सब्सक्राइब करें

Raksha Bandhan 2026: चंद्र ग्रहण के बीच मनाया जाएगा रक्षाबंधन, जानें सूतक काल और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Shweta Singh Updated Thu, 18 Jun 2026 08:48 PM IST
सार

रक्षाबंधन 2026 के दिन लग रहा है साल का अंतिम चंद्र ग्रहण। जानिए ग्रहण का समय, सूतक काल के नियम, भारत में इसकी दृश्यता और क्या राखी बांधने के शुभ कार्य पर पड़ेगा कोई असर।

विज्ञापन
Raksha Bandhan 2026 and Chandra Grahan Know Sutak Kaal Timings
रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण का साया - फोटो : amar ujala

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व इस वर्ष 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। हालांकि इस बार यह पर्व एक विशेष खगोलीय घटना के साथ पड़ रहा है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 2026 का अंतिम चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है। ऐसे में लोगों के मन में यह जिज्ञासा बनी हुई है कि क्या चंद्र ग्रहण के कारण रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त, राखी बांधने की परंपरा या सूतक काल के नियमों पर कोई प्रभाव पड़ेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय कई मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन इसके नियम ग्रहण की दृश्यता पर भी निर्भर करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि रक्षाबंधन के दिन लगने वाला यह चंद्र ग्रहण पर्व के उत्साह और राखी बांधने की परंपरा को किस हद तक प्रभावित करेगा।


Guru Nakshatra Gochar: पुष्य नक्षत्र में गुरु का परिवर्तन, 18 अगस्त तक इन राशियों पर किस्मत रहेगी मेहरबान

Raksha Bandhan 2026 and Chandra Grahan Know Sutak Kaal Timings
चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार सुबह 6:53 बजे शुरू होगा और दोपहर 12:32 बजे समाप्त होगा। - फोटो : ANI

रक्षाबंधन 2026 पर कब लगेगा चंद्र ग्रहण?
रक्षाबंधन के दिन पड़ने वाला यह चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार सुबह 6:53 बजे शुरू होगा और दोपहर 12:32 बजे समाप्त होगा। इस तरह ग्रहण की कुल अवधि करीब 5 घंटे 39 मिनट रहेगी। खगोलीय दृष्टि से यह एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण माना जा रहा है, जिसमें चंद्रमा का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की छाया से आच्छादित होगा। ग्रहण के चरम चरण के दौरान चंद्रमा का रंग सामान्य चमकदार सफेद के बजाय गहरा लाल या तांबे जैसा दिखाई दे सकता है। इसी विशेष दृश्य के कारण इसे अक्सर "ब्लड मून" भी कहा जाता है। यह खगोलीय घटना दुनिया के कई हिस्सों में स्पष्ट रूप से देखी जा सकेगी, जिनमें अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका तथा प्रशांत और अटलांटिक महासागर के क्षेत्र शामिल हैं।

Raksha Bandhan 2026 and Chandra Grahan Know Sutak Kaal Timings
चंद्र ग्रहण कुंभ राशि में और शतभिषा नक्षत्र के प्रभाव क्षेत्र में घटित होगा। - फोटो : Freepik

किस राशि और नक्षत्र में होगा चंद्र ग्रहण?
ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक, रक्षाबंधन के दिन पड़ने वाला चंद्र ग्रहण कुंभ राशि में और शतभिषा नक्षत्र के प्रभाव क्षेत्र में घटित होगा। ग्रहण से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं का पालन करने वाले श्रद्धालु इस अवधि में कुछ विशेष नियमों का अनुसरण करते हैं। परंपरा के अनुसार ग्रहण काल में भोजन करने से बचना, ईश्वर का ध्यान और मंत्र-जप करना तथा गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि धर्मशास्त्रों में यह भी माना गया है कि जिन क्षेत्रों में ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां सूतक और ग्रहण संबंधी नियमों का पालन अनिवार्य नहीं होता। इसलिए ग्रहण की दृश्यता को लेकर स्थानीय मान्यताओं और पंचांग के निर्देशों को विशेष महत्व दिया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Raksha Bandhan 2026 and Chandra Grahan Know Sutak Kaal Timings
भारत में दिखाई नहीं देगा चंद्र ग्रहण - फोटो : पीटीआई

भारत में दिखाई नहीं देगा चंद्र ग्रहण

ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, 28 अगस्त 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस स्थान पर ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां उसका सूतक काल और ग्रहण संबंधी निषेध प्रभावी नहीं माने जाते। यही कारण है कि भारत में रक्षाबंधन के पर्व पर इस ग्रहण का कोई विशेष धार्मिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। ऐसी स्थिति में बहनें निर्धारित शुभ मुहूर्त में अपने भाइयों को राखी बांध सकेंगी और रक्षाबंधन की सभी पारंपरिक रस्में सामान्य रूप से निभाई जा सकेंगी। ग्रहण के कारण पर्व की तिथि या अनुष्ठानों में किसी बदलाव की आवश्यकता नहीं होगी। बता दें कि सामान्यतः चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण आरंभ होने से लगभग 9 घंटे पहले शुरू माना जाता है, लेकिन चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा।

विज्ञापन
Raksha Bandhan 2026 and Chandra Grahan Know Sutak Kaal Timings
भद्राकाल का रखें ध्यान - फोटो : adobe stock

भद्राकाल का रखें ध्यान 
चूंकि रक्षाबंधन 2026 के दिन पड़ने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए श्रद्धालुओं को इसे लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जहां ग्रहण दृश्य नहीं होता, वहां उसका सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाता। ऐसे में भाई-बहन इस पावन पर्व को बिना किसी संशय के पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मना सकते हैं। हालांकि, राखी बांधते समय भद्राकाल का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है, क्योंकि शास्त्रों में भद्रा के दौरान रक्षा सूत्र बांधना शुभ नहीं माना गया है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Astrology News in Hindi related to daily horoscope, tarot readings, birth chart report in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Astro and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed