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Magical Tree: इस अनोखे पेड़ की पत्तियां खाकर तानसेन बन गए संगीत सम्राट, जानिए जादुई ट्री के बारे में

फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राजेश मिश्रा Updated Mon, 24 Jan 2022 06:42 PM IST
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600 year old imli tree who made tansen the music king know about this special tree
तानसेन - फोटो : Pixabey

एक अच्छा संगीत सुनने से मन को बहुत शांति मिलती है। संगीत सुनने से कई बीमारियां भी ठीक होती हैं। इंसान तनाव मुक्त होता है और तरोताजा महसूस करता है। वैसे तो संगीत के क्षेत्र में एक से बढ़कर एक फनकार इस दुनिया में हैं। मगर, जो संगीत का जादू तानसेन की गायकी में था, उस तरह का संगीत अभी तक कोई नहीं गा पाया। तानसेन के बारे में कहा जाता है कि जब वो अपना राग छेड़ते थे तो मौसम अपने आप बदल जाता था। उनकी गायकी से आसमान में बादल आ जाते और बरसने लगते थे। जब वो अपना राग दीपक गाते थे तो दीप अपने आप जल जाते थे। यही कारण है कि तानसेन को संगीत सम्राट भी कहा जाता है। तानसेन ने शास्त्रीय संगीत को आगे बढ़ाने में अमूल्य योगदान दिया। तानसेन गायक होने के साथ उच्च कोटि के वादक भी थे। जिन्होंने कई रागों का निर्माण किया। मगर, एक हैरान करने वाली बात बहुत कम लोग जानते हैं कि तानसेन बचपन में बोल नहीं पाते थे। 

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भारतीय संगीत - फोटो : Pixabay

इसके लिए उन्हें इमली के पत्ते खिलाए गए। ऐसा कहा जाता है कि तानसेन की गायकी का राज एक इमली का पेड़ था। इसके बाद तानसेन संगीत की दुनिया का सम्राट बन गए। तानसेन संगीत का इतना रियाज करते थे कि उनकी इस साधना को देखकर उस समय के बादशाह अकबर ने उन्हें अपने नौरत्नों में शामिल किया था। उस दौर में बादशाह अकबर के नौरत्नों में शामिल होना एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी। 

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तानसेन - फोटो : Twitter/@salwah_sm

तानसेन का निधन आगरा में हुआ था। तानसेन की अंतिम अच्छा थी कि जब उनका निधन हो तो उन्हें उनके आध्यात्मिक गुरु मोहम्मद गौस के मकबरे के पास ही दफनाया जाए। इसके बाद ऐसा ही हुआ और उन्हें वहीं दफनाया गया। जिस जगह पर तानसेन को दफनाया गया था उसी जगह एक इमली का पेड़ उग आया। धीरे-धीरे ये मान्यता हो गई कि जो भी इस पेड़ की पत्तियां खाएगा उसका गला सुरीला हो जाएगा।

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तानसेन - फोटो : Twitter/@theabhayk

यही वजह है कि संगीत की साधना करने वाला हर इंसान यहां आता है और पेड़ की पत्तियां अपने साथ ले जाता है। ये पेड़ 600 साल पुराना है और दुनिया भर के संगीतकारों के लिए ये पेड़ किसी धरोहर से कम नहीं है। ऐसी मान्यता है कि इन पेडों की पत्तियों में मियां तानसेन की रूह बसती है जो भी इस पेड़ की पत्तियां खाएगा उसकी आवाज सुरीली हो जाएगी। 

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तानसेन - फोटो : Twitter/@indoislamicPage

भारतीय शास्त्रीय संगीत के जाने-माने कलाकार पंडित जसराज जब यहां आए तो इस पेड़ की पत्तियों को खाने से खुद को रोक नहीं पाए। जब वो जाने लगे तो कुछ पत्तियां अपने साथ भी ले गए। संगीत की समझ रखने वाले और इतिहासकार मानते हैं कि जो पेड़ की पत्तियां खाता है उसे तानसेन का आशीर्वाद मिलता है। 

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