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Kamika Ekadashi 2026: 9 अगस्त को कामिका एकादशी, जानिए तिथि, पूजा मुहूर्त और पारण आरती
Sat, 08 Aug 2026 01:44 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 08 Aug 2026 01:44 PM IST
सार
सावन माह में पड़ने वाली एकादशी का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को कामिका एकादशी के नाम से जाना जाता है।
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कामिका एकादशी 2026
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिंदू धर्म में कामिका एकादशी का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी के नाम से जाना जाता है। सावन माह में पड़ने वाली इस एकादशी का विशेष महत्व होता है क्योंकि सावन का महीना भगवान शिव को अतिप्रिय होता है,वहीं एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा-आराधना के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में इस एकादशी पर व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के सभी तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं और मृत्यु के बाद विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। कामिका एकादशी का व्रत करने से गंगा स्नान, गया, काशी, पुष्कर और कुरुक्षेत्र जैसे महान तीर्थों के बराबर का पुण्य लाभ मिलता है। आइए जानते हैं कामिका एकादशी की तिथि, पूजा मुहूर्त समेत सभी तरह की जानकारियां।
कामिका एकादशी तिथि 2026
वैदिक पंचांग के अनुसार, श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 8 अगस्त 2026 को दोपहर 01 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 9 अगस्त 2026 को रविवार सुबह 11 बजकर 04 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त को रखा जाएगा। वहीं इस एकादशी व्रत का पारण का समय 10 अगस्त को सुबह 5 बजकर 47 मिनट से लेकर सुबह 08 बजे तक होगा।
कामिका एकादशी 2026 पर शुभ योग
वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार कामिका एकादशी पर द्विपुष्कर योग का निर्माण हो रही जो सुबह 11 बजकर 05 मिनट से आरंभ होकर दोपहर 02 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।
सावन कामिका एकादशी पूजा शुभ मुहूर्त
एकादशी के दिन ब्रह्रा मुहूर्त सुबह 4 बजकर 22 मिनट लेकर सुबह 5 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। वहीं इस दिन अभिजीत मुहूर्त में पूजा करना बहुत ही शुभ और फलदायी होता है। दोपहर 12 बजे से लेकर 12 बजकर 53 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। विजय मुहूर्त की बात करें तो दोपहर 2 बजकर 40 मिनट से लेकर 3 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 6 मिनट से लेकर 7 बजकर 27 मिनट तक, अमृतकाल मुहूर्त 6 बजकर 42 मिनट से लेकर 08 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विधि-विधान के साथ करना फलदायी रहेगा।
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भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
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कामिका एकादशी तिथि 2026
वैदिक पंचांग के अनुसार, श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 8 अगस्त 2026 को दोपहर 01 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 9 अगस्त 2026 को रविवार सुबह 11 बजकर 04 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त को रखा जाएगा। वहीं इस एकादशी व्रत का पारण का समय 10 अगस्त को सुबह 5 बजकर 47 मिनट से लेकर सुबह 08 बजे तक होगा।
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कामिका एकादशी 2026 पर शुभ योग
वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार कामिका एकादशी पर द्विपुष्कर योग का निर्माण हो रही जो सुबह 11 बजकर 05 मिनट से आरंभ होकर दोपहर 02 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।
सावन कामिका एकादशी पूजा शुभ मुहूर्त
एकादशी के दिन ब्रह्रा मुहूर्त सुबह 4 बजकर 22 मिनट लेकर सुबह 5 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। वहीं इस दिन अभिजीत मुहूर्त में पूजा करना बहुत ही शुभ और फलदायी होता है। दोपहर 12 बजे से लेकर 12 बजकर 53 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। विजय मुहूर्त की बात करें तो दोपहर 2 बजकर 40 मिनट से लेकर 3 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 6 मिनट से लेकर 7 बजकर 27 मिनट तक, अमृतकाल मुहूर्त 6 बजकर 42 मिनट से लेकर 08 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विधि-विधान के साथ करना फलदायी रहेगा।
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भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