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Ujjain: महाकाल मंदिर में VIP कल्चर पर घमासान, हिंदूवादी संगठनों का प्रदर्शन; परमिशन विवाद ने पकड़ा तूल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jun 2026 12:29 PM IST
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सार
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी कल्चर को लेकर विवाद गहरा गया है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल सहित हिंदूवादी संगठनों ने महाकाल लोक से शंख द्वार तक विरोध रैली निकालकर वीआईपी दर्शन व्यवस्था को समाप्त करने की मांग की।
हिंदूवादी संगठनों का शक्ति प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन व्यवस्था को लेकर विवाद और गहरा गया है। हिंदूवादी संगठनों ने वीआईपी कल्चर के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए इसे बंद करने की मांग उठाई, लेकिन प्रदर्शन के बाद मंदिर प्रबंध समिति द्वारा जारी आंकड़ों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। समिति का दावा है कि जिन संगठनों ने वीआईपी व्यवस्था का विरोध किया है, उनके लोग भी पहले इसी व्यवस्था का लाभ लेकर दर्शन कर चुके हैं।
वीआईपी व्यवस्था के खिलाफ निकाली आक्रोश रैली
महाकाल लोक से शंख द्वार तक हिंदूवादी संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता आक्रोश रैली निकालते हुए पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने "वीआईपी व्यवस्था बंद करो" के नारे लगाए और मंदिर प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई। शंख द्वार पर पहुंचकर कार्यकर्ताओं ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और मंदिर प्रबंध समिति के जिम्मेदार अधिकारियों को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष के नाम ज्ञापन सौंपकर वीआईपी व्यवस्था समाप्त करने की मांग की।
आम श्रद्धालुओं की तरह कतार में पहुंचे कार्यकर्ता
विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता सामान्य दर्शन मार्ग से होकर मंदिर पहुंचे। सभी कार्यकर्ता आम श्रद्धालुओं की तरह लाइन में लगकर बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे। मंदिर परिसर में उन्होंने वीआईपी कल्चर बंद करने की मांग वाला आवेदन दिखाया और जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि आस्था के नाम पर श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव किया जा रहा है। बाबा महाकाल के समक्ष सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। इसके बाद बजरंग दल के पदाधिकारियों ने सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल और आशीष फलवाडिया को ज्ञापन सौंपा।
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ज्ञापन में लगाए गए ये आरोप
हिंदूवादी संगठनों ने आरोप लगाया कि वीआईपी दर्शन व्यवस्था के कारण आम और विशेष श्रद्धालुओं के बीच भेदभाव किया जा रहा है। संगठनों का कहना है कि कुछ सुरक्षा कर्मी श्रद्धालुओं के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। संगठनों ने आरोप लगाया कि पहले भी मंदिर के कुछ कर्मचारी भस्म आरती पास बेचने के मामले में पकड़े जा चुके हैं।
ये भी पढ़ें- 39 साल की उम्र और 12 वर्ल्ड रिकॉर्ड, इस आर्टिस्ट ने रोशन किया इंदौर का नाम
इन मामलों में कार्रवाई हुई और प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन हैं। संगठनों का दावा है कि श्रद्धालुओं के साथ ठगी की शिकायतें लगातार सामने आती हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। हिंदूवादी संगठनों ने कहा कि धर्म और हिंदू आस्था से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
मंदिर समिति ने जारी किए आंकड़े, बढ़ा विवाद
प्रदर्शन के बाद महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने कुछ आंकड़े सार्वजनिक किए, जिससे नया विवाद शुरू हो गया। समिति के अनुसार जिन संगठनों ने वीआईपी संस्कृति का विरोध किया है, उन्हीं से जुड़े कई लोगों ने पहले वीआईपी प्रोटोकॉल का लाभ लेकर बाबा महाकाल के दर्शन किए हैं। मंदिर समिति द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 1 जनवरी से 22 जून 2026 तक 2,070 लोगों को भस्म आरती में प्रवेश दिया गया। इसी अवधि में 11,568 लोगों को निशुल्क प्रोटोकॉल व्यवस्था के तहत दर्शन कराए गए। समिति का दावा है कि इससे मंदिर को करीब 29 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
परमिशन प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
