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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   "I'll Go with Papa": 4-Year-Old Boy Chooses Imprisoned Father Over Grandparents After Mother's Death

Ujjain: 'मैं तो पापा के साथ ही जाऊंगा', चार साल के मासूम की जिद के आगे कानून भी पिघला, पिता के साथ पहुंचा जेल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Mon, 18 May 2026 12:25 PM IST
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सार

उज्जैन में पत्नी की आत्महत्या मामले में गिरफ्तार युवक के साथ उसका चार साल का बेटा भी भैरवगढ़ सेंट्रल जेल पहुंच गया। कोर्ट में बच्चे ने नाना-नानी के साथ जाने से इनकार करते हुए पिता के साथ रहने की जिद की। अदालत ने बच्चे की इच्छा को देखते हुए उसे पिता के साथ भेजने की अनुमति दी। जेल प्रशासन ने बच्चे की देखभाल और सुरक्षा के विशेष इंतजाम करने की बात कही है।

"I'll Go with Papa": 4-Year-Old Boy Chooses Imprisoned Father Over Grandparents After Mother's Death
केंद्रीय भैरवगढ़ जेल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

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उज्जैन में एक बेहद भावुक मामला सामने आया है, जहां चार साल के मासूम की एक जिद ने अदालत को भी भावुक कर दिया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान बच्चे ने बार-बार कहा, “मैं पापा के साथ जाऊंगा।” बच्चे की भावनाओं को देखते हुए न्यायाधीश ने उसे पिता के साथ भेजने के निर्देश दिए। साथ ही जेल प्रशासन को बच्चे की पूरी देखभाल सुनिश्चित करने के आदेश भी दिए गए। अब मासूम अपने पिता के साथ केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में रह रहा है।

पत्नी की आत्महत्या के बाद पति की हुई गिरफ्तारी

मामला उज्जैन के देवास रोड स्थित एक कॉलोनी का है। यहां रहने वाली एक महिला ने करीब एक महीने पहले फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मामले की जांच के बाद पुलिस ने पति को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के दौरान चार साल का बेटा भी अपने पिता के साथ था। पुलिस बच्चे को भी कोर्ट लेकर पहुंची। सुनवाई के दौरान बच्चे के नाना-नानी ने उसे अपने साथ रखने की इच्छा जताई।

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नाना-नानी के साथ जाने से किया इनकार

कोर्ट में बच्चा लगातार अपने पिता के साथ रहने की जिद करता रहा। उसने साफ तौर पर नाना-नानी के साथ जाने से इनकार कर दिया। मासूम की यह बात सुनकर अदालत ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्चे को उसके पिता के साथ भेजने का फैसला सुनाया। इसके बाद दोनों को भैरवगढ़ सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

“बच्चे की इच्छा भी महत्वपूर्ण” – लोक अभियोजन अधिकारी

लोक अभियोजन अधिकारी ने बताया कि माता-पिता बच्चे के प्राकृतिक संरक्षक होते हैं। इस मामले में स्थायी कस्टडी का फैसला नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि अगर बच्चा नाना-नानी के साथ जाने की इच्छा जताता, तो अदालत अंतरिम आदेश देकर उसे उनके साथ भेज सकती थी। लेकिन बच्चे ने स्पष्ट रूप से पिता के साथ रहने की बात कही, इसलिए अदालत ने उसी आधार पर निर्णय लिया।

जेल प्रशासन करेगा बच्चे की पूरी देखभाल

भैरवगढ़ जेल अधीक्षक ने बताया कि जेल प्रशासन बच्चे के लिए सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। बच्चे के लिए दूध, भोजन और जरूरत के अनुसार डाइट की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा पढ़ाई, खेलने और मनोरंजन की सुविधाएं भी दी जाएंगी, ताकि बच्चे पर जेल का कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। जेल प्रशासन का कहना है कि बच्चे को अन्य अपराधियों से दूर सुरक्षित माहौल में रखा जाएगा।

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इसलिए चर्चा में है यह मामला

उज्जैन में यह मामला इसलिए चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि कोर्ट में एक चार साल के मासूम ने अपने पिता के साथ रहने की जिद की और अदालत ने उसकी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उसे पिता के साथ जेल भेजने की अनुमति दे दी। जेल प्रशासन के अनुसार, महिला बंदियों के साथ बच्चों के रहने के मामले पहले भी सामने आए हैं, लेकिन किसी पुरुष बंदी के साथ बच्चे के जेल में रहने का यह संभवतः पहला मामला माना जा रहा है।



 

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