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Sawan Shivratri 2026: कब है सावन शिवरात्रि 11 या 12 अगस्त ? जानिए पूजा और जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त
Sat, 08 Aug 2026 07:38 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 08 Aug 2026 07:38 PM IST
सार
सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 11 अगस्त को सुबह 4 बजकर 54 मिनट पर होगी, जिसका समापन 12 अगस्त को रात 1 बजकर 52 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जाएगी
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सावन शिवरात्रि की शुभकामनाएं
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
हिंदू धर्म में सावन का महीना बहुत ही शुभ और फलदायी होता है। यह महीना भोलेनाथ को बहुत ही प्रिय होता है और ऐसी मान्यता है कि इसमें पूजा-आराधना करने से पर शिवजी प्रसन्न होते हैं। सावन में पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन जो भी शिव भक्त सच्चे मन से शिवजी का जलाभिषेक करता है उसके जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और हर तरह की मनोकामनाएं पूरी होती है। आइए जानते है इस बार कब है सावन शिवरात्रि, पूजा मुहुर्त और महत्व।
कब है सावन शिवरात्रि
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 11 अगस्त को सुबह 4 बजकर 54 मिनट पर होगी, जिसका समापन 12 अगस्त को रात 1 बजकर 52 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जाएगी। जिसमें देश के सभी शिवालयों में शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाएगा।
सावन शिवरात्रि पर कैसे करें भगवान शिव की पूजा?
सावन शिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ की पूजा और शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर सबसे पहले जल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, शहद आदि से अभिषेक कर सकते हैं। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल अर्पित करें। पूजा के दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें और अंत में शिव आरती करें। इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों पर उनकी कृपा बनी रहती है।
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सावन शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का समय
भगवान शिव जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं जो मात्र एक लोटा जल अर्पित करने में प्रसन्न होते हैं। सावन के महीने में शिवलिंग का अभिषेक और विधिपूर्वक पूजन करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। भगवान शिव की चार प्रहर में पूजा करने की परंपरा है।
पहला प्रहर: शाम 7:04 बजे से रात 9:45 बजे तक
दूसरा प्रहर: रात 9:45 बजे से 12:26 बजे तक
तीसरा प्रहर: रात 12:26 बजे से सुबह 3:07 बजे तक
चौथा प्रहर: सुबह 3:07 बजे से 5:49 बजे तक
Jalabhishek Niyam: शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय इन बातों का रखें ध्यान, जानें क्या है सही नियम
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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कब है सावन शिवरात्रि
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 11 अगस्त को सुबह 4 बजकर 54 मिनट पर होगी, जिसका समापन 12 अगस्त को रात 1 बजकर 52 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जाएगी। जिसमें देश के सभी शिवालयों में शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाएगा।
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सावन शिवरात्रि पर कैसे करें भगवान शिव की पूजा?
सावन शिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ की पूजा और शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर सबसे पहले जल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, शहद आदि से अभिषेक कर सकते हैं। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल अर्पित करें। पूजा के दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें और अंत में शिव आरती करें। इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों पर उनकी कृपा बनी रहती है।
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सावन शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का समय
भगवान शिव जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं जो मात्र एक लोटा जल अर्पित करने में प्रसन्न होते हैं। सावन के महीने में शिवलिंग का अभिषेक और विधिपूर्वक पूजन करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। भगवान शिव की चार प्रहर में पूजा करने की परंपरा है।
पहला प्रहर: शाम 7:04 बजे से रात 9:45 बजे तक
दूसरा प्रहर: रात 9:45 बजे से 12:26 बजे तक
तीसरा प्रहर: रात 12:26 बजे से सुबह 3:07 बजे तक
चौथा प्रहर: सुबह 3:07 बजे से 5:49 बजे तक
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।