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श्रावण की कामिका एकादशी कल: तुलसी, दीपदान और विष्णु पूजा से बरसेगी श्रीहरि की असीम कृपा

Sat, 08 Aug 2026 03:12 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 08 Aug 2026 03:12 PM IST
सार

सावन माह में पड़ने वाली एकादशी का विशेष महत्व होता है क्योंकि इसमें सावन और एकादशी का विशेष संयोग होता है। इसमें भगवान शिव के साथ-साथ भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। 

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Kamika Ekadashi 2026 Tulsi Puja Deepdaan Benefits On Ekadashi
कामिका एकादशी 2026 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का श्रेष्ठ समय माना जाता है, लेकिन शास्त्रों में यह भी वर्णित है कि भगवान शिव के आराध्य श्री विष्णु हैं और भगवान विष्णु के आराध्य भगवान शिव। यही कारण है कि श्रावण मास में आने वाली कामिका एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस वर्ष यह एकादशी 9 अगस्त , शनिवार को मनाई जाएगी। कामिका एकादशी का स्मरण मात्र भी वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है।

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दीपदान से मिलती है अनगिनत पुण्य की प्राप्ति
पद्म पुराण के अनुसार कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु के समक्ष घी या तिल के तेल का दीपक जलाने से ऐसा पुण्य प्राप्त होता है जिसकी गणना स्वयं चित्रगुप्त भी नहीं कर सकते। इस दिन श्रीधर, हरि, विष्णु, माधव और मधुसूदन आदि नामों से भगवान विष्णु का पूजन विशेष फलदायी माना गया है। श्रद्धापूर्वक किया गया दीपदान जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
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दशमी से ही शुरू हो जाती है व्रत की तैयारी
कामिका एकादशी व्रत की विधि दशमी तिथि से ही प्रारंभ हो जाती है। इस दिन से सात्विक भोजन करना, क्रोध और कटु वचन से बचना तथा मन को संयमित रखना चाहिए। एकादशी के दिन प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु का धूप, दीप, पुष्प, फल और नैवेद्य से पूजन करें। साथ ही एकादशी व्रत कथा का श्रवण अथवा पाठ, 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप तथा विष्णुसहस्रनाम का पाठ अत्यंत शुभ माना गया है। रात्रि जागरण करने वाले भक्त को यमलोक का भय नहीं रहता और उसे उत्तम गति प्राप्त होती है।
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तुलसी दल से प्रसन्न होते हैं श्रीहरि
शास्त्रों में कहा गया है कि लाल मणि, मोती और अन्य बहुमूल्य रत्नों से भी भगवान विष्णु उतने प्रसन्न नहीं होते, जितने तुलसी दल अर्पित करने से होते हैं। तुलसी की मंजरी से श्री केशव का पूजन करने पर जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। तुलसी का दर्शन पापों का नाश करता है, स्पर्श शरीर को पवित्र बनाता है, प्रणाम रोगों को दूर करता है और भगवान के चरणों में अर्पित की गई तुलसी मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।

श्रावण में श्रीहरि की पूजा का विशेष महत्व
श्रावण मास भगवान शिव का प्रिय महीना है, किंतु इस समय भगवान श्रीहरि का पूजन भी अत्यंत फलदायी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस माह श्रीधर की उपासना करने से देवता, गंधर्व और नाग सहित समस्त देवशक्तियों की पूजा का पुण्य प्राप्त होता है। यह एकादशी स्वर्गलोक तथा अक्षय पुण्य प्रदान करने वाली मानी गई है।

भूमिदान और गोदान के समान मिलता है पुण्यफल
पद्म पुराण में कामिका एकादशी के व्रत का फल अत्यंत महान बताया गया है। श्रद्धा और विधि-विधान से इस व्रत का पालन करने वाले साधक को वही पुण्य प्राप्त होता है जो संपूर्ण पृथ्वी के दान अथवा सवत्सा गौदान से मिलता है। इतना ही नहीं, इस एकादशी की महिमा का श्रद्धापूर्वक श्रवण करने वाला भी पापों से मुक्त होकर अंत में श्रीविष्णु के परम धाम को प्राप्त करता है। इसलिए कामिका एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि श्रीहरि की असीम कृपा और मोक्ष का सरल साधन मानी गई है।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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