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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Singrauli News ›   Singrauli News: The head constable's heart melted after hearing the child's innocent complaint.

MP News: फोन पर बच्चे ने की ऐसी शिकायत, पिघल गया प्रधान आरक्षक का दिल, कुरकुरे लेकर पहुंचे घर, देखें वीडियो

Thu, 02 Oct 2025 01:46 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिंगरौली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिंगरौली Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Thu, 02 Oct 2025 01:46 PM IST
सार

शिकायत के बाद पुलिस टीम तुरंत लोकेशन ट्रेस कर घर पहुंची। वहां स्थिति जानकर प्रधान आरक्षक उमेश विश्वकर्मा बच्चे के लिए कुरकुरे का पैकेट लेकर आए और माता-पिता को समझाया कि बच्चों की छोटी इच्छाओं को प्यार से संभालना चाहिए।

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Singrauli News: The head constable's heart melted after hearing the child's innocent complaint.
बच्चे से मिलने पहुंचे प्रधान आरक्षक उमेश विश्वकर्मा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दस साल के एक बच्चे ने इमरजेंसी नंबर पर कॉल लगाकर जो कुछ भी कहा, उसे सुनकर पुलिस अधिकारी सोंच में पड़ गए। बच्चे ने कहा, आप आ जाइये, रस्सी से बांधकर मम्मी और बहन ने मुझे मारा है। यह सुनकर अधिकारी सकते में आ गए और फौरन फोन की लोकेशन ट्रेस करते हुए बच्चे के घर पहुंच गए। बाद में पता चला कि बच्चा अपने मां से कुरकुरे खरीदने के लिए 20 रुपये पैसे लेने के लिए जिद कर रहा था, जिससे उसकी मां और बहन से बच्चे डांट दिया, जिससे बच्चा रूठ कर पुलिस को कॉल लगा दिया।

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दरअसल यह मामला मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के खुटार चौकी क्षेत्र के चितरवईर कला गांव के राधेश्याम के 10 साल मासूम बच्चे दीपक ने इमरजेंसी नंबर 112 में कॉल किया। वजह सुनकर गाड़ी में मौजूद पुलिसकर्मी भी हैरान हो गए। बच्चें ने कहा- मां और बहन मिलकर मुझे मारती हैं। आरक्षक ने जब वजह पूछी तो बच्चे ने कहा, मैंने मम्मी से 20 रुपये मांगे थे, कुरकुरे खरीदने के लिए… लेकिन उन्होंने पैसे देने के बजाय मुझे पीट दिया।
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बच्चे की मासूमियत सुनकर प्रधान आरक्षक उमेश विश्वकर्मा मुस्कुराए भी और चिंतित भी हुए। उन्होंने तुरंत लोकेशन ट्रेस की और टीम के साथ बच्चे के घर पहुंचे। सबको आश्चर्य तब हुआ जब प्रधान आरक्षक बच्चे के लिए कुरकुरे का पैकेट लेकर पहुंचे। उन्होंने बच्चे को कुरकुरे दिए और माता-पिता को प्यार से समझाया कि बच्चों की छोटी-छोटी इच्छाएँ भी उनके लिए बड़ी होती हैं। गुस्से के बजाय उन्हें समझाना ही बेहतर है।

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