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Mahakumbh 2025: कब है प्रयागराज महाकुंभ का आखिरी स्नान? जानिए इसका महत्व
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Mon, 17 Feb 2025 01:30 PM IST
सार
Mahakumbh 2025: महाकुंभ का विशाल धार्मिक आयोजन 13 जनवरी 2025 को पौष पूर्णिमा के शुभ दिन से आरंभ हुआ था। आइए जानते हैं महाकुंभ का आखिरी महत्वपूर्ण स्नान किस दिन होगा।
Mahakumbh 2025 Last Date: महाकुंभ का विशाल धार्मिक आयोजन 13 जनवरी 2025 को पौष पूर्णिमा के शुभ दिन से आरंभ हुआ था, जिसका समापन 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि के दिन होगा। महाकुंभ के दौरान त्रिवेणी संगम में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुंभ में माघ मास के दौरान स्नान करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त होता है। यह भी कहा जाता है कि महाकुंभ में विधिपूर्वक स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
महाकुंभ 2025 के प्रमुख स्नान पर्व
- फोटो : अमर उजाला।
महाकुंभ 2025 के प्रमुख स्नान पर्व
13 जनवरी 2025 से आयोजित महाकुंभ मेले में संगम स्नान के लिए कुछ विशेष तिथियों को अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान 13 जनवरी 2025 को पौष पूर्णिमा के दिन पहला स्नान था। इसके बाद 14 जनवरी 2025 को मकर संक्रांति के अवसर पर पहला अमृत स्नान किया गया, जबकि 29 जनवरी 2025 को मौनी अमावस्या पर करोड़ों लोगों ने दूसरे अमृत स्नान पर आस्था की डुबकी लगाई।
महाकुंभ 2025 के प्रमुख स्नान पर्व
- फोटो : अमर उजाला।
इसके बाद 3 फरवरी 2025 को बसंत पंचमी पर तीसरा अमृत स्नान किया गया। 12 फरवरी 2025 को माघ पूर्णिमा पांचवां महत्वपूर्ण स्नान था। अब महाकुंभ 2025 का आखिरी महत्वपूर्ण स्नान 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि के अवसर पर है, जिसके साथ महाकुंभ 2025 समापन हो जाएगा।
महाकुंभ में अमृत स्नान का महत्व
- फोटो : अमर उजाला।
महाकुंभ में अमृत स्नान का महत्व
महाकुंभ में अमृत स्नान का विशेष महत्व होता है, जिसमें अखाड़ों के सन्यासी, महंत और नागा साधु अपने अनुयायियों के साथ विशेष अनुष्ठानों के तहत स्नान करते हैं। 2025 के कुंभ में तीसरा और अंतिम शाही स्नान बसंत पंचमी (3 फरवरी 2025) के दिन था।
महाकुंभ में अमृत स्नान का महत्व
- फोटो : adobestock
महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि एक दिव्य आध्यात्मिक अनुभव होता है, जहाँ देश-विदेश से श्रद्धालु, साधु-संत और योगी एकत्र होकर आध्यात्मिक साधना, ध्यान और भक्ति में लीन होते हैं। यह आयोजन भारतीय संस्कृति, धर्म और परंपराओं का जीवंत प्रमाण है, जिसमें आत्मशुद्धि और मोक्ष प्राप्ति की भावना प्रबल होती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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