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MP: पंचायत सचिव पर करोड़ों के घोटाले का आरोप, ढाई साल बाद भी जांच अधूरी; निलंबन के बाद बहाली पर उठे सवाल
Wed, 01 Jul 2026 04:34 PM IST
टीकमगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टीकमगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टीकमगढ़
Published by: टीकमगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2026 04:34 PM IST
सार
टीकमगढ़ की ग्राम पंचायत बरेठी में करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय अनियमितता मामले में जांच में हो रही देरी पर सवाल उठ रहे हैं। सरपंच ने पूर्व पंचायत सचिव पर विकास कार्यों के नाम पर करीब 10 करोड़ रुपये के कथित गबन का आरोप लगाते हुए जांच प्रभावित किए जाने की भी शिकायत की है।
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कार्यालय जिला कलेक्टर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
टीकमगढ़ की ग्राम पंचायत बरेठी में पदस्थ रहे पंचायत सचिव बृजेंद्र खरे पर करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों का मामला एक बार फिर चर्चा में है। आरोप है कि पंचायत सचिव द्वारा विभिन्न निर्माण कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये की राशि का आहरण किया गया, लेकिन कई कार्य आज तक धरातल पर दिखाई नहीं देते। सबसे बड़ी बात यह है कि शिकायतों के बावजूद ढाई वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जिला पंचायत स्तर पर जांच पूरी नहीं हो सकी है।
ग्राम पंचायत बरेठी के सरपंच सुनील सौर ने आरोप लगाया है कि पंचायत सचिव बृजेंद्र खरे ने करीब 10 करोड़ रुपये की राशि विभिन्न विकास कार्यों के नाम पर निकाली, लेकिन मौके पर अधिकांश कार्य नहीं कराए गए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में टीकमगढ़ कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से शिकायत की गई थी, जिसके बाद जांच समिति गठित की गई, लेकिन आज तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई।
सरपंच के अनुसार, 26 फरवरी 2026 को चार सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया था और उसे 15 दिवस के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, कई माह बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तक नहीं पहुंची है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला पंचायत में पदस्थ मुख्य स्टेनो वीरेंद्र कुमार खरे द्वारा रिश्तेदारी और जातीय संबंधों के आधार पर कार्रवाई प्रभावित की जा रही है।
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शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत में तालाब निर्माण, स्टॉप डैम, स्टेप डैम और एप्रोच रोड जैसे कार्यों के लिए लाखों रुपये की राशि स्वीकृत की गई। इनमें तालाब निर्माण पर 14.75 लाख रुपये, स्टेप डैम पर लगभग 14.59 लाख रुपये, स्टॉप डैम पर 14.69 लाख रुपये, एप्रोच रोड निर्माण पर 13.57 लाख रुपये सहित कई अन्य कार्य शामिल हैं। आरोप है कि इन कार्यों का मौके पर कोई अस्तित्व नहीं है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2017 से 2020 के बीच कपिलधारा कूप योजना के तहत 11.15 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाली गई, लेकिन एक भी कुएं का निर्माण नहीं हुआ। आंगनबाड़ी भवन निर्माण में भी 12 लाख रुपये के फर्जी बिल लगाकर राशि आहरित करने का आरोप लगाया गया है।
ये भी पढ़ें- Bus Accident: हंस ट्रैवल्स की बसों का हादसों से पुराना नाता, फायर सेफ्टी में फेल, छेड़छाड़ में पकड़ाए ड्राइवर
सचिव को बहाल किया गया
सरपंच का कहना है कि टीकमगढ़ लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं केंद्रीय मंत्री द्वारा भी मामले की जांच के निर्देश दिए गए थे, लेकिन लगभग तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नवीन धुर्वे ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक निलंबित रहने के कारण संबंधित सचिव को बहाल किया गया है, लेकिन उन्हें वित्तीय अधिकार नहीं दिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को जांच रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर, पंचायत सचिव बृजेंद्र खरे ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि जिन कार्यों को लेकर लगातार शिकायतें की जा रही हैं, वे सभी कार्य पूर्ण हो चुके हैं और पूर्व में हुई जांचों में भी कार्य संतोषजनक पाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें झूठी शिकायतों के माध्यम से परेशान किया जा रहा है।
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ग्राम पंचायत बरेठी के सरपंच सुनील सौर ने आरोप लगाया है कि पंचायत सचिव बृजेंद्र खरे ने करीब 10 करोड़ रुपये की राशि विभिन्न विकास कार्यों के नाम पर निकाली, लेकिन मौके पर अधिकांश कार्य नहीं कराए गए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में टीकमगढ़ कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से शिकायत की गई थी, जिसके बाद जांच समिति गठित की गई, लेकिन आज तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई।
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सरपंच के अनुसार, 26 फरवरी 2026 को चार सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया था और उसे 15 दिवस के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, कई माह बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तक नहीं पहुंची है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला पंचायत में पदस्थ मुख्य स्टेनो वीरेंद्र कुमार खरे द्वारा रिश्तेदारी और जातीय संबंधों के आधार पर कार्रवाई प्रभावित की जा रही है।
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शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत में तालाब निर्माण, स्टॉप डैम, स्टेप डैम और एप्रोच रोड जैसे कार्यों के लिए लाखों रुपये की राशि स्वीकृत की गई। इनमें तालाब निर्माण पर 14.75 लाख रुपये, स्टेप डैम पर लगभग 14.59 लाख रुपये, स्टॉप डैम पर 14.69 लाख रुपये, एप्रोच रोड निर्माण पर 13.57 लाख रुपये सहित कई अन्य कार्य शामिल हैं। आरोप है कि इन कार्यों का मौके पर कोई अस्तित्व नहीं है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2017 से 2020 के बीच कपिलधारा कूप योजना के तहत 11.15 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाली गई, लेकिन एक भी कुएं का निर्माण नहीं हुआ। आंगनबाड़ी भवन निर्माण में भी 12 लाख रुपये के फर्जी बिल लगाकर राशि आहरित करने का आरोप लगाया गया है।
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सचिव को बहाल किया गया
सरपंच का कहना है कि टीकमगढ़ लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं केंद्रीय मंत्री द्वारा भी मामले की जांच के निर्देश दिए गए थे, लेकिन लगभग तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नवीन धुर्वे ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक निलंबित रहने के कारण संबंधित सचिव को बहाल किया गया है, लेकिन उन्हें वित्तीय अधिकार नहीं दिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को जांच रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर, पंचायत सचिव बृजेंद्र खरे ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि जिन कार्यों को लेकर लगातार शिकायतें की जा रही हैं, वे सभी कार्य पूर्ण हो चुके हैं और पूर्व में हुई जांचों में भी कार्य संतोषजनक पाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें झूठी शिकायतों के माध्यम से परेशान किया जा रहा है।
