Ekadashi Vrat Niyam In Hindi: धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में एकादशी व्रत को सिर्फ भोजन का त्याग नहीं, बल्कि तन, मन और वचन की शुद्धि का माध्यम बताया गया है। सावन मास में पड़ने वाली कामिका एकादशी 9 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। पद्म पुराण, स्कंद पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण और भविष्योत्तर पुराण में इस व्रत की विधि और महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। हालांकि, कुछ गलत आदतें और व्यवहार ऐसे होते हैं, जो इस व्रत के पुण्य को कम कर सकते हैं। इसलिए व्रत के दौरान किन बातों से बचना चाहिए, यह जानना बेहद जरूरी है।
Ekadashi Vrat Niyam: सावन का पहला एकादशी व्रत कल, उपवास के दौरान इन गलतियों से बचें
Ekadashi Vrat Niyam: धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में कुछ गलत आदतों और व्यवहार के बारे में बताया गया है. जो एकादशी व्रत के पुण्य को कम कर सकते हैं। आइए जानते हैं एकादशी व्रत के दौरान किन बातों का ध्यान रखा चाहिए।
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एकादशी व्रत में इन गलतियों से बचें:
क्रोध और विवाद – स्कंद पुराण में बताया गया है कि क्रोध मन की शांति और पवित्रता को नष्ट करता है। व्रत के दौरान गुस्सा या झगड़ा करने से इसका आध्यात्मिक लाभ घट जाता है।
असत्य और छल-कपट – धर्मशास्त्रों में सत्य को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। एकादशी के दिन झूठ बोलना या किसी को धोखा देना व्रत की मर्यादा के विरुद्ध माना जाता है।
चुगली और निंदा – ब्रह्मवैवर्त पुराण में दूसरों की बुराई और अपशब्दों से दूर रहने की सलाह दी गई है। ऐसा करने से व्रत का पुण्य कम हो सकता है।
हिंसा और क्रूरता – किसी भी जीव को कष्ट देना इस दिन विशेष रूप से वर्जित माना गया है। दया और करुणा का पालन करना ही सच्चा धर्म है।
इंद्रिय भोग और वासनाएं – एकादशी का मुख्य उद्देश्य आत्मसंयम है। इसलिए काम, लोभ और भौतिक सुखों में लिप्त रहने से बचना चाहिए।
आलस्य और अधिक सोना – भविष्योत्तर पुराण के अनुसार इस दिन जप, भजन, विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ और सत्संग करना अधिक फलदायी माना गया है।
भगवान विष्णु की उपासना न करना – केवल उपवास करना ही पर्याप्त नहीं है। यदि पूजा, मंत्रजप या कथा श्रवण नहीं किया जाए, तो व्रत अधूरा माना जाता है।
द्वादशी पर पारण में लापरवाही – शास्त्रों में बताया गया है कि समय पर और विधिपूर्वक व्रत का पारण करना जरूरी है, अन्यथा पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
कामिका एकादशी का धार्मिक महत्व
पुराणों के अनुसार, ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद को बताया कि एकादशी व्रत का पुण्य कई यज्ञों से भी अधिक होता है। स्वयं भगवान विष्णु ने इसकी महिमा बताते हुए कहा है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करता है, उसे निम्न योनि में जन्म नहीं लेना पड़ता।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।