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मध्य प्रदेश: सौरभ शर्मा को हाईकोर्ट से राहत, 18 माह बाद मिली जमानत; हर सुनवाई में रहना होगा मौजूद
Fri, 07 Aug 2026 08:22 AM IST
भोपाल ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: भोपाल ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2026 08:22 AM IST
सार
मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक और चर्चित कारोबारी सौरभ शर्मा को करीब 18 माह बाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। जबलपुर हाईकोर्ट ने 10 हजार रुपये के निजी मुचलके पर राहत दी है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि उन्हें हर सुनवाई में उपस्थित रहना होगा और बिना अनुमति देश छोड़कर नहीं जा सकेंगे। पढ़ें पूरी खबर
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पूर्व आरक्षक और चर्चित कारोबारी सौरभ शर्मा को मिली राहत।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भोपाल में करीब डेढ़ साल पहले पांच-पांच जांए एजेंसियों के निशाने पर आने के बाद गिरफ्तार किए गए मध्य प्रदेश परिवहन विभगा के पूर्व आरक्षक करोड़पति सौरभ शर्मा आखिरकार 18 माह बाद जेल से बाहर आ गए हैं। उच्च न्यायाल जबलपुर ने 10 हजार के निजी मुचलके और इतनी ही जमानत राशि अदा करने पर जमानत दे दी है।
सौरभ पर कई मामले दर्ज
हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद सौरभ को भोपाल केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया है। उनपर कई मामले दर्ज हैं। ईडी, आयकर, मध्य प्रदेश लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू और भोपाल पुलिस अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर जांच कर रही हैं। शर्मा के परिवहन विभाग में आरक्षक रहते हुए विभाग के आला अधिकारियों के सांठगांठ कर अपने इशारे पर चलाने के आरोप लगते रहे हैं। शर्मा पर प्रदेश के कई जिलों में संचालित परिवहन चेकपोस्ट पर निजी व्यक्तियों के जरिए अवैध कमाई करने और विभागीय अधिकारियों से लेकर राजनेताओं पर पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं। सौरभ शर्मा को फरवरी 2025 में गिरफ्तार किया गया था, उसके बाद से वह जेल में ही थे।
बिना अनुमति नहीं विदेश नहीं जा सकते
हाईकोर्ट ने अपने जमानत आदेश में कहा है कि जमानत मिलने का यह अर्थ कतई नहीं है कि आरोपों से मुक्ति मिल गई है। शर्मा को ट्रायल कोर्ट में होने वाली प्रत्येक सुनवई में उपस्थित रहना होगा। न्यायालय की अनुमति के बिना देश छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें किसी भी गवाह को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने की भी शर्त लगाई गई है। अदालत ने माना कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
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ट्रायल शुरू हो चुका है तथा गवाहों और दस्तावेजों की संख्या अधिक होने से मुकदमे के शीघ्र निपटारे की संभावना कम है। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं माना जा सकता।
जांच में कौन-कौन एजेंसियां शामिल?
लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा के अरेरा काॅलोनी स्थित निवास, इसी काॅलोनी में स्थित निजी स्कूल के कार्यालय व अन्य ठिकानों पर छापा मारकर करोड़ों की चल-अचल संपत्ति बरामद की थी। इसी बीच अरेरा काॅलोनी से एक इनोवा मेंडोरी गांव तक पहुंचकर एक खाली प्लाॅट में खड़ी हो गई। आयकर विभाग को सूचना मिली तो आधी रात को आयकर विभाग की टीम मौके पर पहुंची और इनोवा का लाॅक तोड़कर जांच की तो कार के अंदर 52 किलोग्राम सोने के बिस्किट और 11 करोड़ कैश बरामद हुए। इसकी जांच आयकर विभाग ने की और बाद में ईडी की इंट्री हुई।
ईडी ने ही सौरभ शर्मा को मनी लाॅड्रिंग सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज कर पहली बार गिरफ्तार किया था। आयकर विभाग ने जांच में यह पाया कि इनोवा में मिला सोना और नकदी सौरभ शर्मा की ही थी। क्योंकि सौरभ की कंपनी में काम करने वाले चेतन के नाम इनोवा थी और उसका उपयोग सौरभ की कंपनी कार्यायाल में होता था।
ये भी पढ़ें- Indore News: इंदौर में चूहों ने बना ली गांधी सर्कल पर बस्ती, निगम को बिछाना पड़े लोहे के जाल
आयकर विभाग 52 किलोग्राम सोना और 11 करोड़ को बेनामी संपत्ति घोषित कर उसे राजसात करे या उसे सौरभ शर्मा की गलती मानकर कार्रवाई करे, इस उलझन में है। क्योंकि शर्मा या उससे जुड़े किसी भी व्यक्ति ने संपत्ति पर दावा नहीं किया। लोकायुक्त पुलिस शर्मा की परिवहन आरक्षक की नौकरी की अवधि में अकूल संपत्ति की जांच कर रही थी, इसी केस में छापा मारा था।
सौरभ उमा शर्मा ने शपथ पत्र दिया कि उनके घर का कोई भी सदस्य शासकीय नौकरी में नहीं है। नौकरी पाने के लिए झूठा शपथ-पत्र देने पर भोपाल पुलिस ने सौरभ शर्मा और उसकी मां उमा शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण भी दर्ज किया है।
क्या फेमा कानून का उल्लंघन किया गया?
