Ujjain News: एफआईआर के बाद भी खुलेआम घूम रहे आरोपी! दिव्यांग दंपती पहुंचे कलेक्टर के पास; जान को बताया खतरा
उज्जैन के खाचरौद तहसील स्थित बेहलोला गांव में एक दिव्यांग दंपती के साथ मारपीट के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने का आरोप है। पीड़ित दंपती ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई है।
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विस्तार
उज्जैन जिले की खाचरौद तहसील के बेहलोला गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 18 जुलाई को एक दिव्यांग दंपती के साथ मारपीट हुई। मामले में एफआईआर भी दर्ज हुई, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई। पीड़ित दंपती अब न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
जमीन विवाद में दिव्यांग दंपति की पिटाई
क्या है पूरा मामला?
पीड़िता अंतरबाई और उनके पति जगदीश का आरोप है कि गांव के कुछ लोगों और रिश्तेदारों द्वारा उन्हें लंबे समय से प्रताड़ित किया जा रहा है। उनका कहना है कि 18 जुलाई को आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की। घटना की शिकायत खाचरौद थाने में की गई, जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली।
हालांकि, पीड़ितों का आरोप है कि कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। इसके उलट आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और उन पर राजीनामा करने का दबाव बना रहे हैं।
घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ लोग दंपती के साथ मारपीट और विवाद करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद भी पुलिस की सुस्ती लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद
पीड़ित दंपती का आरोप है कि पांच बीघा पैतृक जमीन के बंटवारे में मिले उनके हिस्से पर खेती करने से उनके देवर और अन्य रिश्तेदार रोक रहे हैं। इसी विवाद और रंजिश के चलते उनके साथ मारपीट की गई।
कलेक्टर कार्यालय पहुंचे पीड़ित
न्याय नहीं मिलने से परेशान पति-पत्नी मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान उज्जैन कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की। पीड़ितों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो कोई बड़ी घटना हो सकती है। उन्होंने अपनी जान को खतरा भी बताया है।
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पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
एफआईआर दर्ज होने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना और पीड़ितों को लगातार धमकियां मिलने के आरोपों ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद पीड़ित दंपति को न्याय मिल पाता है या नहीं।
