अब आपको मॉल, एयरपोर्ट और प्राइवेट पार्किंग में लगने वाले जाम से जल्द छुटकारा मिलने वाला है, क्योकि यहां पार्किंग के लिए आपको फास्टैग (FASTag) का इस्तेमाल करने की सुविधा मिलने जा रही है। दरअसल मंगलवार को नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने कहा कि वह एक अंतर प्रणाली सिस्टम को पेश करेगा, जिससे फास्टैग का इस्तेमाल मॉल, हवाई अड्डों और प्राइवेट पार्किंग में किया जा सकेगा। फास्टैग (FASTag) की सुविधा से लोगों को इन जगहों पर पार्किंग के टिकट के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा, जिससे उनका समय बचेगा। इसके अलावा इन जगहों पर लगने वाला जाम भी पहले के मुकाबले काफी कम हो जाएगा। क्या है फास्टैग? इसका इस्तेमाल कहां हुआ? इसे क्यों लाया गया? और अब इसकी सुविधा किन शहरों में मिलने जा रही है? इन सब का जवाब हम आपको बताने जा रहे हैं।
पार्किंग में अब टिकट के झंझट से मिलेगा छुटकारा, इस सुविधा से खत्म होगा गाड़ियों का जाम
टोल प्लाजा के लिए शुरू हुई थी सुविधा
फास्टैग की सुविधा को सबसे पहले टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम को कम करने के लिए लाया गया था। दरअसल पहले टोल टैक्स के लिए टोल प्लाजा पर गाड़ियों की लंबी लाइनें लगती थीं। इससे लोगों को काफी इंतजार करना पड़ता था। वहीं, इस दौरान ईंधन की खपत होती थी। ऐसे में सरकार की तरफ से इस परेशानी को खत्म करने के लिए फास्टैग की सुविधा दी गई। इससे टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों में भारी कमी आई है। बता दें कि मौजूदा समय में देश के 695 टोल प्लाजा पर यह सेवा उपलब्ध है।
हैदराबाद एयरपोर्ट पर लोगों का मिला साथ
नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने कहा कि हैदराबाद एयरपोर्ट पर फास्टैग की सेवा को लोगों की तरफ से अच्छी प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। इसी कड़ी में देश के अन्य बड़े शहरों में भी अब इस सेवा को लागू किया जा रहा है। बता दें कि नेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स टोल कलेक्शन मौजूदा समय में हैदराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लागू है।
इन शहरों में शुरू होगी सुविधा
नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने कहा कि फास्टैग की सेवा को सबसे पहले दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरू जैसे बड़े शहरों में मॉल, एयरपोर्ट और प्राइवेट पार्किंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे कांटैक्टलेस पार्किंग संभव होगी।
क्या है फास्टैग?
फास्टैग, गाड़ी के विंडशील्ड पर लगाया गया एक इलेक्ट्रॉनिक टोल कनेक्शन डिवाइस है, जिससे टोल प्लाजा पर ड्राइवर को अपनी गाड़ी को रोकना नहीं पड़ता है। रेडियो फ़्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टेक्नोलॉजी (RFID) से लैस, डिवाइस का इस्तेमाल टोल शुल्क लेने के लिए सीधे प्रीपेड वॉलेट या उससे जुड़े बैंक खाते से किया जाता है।