52 किलोग्राम सोना मिलने और उसके दस्तावेज नहीं मिले की जांच में डायरेक्ट्रोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) भी शामिल हो गई है। डीआरआई यह पता लगा रही है कि इस सोने को खरीदने के लिए किस विधि से भुगतान किया गया, क्या फेमा कानून का उल्लंघन किया गया, या कस्टम ड्यूटी को लेकर गड़बड़ी की गई है। अकूत संपत्ति मिलने की जांच में ईडी भी शामिल है। ईडी जांच कर रही है कि अपराध से अर्जित धन क्या मनी ट्रेल है? यह असल में किसकी संपत्ति है किसी हाईप्रोफाइल अधिकारी-नेता की बेनामी संपत्ति तो नहीं।
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सौरभ पर कई मामले दर्ज
हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद सौरभ को भोपाल केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया है। उनपर कई मामले दर्ज हैं। ईडी, आयकर, मध्य प्रदेश लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू और भोपाल पुलिस अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर जांच कर रही हैं। शर्मा के परिवहन विभाग में आरक्षक रहते हुए विभाग के आला अधिकारियों के सांठगांठ कर अपने इशारे पर चलाने के आरोप लगते रहे हैं। शर्मा पर प्रदेश के कई जिलों में संचालित परिवहन चेकपोस्ट पर निजी व्यक्तियों के जरिए अवैध कमाई करने और विभागीय अधिकारियों से लेकर राजनेताओं पर पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं। सौरभ शर्मा को फरवरी 2025 में गिरफ्तार किया गया था, उसके बाद से वह जेल में ही थे।
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बिना अनुमति नहीं विदेश नहीं जा सकते
हाईकोर्ट ने अपने जमानत आदेश में कहा है कि जमानत मिलने का यह अर्थ कतई नहीं है कि आरोपों से मुक्ति मिल गई है। शर्मा को ट्रायल कोर्ट में होने वाली प्रत्येक सुनवई में उपस्थित रहना होगा। न्यायालय की अनुमति के बिना देश छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें किसी भी गवाह को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने की भी शर्त लगाई गई है। अदालत ने माना कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
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ट्रायल शुरू हो चुका है तथा गवाहों और दस्तावेजों की संख्या अधिक होने से मुकदमे के शीघ्र निपटारे की संभावना कम है। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं माना जा सकता।
जांच में कौन-कौन एजेंसियां शामिल?
लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा के अरेरा काॅलोनी स्थित निवास, इसी काॅलोनी में स्थित निजी स्कूल के कार्यालय व अन्य ठिकानों पर छापा मारकर करोड़ों की चल-अचल संपत्ति बरामद की थी। इसी बीच अरेरा काॅलोनी से एक इनोवा मेंडोरी गांव तक पहुंचकर एक खाली प्लाॅट में खड़ी हो गई। आयकर विभाग को सूचना मिली तो आधी रात को आयकर विभाग की टीम मौके पर पहुंची और इनोवा का लाॅक तोड़कर जांच की तो कार के अंदर 52 किलोग्राम सोने के बिस्किट और 11 करोड़ कैश बरामद हुए। इसकी जांच आयकर विभाग ने की और बाद में ईडी की इंट्री हुई।
ईडी ने ही सौरभ शर्मा को मनी लाॅड्रिंग सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज कर पहली बार गिरफ्तार किया था। आयकर विभाग ने जांच में यह पाया कि इनोवा में मिला सोना और नकदी सौरभ शर्मा की ही थी। क्योंकि सौरभ की कंपनी में काम करने वाले चेतन के नाम इनोवा थी और उसका उपयोग सौरभ की कंपनी कार्यायाल में होता था।
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आयकर विभाग 52 किलोग्राम सोना और 11 करोड़ को बेनामी संपत्ति घोषित कर उसे राजसात करे या उसे सौरभ शर्मा की गलती मानकर कार्रवाई करे, इस उलझन में है। क्योंकि शर्मा या उससे जुड़े किसी भी व्यक्ति ने संपत्ति पर दावा नहीं किया। लोकायुक्त पुलिस शर्मा की परिवहन आरक्षक की नौकरी की अवधि में अकूल संपत्ति की जांच कर रही थी, इसी केस में छापा मारा था।
सौरभ उमा शर्मा ने शपथ पत्र दिया कि उनके घर का कोई भी सदस्य शासकीय नौकरी में नहीं है। नौकरी पाने के लिए झूठा शपथ-पत्र देने पर भोपाल पुलिस ने सौरभ शर्मा और उसकी मां उमा शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण भी दर्ज किया है।
क्या फेमा कानून का उल्लंघन किया गया?
52 किलोग्राम सोना मिलने और उसके दस्तावेज नहीं मिले की जांच में डायरेक्ट्रोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) भी शामिल हो गई है। डीआरआई यह पता लगा रही है कि इस सोने को खरीदने के लिए किस विधि से भुगतान किया गया, क्या फेमा कानून का उल्लंघन किया गया, या कस्टम ड्यूटी को लेकर गड़बड़ी की गई है। अकूत संपत्ति मिलने की जांच में ईडी भी शामिल है। ईडी जांच कर रही है कि अपराध से अर्जित धन क्या मनी ट्रेल है? यह असल में किसकी संपत्ति है किसी हाईप्रोफाइल अधिकारी-नेता की बेनामी संपत्ति तो नहीं।
