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Umaria: बांधवगढ़ में गिद्ध संरक्षण की तैयारी तेज, शीतकालीन गणना से पहले ताला में वृत्त स्तरीय कार्यशाला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया Published by: उमरिया ब्यूरो Updated Sat, 14 Feb 2026 07:52 PM IST
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सार

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला ईको सेंटर में शीतकालीन गिद्ध गणना 2025-26 हेतु वृत्त स्तरीय कार्यशाला हुई। अधिकारियों को गिद्ध प्रजातियों की पहचान और ‘एपिकलेक्ट-5 डाटा’ मोबाइल अनुप्रयोग से वैज्ञानिक गणना व सटीक जानकारी संकलन का प्रशिक्षण दिया गया।

Bandhavgarh Hosts Circle-Level Workshop Ahead of Statewide Vulture Census
बांधवगढ़ में गिद्ध संरक्षण की तैयारी तेज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ईको सेंटर ताला में शुक्रवार 14 फरवरी 2026 को प्रदेशव्यापी शीतकालीन गिद्ध गणना 2025-26 के मद्देनजर वृत्त स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का उद्देश्य क्षेत्रीय अधिकारियों और वन कर्मचारियों को गिद्धों की वैज्ञानिक गणना की नई पद्धतियों से परिचित कराना और मैदानी स्तर पर बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना रहा।
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कार्यशाला में वन वृत्त शहडोल अंतर्गत उत्तर शहडोल, दक्षिण शहडोल, उमरिया, अनूपपुर तथा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के सभी उपवन मंडल अधिकारी और परिक्षेत्र अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी ने इस पहल को गंभीरता और व्यापकता प्रदान की।
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कार्यक्रम के दौरान वल्चर कमेटी के सदस्य और मास्टर ट्रेनर श्री दिलशेर खान ने मध्य प्रदेश में पाए जाने वाले स्थायी और प्रवासी गिद्ध प्रजातियों की पहचान, उनके प्राकृतिक आवास और व्यवहार पर विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद अहम हैं और मृत पशुओं के शीघ्र अपघटन में उनकी भूमिका पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।

इसके बाद श्री मोहन नागवानी ने इस वर्ष की गणना में उपयोग होने वाले मोबाइल एप्लीकेशन ‘Epicollect5 Data’ के संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। अधिकारियों को ऐप के माध्यम से लोकेशन मार्किंग, प्रजाति पहचान, संख्या दर्ज करने और डेटा अपलोड करने की प्रक्रिया समझाई गई। प्रशिक्षण का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि गणना के दौरान एकत्रित जानकारी सटीक और एकरूप हो।

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कार्यशाला को संबोधित करते हुए क्षेत्र संचालक, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ने प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में गिद्धों की संख्या में आई गिरावट को देखते हुए नियमित और वैज्ञानिक गणना बेहद जरूरी है। सही आंकड़े ही संरक्षण की प्रभावी रणनीति बनाने में सहायक होंगे।

उप संचालक ने उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मैदानी अमले को भी इसी तरह प्रशिक्षित करें, ताकि गणना के दौरान किसी तरह की तकनीकी या प्रजाति पहचान संबंधी त्रुटि न हो।

कार्यशाला के अंत में पनपथा के उपवन मंडल अधिकारी ने आभार व्यक्त किया। बताया गया कि मध्य प्रदेश में 20 फरवरी से 22 फरवरी तक मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से गिद्ध गणना की जाएगी। इस पहल से न केवल गिद्धों की वास्तविक स्थिति का आकलन होगा, बल्कि संरक्षण प्रयासों को और मजबूत आधार भी मिलेगा।

 

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