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RE NEET Exam 2026: गेट पर सिर पटकते रहे पिता व पुत्री, नहीं सुनी चीखें; एंट्री न होने से छात्राओं का टूटा सपना

Sun, 21 Jun 2026 08:08 PM IST
विदिशा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, विदिशा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, विदिशा Published by: विदिशा ब्यूरो Updated Sun, 21 Jun 2026 08:08 PM IST
सार

विदिशा की तीन बेटियां  री-नीट परीक्षा 2026 में दो मिनट के देरी की वजह से वंचित रह गईं। वहीं, इन छात्राओं के रोते-बिलखते हुए का वीडियो, तस्वीरें सोशल मीडिया का खाफी वायरल हुईं। उमेश विश्वकर्मा 70 किलोमीटर दूर से किसी तरह मौसम और बाइक पंचर होने की समस्या से लड़ते हुए परीक्षा केंद्र पर देरी से पहुंचे तो उनकी बेटी रागनी को एंट्री नहीं दी गई। पढ़ें इन छात्राओं का सपना तोड़ने वाली यह खबर

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Three girl students in Vidisha were denied NEET exam.
परीक्षा केंद्र के बाहर प्रवेश के लिए रोती बिलखती छात्राएं और परिजन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डॉक्टर बनने का सपना संजोए विदिशा की तीन छात्राओं के लिए रविवार का दिन मायूसी लेकर आया। चार री नीट एग्जाम सेंटर्स में से एक सेंटर पर मामूली चूक व परिस्थितियों के कारण तीन बेटियां परीक्षा हॉल तक नहीं पहुंच सकीं।

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राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के लिए सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक प्रवेश का समय निर्धारित था। 1:30 बजे गेट बंद कर दिया गया। 

अंततः छात्राओं को परीक्षा कक्ष में प्रवेश नहीं दिया गया
छात्राओं के हंगामे की सूचना मिलते ही नीट की नोडल अधिकारी एवं केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्य गीता भदौरिया मौके पर पहुंचीं। उन्होंने मानवीय आधार पर दोनों छात्राओं को अंदर ले जाकर प्रक्रिया शुरू करवाई, लेकिन बायोमेट्रिक सत्यापन और दस्तावेज जांच के दौरान निर्धारित समय सीमा समाप्त हो चुकी थी। एनटीए के सख्त दिशा-निर्देशों के चलते तकनीकी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। अंततः दोनों छात्राओं को परीक्षा कक्ष में प्रवेश नहीं दिया गया। बाहर खड़े परिजन यह दृश्य देखकर भावुक हो गए।

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केस 1
छात्रा स्नेहा दुबे को नहीं मिला प्रवेश

विदिशा शहर की स्नेहा दुबे और कुरवाई तहसील के कूला गांव की रागनी विश्वकर्मा लगभग 1:32 बजे केंद्र के बाहर पहुंचीं। गेट पर तैनात कर्मचारियों ने नियमों का हवाला देते हुए प्रवेश देने से इनकार कर दिया। इस बीच छात्रा परीक्षा केंद्र के बाहर रोती रही। शामिल होने का आग्रह करती रही। लेकिन सिर्फ समझाकर उसे अंदर आने से मना कर दिया गया। 

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केस 2
परीक्षा केंद्र में प्रवेश न मिलने का दूसरा घटना क्रम छात्रा रागनी विश्कर्मा का है। बात दें, आंखों में आंसू लिए  रागनी और उनके पिता गिड़गिड़ाते रहे। दो मिनट की देरी ने साल भर का सपना चकनाचूर कर दिया। बेबस पिता और नीट परीक्षा देने आई छात्रा लगातार मिन्नतें करते रहे। उनकी चीख-पुकार और बेबसी देखकर लोग भी ठहर गए। चेहरे पर लाचारी देखकर हर किसी के मन में कई सवाल उठ रहे थे। यह पूरी कहानी नीट परीक्षा देने आई छात्रा रागिनी और उसके पिता उमेश विश्वकर्मा की है, जो परीक्षा केंद्र के गेट पर सिर पटकते और रोते-बिलखते नजर आए।

निवेदन, आग्रह और अपील व आंसू सब रहे बेअसर
सड़क पर लेटकर और अपने सिर पर हाथ मारकर विलाप करते पिता-पुत्री का वीडियो  लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। निवेदन, आग्रह और अपील के बावजूद जिम्मेदारों ने नियमों का हवाला देते हुए प्रवेश नहीं दिया। मात्र दो मिनट की देरी के कारण परीक्षा से वंचित होने का यह मामला एक संवेदनशील व्यवस्था के भीतर मानवीय संवेदनाओं की कमी को भी उजागर करता है। दर्द, पीड़ा, बेबसी और तमाम परेशानियों को दरकिनार कर दिया गया। फरियदा नहीं सुनी गई। नियमों की दीवार ने न सिर्फ एक बेटी, बल्कि पूरे परिवार के सपने को चकनाचूर कर दिया। क्या उमेश की बेटी डॉक्टर बन पाएगी? यह सवाल एक बार फिर अनिश्चित भविष्य के गर्त में चला गया।

पहले बारिश ने रोका रास्ता, फिर बाइक ने दिया धोखा
लाचार पिता उमेश विश्वकर्मा ने बताया कि पहले बारिश ने उनका रास्ता रोक दिया। मार्ग पर बने पुल में पानी भर जाने की वजह से कुछ देर तक इंतजार करना पड़ा इसके बाद कुछ दूरी तय करने पर उनकी बाइक पंचर हो गई। उनका घर परीक्षा केंद्र से करीब 70 किलोमीटर दूर है। किसी तरह मौसम की मार और बाइक पंचर की समस्या से जूझते हुए वह अपनी बेटी के सपने को साकार करने की उम्मीद में तेजी से परीक्षा केंद्र पहुंचे, लेकिन वहां नियम और कानून मानवीय पक्ष को दरकिनार करते हुए दीवार बनकर खड़े थे।

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केस 3

इसी केंद्र पर तीसरी घटना ने सभी को चौंका दिया। विदिशा की अक्षत श्रीवास्तव पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा केंद्र पहुंची, लेकिन जब उसने अपना एडमिट कार्ड दिखाया तो जांचकर्ता भी हैरान रह गए। वह पिछली नीट परीक्षा का प्रवेश पत्र लेकर आ गई थी, जबकि नया एडमिट कार्ड घर पर ही छूट गया था। काफी प्रयास और अनुरोध के बावजूद उसे प्रवेश नहीं मिल सका। अक्षत गेट पर ही फूट-फूटकर रोने लगी।


वहीं, नोडल अधिकारी गीता भदौरिया ने बताया कि हमें छात्राओं का दर्द समझ आता है, लेकिन एनटीए के नियम पूरी तरह स्पष्ट हैं। दोपहर 1:30 बजे के बाद किसी भी परिस्थिति में प्रवेश नहीं दिया जा सकता। बायोमेट्रिक सत्यापन समय पर न होने की स्थिति में भी हम नियमों से बंधे थे। 

दो मिनट की देरी और एक गलत दस्तावेज ने तीन छात्राओं की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया। गर्ल्स कॉलेज केंद्र के बाहर देर तक मायूसी का माहौल बना रहा। यह घटना सभी परीक्षार्थियों के लिए एक सीख है कि बड़े इम्तिहानों में समय और दस्तावेजों की अहमियत बेहद महत्वपूर्ण होती है

 

 

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