में लोकायुक्त ने वर्ग-2 अधिकारी मुन्नालाल वर्मा को इंक्रीमेंट और वेतन वृद्धि के काम के एवज में 5 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। मामले में संजय पांडेय पर भी आरोप लगे हैं, जिनकी भूमिका की जांच जारी है।
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सिंगरौली जिले के बैढ़न स्थित आदिवासी विकास विभाग कार्यालय में गुरुवार को लोकायुक्त ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वर्ग-2 अधिकारी मुन्नालाल वर्मा को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। लोकायुक्त टीम ने उन्हें 5 हजार रुपये लेते हुए पकड़ा। मामला देवसर परियोजना में पदस्थ कर्मचारी के इंक्रीमेंट और वेतन वृद्धि से जुड़े काम के एवज में रिश्वत मांगने से जुड़ा बताया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता श्रवण तिवारी, जो देवसर परियोजना में पदस्थ हैं, को अपने इंक्रीमेंट और वेतन वृद्धि संबंधी विभागीय प्रक्रिया पूरी करानी थी। आरोप है कि इस कार्य को आगे बढ़ाने के नाम पर उनसे 7 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई थी। बताया जा रहा है कि पैसे मांगे जाने से परेशान होकर श्रवण तिवारी ने 25 मई को लोकायुक्त कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले का प्रारंभिक सत्यापन किया। आरोपों की पुष्टि होने पर ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई गई।
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इसके बाद 29 मई को दोपहर करीब 2 बजे लोकायुक्त टीम ने बैढ़न स्थित आदिवासी विकास विभाग कार्यालय में दबिश दी। कार्रवाई के दौरान कथित रिश्वत का लेन-देन होते ही टीम ने मुन्नालाल वर्मा को 5 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद विभागीय कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। टीम ने मौके पर दस्तावेजों की जांच, साक्ष्य संकलन और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। घटना की जानकारी फैलते ही प्रशासनिक और विभागीय हलकों में चर्चा तेज हो गई।
इस मामले में संजय पांडेय का नाम भी सामने आया है। शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से उन पर भी पैसे मांगने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि कार्रवाई के समय उनके भोपाल में होने की जानकारी सामने आई, जिसके चलते उन्हें मौके पर नहीं पकड़ा जा सका। फिलहाल जांच एजेंसी उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है।
यह मामला सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। इंक्रीमेंट और वेतन वृद्धि जैसे कार्य विभागीय नियमों के तहत होने चाहिए। ऐसे में यदि इनके बदले रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह गंभीर मामला माना जाएगा। फिलहाल लोकायुक्त ने प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। जांच में आगे और क्या तथ्य सामने आते हैं तथा अन्य आरोपितों की भूमिका क्या निकलकर आती है, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।
