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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Twisha Sharma Case: Former Judge Giribala Singh Seeks Protection in Jail Court Grants Request

त्विषा शर्मा केस: पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने जेल में मांगी सुरक्षा, अदालत ने स्वीकार की मांग; बताया था खतरा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Sabahat Husain Updated Tue, 02 Jun 2026 09:13 PM IST
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सार

त्विषा शर्मा दहेज मृत्यु मामले में न्यायिक हिरासत में भेजी गईं पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने भोपाल केंद्रीय जेल में सुरक्षा की मांग की। उन्होंने मीडिया ट्रायल और बेटे समर्थ सिंह के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। अदालत ने सुरक्षित स्थान देने की मांग स्वीकार कर ली।

Twisha Sharma Case: Former Judge Giribala Singh Seeks Protection in Jail Court Grants Request
गिरिबाला सिंह, त्विषा की सास - फोटो : IANS
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विस्तार

त्विषा शर्मा दहेज मृत्यु मामले की आरोपी और पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह ने मंगलवार को भोपाल केंद्रीय जेल में सुरक्षित स्थान की मांग की। उन्होंने आशंका जताई कि जेल में ऐसे कई कैदी बंद हैं जिन्हें उनके न्यायाधीश रहते हुए सुनाए गए फैसलों में सजा हुई थी, इसलिए उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है। मामले की सुनवाई कर रही अदालत ने उनकी इस मांग को स्वीकार कर लिया। यह जानकारी एक वकील ने दी।

सीबीआई रिमांड समाप्त होने के बाद भोपाल की अदालत ने त्विषा शर्मा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। दोनों पर दहेज प्रताड़ना का आरोप है। गिरिबाला सिंह वर्तमान में भोपाल केंद्रीय जेल में बंद हैं। गौरतलब है कि मॉडल त्विषा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में फांसी के फंदे पर लटकी हुई मिली थीं।

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बेटे समर्थ सिंह के साथ दुर्व्यवहार
पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह ने अदालत में कहा कि त्विषा शर्मा परिवार की ओर से पैरवी कर रहे एक वकील ने उनके बेटे समर्थ सिंह के साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामले की शुरुआत से ही उन्हें और उनके बेटे को मीडिया ट्रायल का सामना करना पड़ रहा है। एक समय भोपाल की जिला एवं सत्र न्यायाधीश रह चुकीं गिरिबाला सिंह ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शोभना भलावे से अपनी बात रखने की अनुमति मांगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जबलपुर जिला अदालत में एक वकील (अनुराग श्रीवास्तव) ने उनके बेटे पर हमला किया था।

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उन्होंने अदालत को बताया कि अपने न्यायिक कार्यकाल के दौरान वह कई वर्षों तक भोपाल में पदस्थ रहीं और ऐसे मामलों की सुनवाई की जिनमें दोषियों को सजा हुई। उन्हीं में से कई कैदी वर्तमान में केंद्रीय जेल में बंद हैं। इसलिए उन्होंने जेल में पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की। त्विषा शर्मा परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकील अनुराग श्रीवास्तव ने पत्रकारों से कहा कि पूर्व न्यायाधीश ने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें और समर्थ सिंह को जेल में सुरक्षित स्थान पर रखा जाए। अदालत ने यह मांग स्वीकार कर ली है और हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है।

गिरिबाला आगे क्या बोलीं?
गिरिबाला सिंह ने यह भी मांग की कि सीबीआई की जांच से जुड़ी जानकारी मीडिया में प्रसारित न की जाए। श्रीवास्तव ने बताया कि अदालत ने इस संबंध में सीबीआई को कुछ निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जब मां-बेटे को जेल ले जाया जाए तो उन्हें मीडिया से सुरक्षा प्रदान की जाए। गिरिबाला सिंह ने कहा कि जब समर्थ सिंह मामले में आत्मसमर्पण करने जबलपुर अदालत पहुंचे थे, तब मीडिया लगातार उनका पीछा कर रहा था। अनुराग श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि जबलपुर में कुछ वकीलों ने उनके साथ और मीडिया कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया।

उन्होंने कहा कि मुझे और मीडिया को धमकाया गया, गालियां दी गईं और बाहर निकाल दिया गया। अदालत कक्ष का दरवाजा बंद कर दिया गया, जबकि घटना का सीधा प्रसारण मीडिया में दिखाया गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह पूरी बात मंगलवार को अदालत को दोबारा बताई और मांग की कि जबलपुर जिला एवं सत्र न्यायालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जाए, ताकि वास्तविक घटनाक्रम सामने आ सके। श्रीवास्तव ने दावा किया कि पहले दिन से ही यह प्रयास किया जा रहा है कि त्विषा शर्मा के परिवार को कानूनी सहायता न मिल सके। उन्होंने कहा कि मैं मीडिया के माध्यम से पूरे देश को स्पष्ट करना चाहता हूं कि न मैं और न ही अंकुर पांडे इस मामले से हटने वाले हैं। हम अपनी सुरक्षा करने में सक्षम हैं। इस मामले में गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के वकील से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका।

14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने के बाद गिरिबाला सिंह जेल में दाखिल हो गई हैं। गिरिबाला सिंह को सीबीआई के अधिकारी लेकर जेल पहुंचे थे। साथ में सुरक्षा के लिए भोपाल पुलिस की टीम थी थी। गिरिबाला सिंह ने केंद्रीय जेल परिसर में कार सहित प्रवेश करना चाहती थीं, उन्होंने सीबीआई के एक अधिकारी से भी कहा, लेकिन जेल के अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए पैदल ही चलने को कहा। इसके बाद गिरिबाला और समर्थ पैदल ही जेल परिसर में पहुंचे। गिरिबाला सिंह को महिला बैरक में विशेष निगानी में रखा गया है। उन्हें केदी नंबर 71 अलाॅट हुआ है, जबकि समर्थ सिंह बी-खंड बैरक अस्पताल में निगरानी में रहेंगे। वह कैदी नंबर  1782 कहलाएंगे।

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