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MP News: संतों के साथ मैदान में उतरा प्रशासन, सिंहस्थ 2028 को भव्य बनाने की रफ्तार तेज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Thu, 09 Apr 2026 02:05 PM IST
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सार
सिंहस्थ 2028 को लेकर तैयारियां तेजी से चल रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश पर मेला अधिकारी आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने संतों के साथ निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। शनि मंदिर से शुरू हुए दौरे में नए घाटों और विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई।
संतों संग प्रशासन का बड़ा निरीक्षण अभियान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगामी सिंहस्थ महापर्व को लेकर तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश पर प्रशासनिक अधिकारी लगातार कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं। इसी कड़ी में सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने साधु संतों के साथ विभिन्न निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। भ्रमण की शुरुआत शनि मंदिर से की गई। इसके बाद अधिकारियों और संतों ने नए घाटों के निर्माण कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान प्रशासन ने सिंहस्थ से जुड़े विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी संतों को दी।
29 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण जारी
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि सिंहस्थ से जुड़े सभी कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि साधु संतों और गुरुजनों को स्थल पर ले जाकर निर्माण कार्यों की स्थिति से अवगत कराया जा रहा है। करीब 29 किलोमीटर लंबे नए घाटों का निर्माण तेजी से जारी है, जिससे श्रद्धालुओं की भीड़ का दबाव कम होगा। प्रशासन द्वारा शिप्रा नदी को शुद्ध और आचमन योग्य बनाने के लिए चल रही परियोजनाओं का भी निरीक्षण किया जा रहा है। इसके साथ ही पुल निर्माण और आवागमन व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित सुविधा मिल सके।
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29 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण जारी
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि सिंहस्थ से जुड़े सभी कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि साधु संतों और गुरुजनों को स्थल पर ले जाकर निर्माण कार्यों की स्थिति से अवगत कराया जा रहा है। करीब 29 किलोमीटर लंबे नए घाटों का निर्माण तेजी से जारी है, जिससे श्रद्धालुओं की भीड़ का दबाव कम होगा। प्रशासन द्वारा शिप्रा नदी को शुद्ध और आचमन योग्य बनाने के लिए चल रही परियोजनाओं का भी निरीक्षण किया जा रहा है। इसके साथ ही पुल निर्माण और आवागमन व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित सुविधा मिल सके।
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सिंहस्थ 2028 की तैयारियां तेज
- फोटो : अमर उजाला
संतों के सुझावों को दिया जा रहा महत्व
कलेक्टर ने कहा कि साधु संतों के सुझावों को विशेष महत्व दिया जा रहा है और उन्हें अमल में लाया जाएगा। निरीक्षण के दौरान संतों ने विकलांगजन सुविधाएं, महिलाओं के लिए वस्त्र परिवर्तन कक्ष, टॉयलेट व्यवस्था और घाटों की सीढ़ियों पर फिसलन रोकने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए। प्रशासन ने इन सभी सुझावों को नोट कर आवश्यक सुधार करने का भरोसा दिलाया। निरीक्षण के दौरान मौजूद वरिष्ठ संत डॉ रामेश्वर दास जी महाराज ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि घाटों का निर्माण बेहतर गुणवत्ता के साथ किया जा रहा है और अब तक करीब 42 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इससे समय पर सभी कार्य पूरे होने की उम्मीद है।
कलेक्टर ने कहा कि साधु संतों के सुझावों को विशेष महत्व दिया जा रहा है और उन्हें अमल में लाया जाएगा। निरीक्षण के दौरान संतों ने विकलांगजन सुविधाएं, महिलाओं के लिए वस्त्र परिवर्तन कक्ष, टॉयलेट व्यवस्था और घाटों की सीढ़ियों पर फिसलन रोकने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए। प्रशासन ने इन सभी सुझावों को नोट कर आवश्यक सुधार करने का भरोसा दिलाया। निरीक्षण के दौरान मौजूद वरिष्ठ संत डॉ रामेश्वर दास जी महाराज ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि घाटों का निर्माण बेहतर गुणवत्ता के साथ किया जा रहा है और अब तक करीब 42 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इससे समय पर सभी कार्य पूरे होने की उम्मीद है।
मौके पर मौजूद अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
श्रद्धालुओं को मिलेगी बेहतर सुविधा
संतों ने कहा कि 29 किलोमीटर लंबे घाट बनने से श्रद्धालुओं की भीड़ का दबाव विभाजित होगा और स्नान व्यवस्था अधिक सुगम होगी। उन्होंने निर्माण कार्य को अद्वितीय बताते हुए प्रशासन के प्रयासों की सराहना की। कुल मिलाकर सिंहस्थ 2028 को लेकर प्रशासन और संत समाज के बीच बेहतर समन्वय के साथ तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
संतों ने कहा कि 29 किलोमीटर लंबे घाट बनने से श्रद्धालुओं की भीड़ का दबाव विभाजित होगा और स्नान व्यवस्था अधिक सुगम होगी। उन्होंने निर्माण कार्य को अद्वितीय बताते हुए प्रशासन के प्रयासों की सराहना की। कुल मिलाकर सिंहस्थ 2028 को लेकर प्रशासन और संत समाज के बीच बेहतर समन्वय के साथ तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

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