Ujjain: सिंहस्थ 2028 के लिए महाकाल मंदिर में बड़ा प्लान, रोज 10 लाख श्रद्धालुओं को दर्शन कराने की तैयारी
दरअसल तत्कालीन सीएसपी राहुल देशमुख ने सिंहस्थ के लिए प्रस्तावित दर्शन व्यवस्था प्लान तैयार किया है। इसमें एंट्री, एग्जिट, जूते-चप्पल जमा करने, फिर से प्राप्त करने का डिजिटल प्लान बनाया गया है।
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पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर महाकालेश्वर मंदिर परिसर का निरीक्षण किया और मातहत अधिकारियों से प्रस्तावित व्यवस्थाओं पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने पहले मोबाइल पर दर्शन व्यवस्था का पूरा प्लान साझा किया, फिर अधिकारियों और पुलिसकर्मियों से सुझाव लिए। इसके बाद मंदिर परिसर में पहुंचकर व्यवस्थाओं का फील्ड निरीक्षण भी किया।
दरअसल, तत्कालीन सीएसपी राहुल देशमुख द्वारा सिंहस्थ के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था का प्रस्तावित प्लान तैयार किया गया है। इसमें श्रद्धालुओं की एंट्री-एग्जिट, जूते-चप्पल जमा करने और उन्हें वापस प्राप्त करने तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल तरीके से व्यवस्थित करने की योजना बनाई गई है।
इस प्लान के अनुसार एक दिन में करीब 10 लाख श्रद्धालुओं को श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन कराने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि कागजों पर यह व्यवस्था काफी मजबूत दिखाई दे रही है, लेकिन इसे धरातल पर लागू करने में कई व्यावहारिक चुनौतियां सामने आ सकती हैं। इन्हीं पहलुओं को समझने और परखने के लिए एसपी प्रदीप शर्मा मंदिर पहुंचे थे।
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निरीक्षण के दौरान उनके साथ पिछले सिंहस्थ में ड्यूटी कर चुके टीआई गगन बादल, महाकाल चौकी प्रभारी एमएस सक्तावत, एएसआई चंद्रभान सिंह और हेड कांस्टेबल राकेश देवड़ा समेत अन्य पुलिसकर्मी मौजूद रहे। एसपी ने सभी को पहले मोबाइल पर प्लान समझाया और फिर फील्ड में जाकर संभावित दिक्कतों को परखने के निर्देश दिए। करीब एक घंटे तक प्लान पर चर्चा करने के बाद टीम ने दो घंटे तक मंदिर परिसर का भ्रमण कर व्यवस्थाओं की व्यवहारिक स्थिति का आकलन किया।
समन्वय के साथ काम करने के निर्देश
पुलिस अधीक्षक ने सभी संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ 2028 में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित और बेहतर अनुभव उपलब्ध कराना प्राथमिकता है, ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े।
इन मुद्दों पर हुई चर्चा
बैठक के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें दर्शन व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था, प्रवेश और निकास प्रणाली समेत विभिन्न व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

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