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MP News: ऊर्जाधानी में विकास के दावों की खुली पोल, न सड़क-न शव वाहन, कचरा गाड़ी में अंतिम सफर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिंगरौली
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Tue, 18 Nov 2025 11:14 AM IST
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सार
प्रदेश की ऊर्जाधानी सिंगरौली सरकार के खजाने में दूसरा सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला जिला है लेकिन आज भी यहां शवों को ले जाने के लिए शव वाहन तक उपलब्ध नहीं हैं।
कचरा गाड़ी में शव ढोने की मजबूरी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रदेश सरकार को सबसे अधिक राजस्व देने वाले सिंगरौली जिले में विकास के दावों की पोल खोलने वाली दो मार्मिक तस्वीरें सामने आई हैं। सरकार के खजाने में इंदौर के बाद दूसरा सबसे अधिक राजस्व देने वाला यह जिला आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। हालात ऐसे हैं कि यहां न बीमारों को समय पर इलाज मिल पा रहा है और न मृतकों को सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार के लिए शव वाहन।
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सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और ग्रामीण परिवारों को उठानी पड़ रही है। जिले के सरई थाना क्षेत्र के इटावा गांव में एक हत्या के मामले में पोस्टमार्टम कराने के लिए शव वाहन उपलब्ध नहीं था, जिसके बाद नगर परिषद सरई ने कचरा ढोने वाली ट्रॉली गाड़ी शव ले जाने के लिए भेज दी। वह गाड़ी, जो रोज कचरा उठाने में उपयोग होती है, उसमें मृतक पप्पू साकेत का शव रखकर परिजन मोर्चरी तक ले गए और पोस्टमार्टम के बाद उसी वाहन से शव को घर भी लाए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिससे प्रशासन की जमकर किरकिरी हुई।
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नगर परिषद सरई के सीएमओ सुरेंद्र का कहना है कि परिषद के पास शव वाहन उपलब्ध नहीं है, इसलिए ऐसी स्थिति में जुगाड़ से काम चलाना पड़ता है।
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इसी जिले की दूसरी तस्वीर देवसर ब्लॉक के चुरवाही गांव की है, जहां सड़क न होने के कारण 80 वर्षीय बीमार बुजुर्ग महिला को परिजनों को खाट पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा। परिजनों के अनुसार एंबुलेंस करीब दो घंटे बाद पहुंची और घर तक कोई रास्ता न होने से उन्हें करीब एक किलोमीटर तक महिला को खाट पर उठाकर ले जाना पड़ा। यहां घर से मुख्य सड़क तक सिर्फ एक संकरी पगडंडी है, जिस पर वाहन नहीं पहुंच सकता।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या क्षेत्र में आम है और कई गांव आज भी सड़क व स्वास्थ्य सेवाओं से दूर हैं। विधायक राजेंद्र मेश्राम का कहना है कि पहले यह क्षेत्र नर्क कहलाता था और अब विकास के कारण स्वर्ग हो गया है, वहीं प्रशासन का दावा है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत जिन गांवों की आबादी 250 से अधिक है, वहां सड़क निर्माण का काम स्वीकृत किया जा रहा है।
विधायक और अधिकारियों के इन दावों के बीच सिंगरौली की ये दोनों तस्वीरें दिखाती हैं कि वास्तविक स्थिति अभी भी बेहद दयनीय है और विकास का मॉडल सिर्फ कागजों पर ही नजर आता है।

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