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Delhi Pollution: AQI बढ़ने के पीछे वाहन हैं सबसे बड़ी वजह, दिल्ली सरकार और आईआईटी-कानपुर के अध्ययन में खुलासा
Thu, 16 Nov 2023 04:40 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 16 Nov 2023 04:40 PM IST
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दिल्ली के वायु प्रदूषण में हालिया बढ़ोतरी के पीछे पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों के खेतों में लगी आग से आने वाला धुंधा नहीं, बल्कि वाहन हैं। क्योंकि वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) पिछले सप्ताह दिवाली के बाद से गंभीर स्तर के आसपास बना हुआ है। दिल्ली सरकार और आईआईटी-कानपुर द्वारा संयुक्त रूप से किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि कारों और दोपहिया वाहनों से कार्बन उत्सर्जन ने बुधवार को प्रदूषण में लगभग 38 प्रतिशत योगदान दिया। अध्ययन में यह भी अनुमान लगाया गया है कि 16 नवंबर को वाहन प्रदूषण की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी।
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राष्ट्रीय राजधानी में रविवार को पटाखे जलाने के बाद प्रदूषण के स्तर में उछाल दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, दिल्ली का पीएम 2.5 स्तर दिवाली की रात रात 1 बजे 570 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जो सुरक्षित सीमा से लगभग 10 गुना ज्यादा है। दिल्ली ने पहले GRAP के चरण चार को लागू किया था क्योंकि पिछले एक सप्ताह से राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था। बीएस3 पेट्रोल और बीएस4 डीजल वाहनों पर प्रतिबंध दिल्ली से इतर पड़ोसी शहरों जैसे हरियाणा में गुरुग्राम और फरीदाबाद और उत्तर प्रदेश में नोएडा तक बढ़ा दिया गया।
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दिल्ली सरकार और आईआईटी-कानपुर द्वारा किए गए अध्ययन में कहा गया है कि वाहनों के उत्सर्जन के अलावा, प्रदूषण का दूसरा सबसे बड़ा कारण सल्फेट और नाइट्रेट जैसे माध्यमिक अकार्बनिक एरोसोल हैं। ये कण तब बनते हैं जब रिफाइनरियों और वाहनों जैसे स्रोतों से निकलने वाले कण प्रदूषकों के साथ गैसों की परस्पर क्रिया होती हैं। हाल ही में दिल्ली की खराब हवा में इन प्रदूषकों का योगदान लगभग 35 प्रतिशत था।
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दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय पहले ही संकेत दे चुके हैं कि सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में ऑड-ईवन नियम को फिर से लागू करने के विचार को अभी तक ठंडे बस्ते में नहीं डाला है। हालांकि इस सप्ताह की शुरुआत में इसे लागू करने की योजना को स्थगित कर दिया गया था। राज्य सरकार एक्यूआई मीटर पर कड़ी नजर रख रही है और ऑड-ईवन नियम पर शुक्रवार तक फैसला होने की उम्मीद है। राय ने कहा, "2-3 दिनों के बाद हवा की रफ्तार तेज हो सकती है। इसलिए उम्मीद है कि स्थिति बेहतर होगी। हम अभी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। कल हम वैज्ञानिकों और विभागों के साथ बैठेंगे।"
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ऑड-ईवन नियम सार्वजनिक सड़कों पर चलने वाले निजी वाहनों पर प्रतिबंध लगाता है। ऑड नंबर पर समाप्त होने वाले पंजीकरण संख्या वाले वाहनों को वैकल्पिक दिनों में और ईवन नंबरवाले वाहनों को अन्य वैकल्पिक दिनों में चलने की अनुमति है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इसका प्रदूषण स्तर पर न के बराबर असर पड़ता है। और यह सिर्फ सड़कों पर भीड़ कम करने में काम आता है।