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Ujjain News: महाकाल के दरबार में पुलिसकर्मियों ने लगाई अर्जी, 5500 जवान पहुंचे दरबार; बड़ी अनोखी है इनकी मांग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jan 2026 10:37 AM IST
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सार
मध्यप्रदेश पुलिस के ट्रेड आरक्षक कैडर के 5500 जवानों ने अफसरों की व्यक्तिगत सेवा और अर्दली व्यवस्था के विरोध में बाबा महाकाल से न्याय की गुहार लगाई। कुक, नाई, धोबी जैसे कार्यों से मुक्ति और जनरल ड्यूटी में संविलियन की मांग करते हुए उन्होंने वर्दी के सम्मान और भविष्य की चिंता जताई।
बाबा महाकाल के दरबार में लगाई फरियाद।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश पुलिस के ट्रेड आरक्षक कैडर के सिपाही और हवलदारों ने अफसरों की व्यक्तिगत सेवा और ‘अर्दली व्यवस्था’ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश के इतिहास में पहली बार कुक, नाई, धोबी और स्वीपर जैसे पदों पर तैनात 5500 पुलिसकर्मियों ने अपनी व्यथा लेकर बाबा महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाई। पुलिसकर्मियों के एक प्रतिनिधि मंडल ने महाकाल के चरणों में लिखित अर्जी सौंपकर मुख्यमंत्री के हृदय में करुणा जगाने की प्रार्थना की है, ताकि उन्हें इस अपमानजनक व्यवस्था से मुक्ति मिल सके।
वर्दी का अपमान और बच्चों के भविष्य की चिंता
महाकाल को सौंपी गई अर्जी में पुलिसकर्मियों ने अपना दर्द साझा करते हुए लिखा कि हमारी वर्दी आज अपमान से झुकी हुई है। हम नहीं चाहते कि हमारे बच्चे हमें गुलाम समझें। इन जवानों का कहना है कि वे देश की सेवा के लिए पुलिस बल में भर्ती हुए थे, लेकिन आज भी वे अफसरों के घरों में कुक, नाई और मोची का काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने मांग की है कि उन्हें ट्रेड आरक्षक से हटाकर जनरल ड्यूटी (जीडी) में मर्ज किया जाए, ताकि वे कानून व्यवस्था की मुख्यधारा में शामिल हो सकें।
ये भी पढ़ें- क्या कटनी है खनिजों का नया गढ़? सोने के बाद कोयले के भंडार ने बढ़ाई शान, जानें कौन सी है ये क्वालिटी
पदोन्नति के बाद भी करना पड़ रहा है ‘चाकरी’ का काम
पुलिसकर्मियों ने बताया कि ट्रेड कैडर में भर्ती हुए जवान सात साल की सेवा के बाद जिला पुलिस के सहयोगी बनने के पात्र हो जाते हैं। विडंबना यह है कि पिछले 12 वर्षों से उनके जनरल ड्यूटी में संविलियन पर रोक लगी हुई है। हालात यह हैं कि कई जवान पदोन्नति पाकर सब इंस्पेक्टर स्तर तक पहुंच गए हैं, लेकिन विभाग उनसे अब भी अफसरों के घरों में स्वीपर और कुक का ही काम करवा रहा है। पड़ोसी राज्यों में इन कैडरों को मर्ज कर पुलिस बल की कमी पूरी की जा रही है, परंतु मध्य प्रदेश में यह प्रक्रिया ठप पड़ी है।
2012 में बंद हुए थे संविलियन के द्वार
अर्जी के माध्यम से ट्रेड आरक्षकों ने बताया कि मध्य प्रदेश में पहले प्रचलित नियम के तहत पांच वर्ष की संतोषजनक सेवा के बाद उन्हें जनरल ड्यूटी में शामिल कर लिया जाता था। वर्ष 2012 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक द्वारा इस व्यवस्था को बंद कर दिया गया था। जवानों का आरोप है कि निजी स्वार्थों के चलते इस नियम को खत्म किया गया ताकि अफसरों को घरों में मुफ्त के सहायक मिलते रहें। अब इन 5500 जवानों ने महाकाल से न्याय की गुहार लगाई है ताकि उन्हें भी सम्मानजनक पुलिस ड्यूटी का अवसर मिल सके।
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महाकाल को सौंपी गई अर्जी में पुलिसकर्मियों ने अपना दर्द साझा करते हुए लिखा कि हमारी वर्दी आज अपमान से झुकी हुई है। हम नहीं चाहते कि हमारे बच्चे हमें गुलाम समझें। इन जवानों का कहना है कि वे देश की सेवा के लिए पुलिस बल में भर्ती हुए थे, लेकिन आज भी वे अफसरों के घरों में कुक, नाई और मोची का काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने मांग की है कि उन्हें ट्रेड आरक्षक से हटाकर जनरल ड्यूटी (जीडी) में मर्ज किया जाए, ताकि वे कानून व्यवस्था की मुख्यधारा में शामिल हो सकें।
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पुलिसकर्मियों ने बताया कि ट्रेड कैडर में भर्ती हुए जवान सात साल की सेवा के बाद जिला पुलिस के सहयोगी बनने के पात्र हो जाते हैं। विडंबना यह है कि पिछले 12 वर्षों से उनके जनरल ड्यूटी में संविलियन पर रोक लगी हुई है। हालात यह हैं कि कई जवान पदोन्नति पाकर सब इंस्पेक्टर स्तर तक पहुंच गए हैं, लेकिन विभाग उनसे अब भी अफसरों के घरों में स्वीपर और कुक का ही काम करवा रहा है। पड़ोसी राज्यों में इन कैडरों को मर्ज कर पुलिस बल की कमी पूरी की जा रही है, परंतु मध्य प्रदेश में यह प्रक्रिया ठप पड़ी है।
2012 में बंद हुए थे संविलियन के द्वार
अर्जी के माध्यम से ट्रेड आरक्षकों ने बताया कि मध्य प्रदेश में पहले प्रचलित नियम के तहत पांच वर्ष की संतोषजनक सेवा के बाद उन्हें जनरल ड्यूटी में शामिल कर लिया जाता था। वर्ष 2012 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक द्वारा इस व्यवस्था को बंद कर दिया गया था। जवानों का आरोप है कि निजी स्वार्थों के चलते इस नियम को खत्म किया गया ताकि अफसरों को घरों में मुफ्त के सहायक मिलते रहें। अब इन 5500 जवानों ने महाकाल से न्याय की गुहार लगाई है ताकि उन्हें भी सम्मानजनक पुलिस ड्यूटी का अवसर मिल सके।
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