मंदिर समिति के अनुसार कुछ प्रोटोकॉल और भस्म आरती अनुमतियों में दर्ज मोबाइल नंबरों में गड़बड़ी मिलने के बाद जांच कराई गई थी।मंदिर सूत्रों का कहना है कि इसी कार्रवाई के बाद कुछ संगठन नाराज होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। एक तरफ हिंदूवादी संगठन वीआईपी दर्शन व्यवस्था को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं और इसे आम श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव बता रहे हैं। दूसरी ओर मंदिर प्रबंध समिति का दावा है कि विरोध करने वाले कई लोग पहले स्वयं इसी प्रोटोकॉल व्यवस्था का लाभ उठा चुके हैं। इसी कारण महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी कल्चर को लेकर बहस और विवाद लगातार तेज होता जा रहा है।
वीआईपी व्यवस्था के खिलाफ निकाली आक्रोश रैली
महाकाल लोक से शंख द्वार तक हिंदूवादी संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता आक्रोश रैली निकालते हुए पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने "वीआईपी व्यवस्था बंद करो" के नारे लगाए और मंदिर प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई। शंख द्वार पर पहुंचकर कार्यकर्ताओं ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और मंदिर प्रबंध समिति के जिम्मेदार अधिकारियों को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष के नाम ज्ञापन सौंपकर वीआईपी व्यवस्था समाप्त करने की मांग की।
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आम श्रद्धालुओं की तरह कतार में पहुंचे कार्यकर्ता
विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता सामान्य दर्शन मार्ग से होकर मंदिर पहुंचे। सभी कार्यकर्ता आम श्रद्धालुओं की तरह लाइन में लगकर बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे। मंदिर परिसर में उन्होंने वीआईपी कल्चर बंद करने की मांग वाला आवेदन दिखाया और जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि आस्था के नाम पर श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव किया जा रहा है। बाबा महाकाल के समक्ष सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। इसके बाद बजरंग दल के पदाधिकारियों ने सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल और आशीष फलवाडिया को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में लगाए गए ये आरोप
हिंदूवादी संगठनों ने आरोप लगाया कि वीआईपी दर्शन व्यवस्था के कारण आम और विशेष श्रद्धालुओं के बीच भेदभाव किया जा रहा है। संगठनों का कहना है कि कुछ सुरक्षा कर्मी श्रद्धालुओं के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। संगठनों ने आरोप लगाया कि पहले भी मंदिर के कुछ कर्मचारी भस्म आरती पास बेचने के मामले में पकड़े जा चुके हैं।
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इन मामलों में कार्रवाई हुई और प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन हैं। संगठनों का दावा है कि श्रद्धालुओं के साथ ठगी की शिकायतें लगातार सामने आती हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। हिंदूवादी संगठनों ने कहा कि धर्म और हिंदू आस्था से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
मंदिर समिति ने जारी किए आंकड़े, बढ़ा विवाद
प्रदर्शन के बाद महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने कुछ आंकड़े सार्वजनिक किए, जिससे नया विवाद शुरू हो गया। समिति के अनुसार जिन संगठनों ने वीआईपी संस्कृति का विरोध किया है, उन्हीं से जुड़े कई लोगों ने पहले वीआईपी प्रोटोकॉल का लाभ लेकर बाबा महाकाल के दर्शन किए हैं। मंदिर समिति द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 1 जनवरी से 22 जून 2026 तक 2,070 लोगों को भस्म आरती में प्रवेश दिया गया। इसी अवधि में 11,568 लोगों को निशुल्क प्रोटोकॉल व्यवस्था के तहत दर्शन कराए गए। समिति का दावा है कि इससे मंदिर को करीब 29 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
परमिशन प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
मंदिर समिति के अनुसार कुछ प्रोटोकॉल और भस्म आरती अनुमतियों में दर्ज मोबाइल नंबरों में गड़बड़ी मिलने के बाद जांच कराई गई थी।मंदिर सूत्रों का कहना है कि इसी कार्रवाई के बाद कुछ संगठन नाराज होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। एक तरफ हिंदूवादी संगठन वीआईपी दर्शन व्यवस्था को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं और इसे आम श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव बता रहे हैं। दूसरी ओर मंदिर प्रबंध समिति का दावा है कि विरोध करने वाले कई लोग पहले स्वयं इसी प्रोटोकॉल व्यवस्था का लाभ उठा चुके हैं। इसी कारण महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी कल्चर को लेकर बहस और विवाद लगातार तेज होता जा रहा है।
