MP News: राजौरी से कारगिल तक उज्जैन की बहनों का जज्बा, महाकाल का लड्डू खिलाकर हजारों सैनिकों को बांधेंगी राखी
उज्जैन के संगिनी ग्रुप की महिलाएं पिछले 20 वर्षों से रक्षाबंधन पर सीमा पर तैनात सैनिकों को राखी बांधने की परंपरा निभा रही हैं। इस वर्ष 18 सदस्यीय दल राजौरी और कारगिल जाएगा। 9,000 राखियां स्पीड पोस्ट से भेजी जाएंगी। साथ ही तिरंगे, महाकाल का प्रसाद और उपहार भी जवानों को भेंट किए जाएंगे।
उज्जैन के संगिनी ग्रुप की महिलाएं पिछले 20 वर्षों से रक्षाबंधन पर सीमा पर तैनात सैनिकों को राखी बांधने की परंपरा निभा रही हैं। इस वर्ष 18 सदस्यीय दल राजौरी और कारगिल जाएगा। 9,000 राखियां स्पीड पोस्ट से भेजी जाएंगी। साथ ही तिरंगे, महाकाल का प्रसाद और उपहार भी जवानों को भेंट किए जाएंगे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रक्षाबंधन का त्योहार आते ही उज्जैन की बहनों के लिए सरहद के जवान ही सबसे पहले भाई बन जाते हैं। पिछले 20 वर्षों से लगातार उज्जैन की संगिनी ग्रुप की महिलाएं देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों की कलाई पर राखी बांधने जा रही हैं।
इस बार भी जज्बा वही है। अध्यक्ष ममता सांगते ने बताया कि यह 21वां वर्ष है। जब हमारा दल जम्मू-कश्मीर के राजौरी बॉर्डर और कारगिल तक जाएगा। वहां भारत की विभिन्न सीमाओं पर तैनात सैनिक भाइयों को हम रक्षा सूत्र बांधेंगे। ग्रुप की संरक्षक वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सतिंदर कौर सलूजा ने बताया कि इस वर्ष देश की सरहद पर स्पीड पोस्ट के माध्यम से लगभग 9000 राखियां भेजी जाएंगी। इसके साथ ही लगभग 1000 सैनिक भाइयों को राखी बांधने के लिए 18 लोगों का समूह राजौरी और कारगिल बॉर्डर तक जाएगा। इस वर्ष बहनें अपने साथ सिर्फ राखी ही नहीं ले जा रही हैं। उनके बैग में 1000 तिरंगे, रुमाल, मोतियों की माला भी होगी। वहीं इसके साथ ही सबसे खास- बाबा महाकाल के 30 किलो लड्डू प्रसाद और 30 किलो नमकीन भी जवानों के लिए ले जाया जाएगा, ताकि सरहद पर भी घर जैसी मिठास पहुंचे। ममता सांगते ने बताया कि हर साल शहर के कई संगठन और समाजसेवी भी सैनिक भाइयों के लिए रक्षा सूत्र भेंट करते हैं। हमारा मकसद एक ही है जो जवान हमारी रक्षा कर रहे हैं, उनकी कलाई त्योहार पर सूनी न रहे। 20 साल से चली आ रही यह परंपरा उज्जैन की बहनों के देशप्रेम और समर्पण की मिसाल बन गई है।
ये भी पढ़ें- दादा का कर्ज पोता वसूलेगा: प्रथम विश्वयुद्ध के समय ब्रिटिश सरकार को दिया था लोन, ब्रिटेन ने दिया नोटिस का जवाब
बता दें कि ग्रुप ने लगभग 20 वर्षों पूर्व इस अभियान की शुरुआत की थी। अध्यक्ष ने बताया कि 20 वर्षों पूर्व जब वे वाघा बॉर्डर पर रक्षाबंधन के दौरान पहुंची थीं तो यहां उन्होंने सैनिक भाइयों की कलाई सूनी देखी थी। मेरा मकसद था कि जो जवान हमारी रक्षा कर रहे हैं, उनकी कलाई त्योहार पर सूनी न रहे। इसके बाद से ही संगिनी ग्रुप ने देश की सरहद पर तैनात सैनिक भाइयों को रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए मिलने वाली परमिशन लेने का प्रयास किया और अब हम लगभग 20 वर्षों से देश की सरहदों पर पहुंचकर सैनिक भाइयों को राखी बांध रही हैं। ममता सांगते मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट हैं, उन्होंने अब तक 1500 महिलाओं और युवतियों को मार्शल आर्ट सिखाया और इसके साथ ही 300 महिलाओं को आत्मनिर्भर भी बनाया है।

ऐसे निभाई जाती है रस्म
