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African Continent: दो हिस्सों में बंट रहा है ये महाद्वीप, बनेगा एक नया महासागर, टेंशन में वैज्ञानिक

फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: Dharmendra Kumar Singh Updated Tue, 28 Apr 2026 04:42 PM IST
सार

African Continent: वैज्ञानिकों के एक नए शोध में पता चला है कि अफ्रीका महाद्वीप दो हिस्सों में बंट रहा है। इसके बारे में जानकर वैज्ञानिक हैरान हैं। इसके साथ ही एक नए महासागर का भी निर्माण हो रहा है। 

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दो हिस्सों में बंट रहा है ये महाद्वीप, बनेगा एक नया महासागर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AI

African Continent Is Splitting In Two Parts: अफ्रीका महाद्वीप में एक बेहद चौंकाने वाली घटना घटी है। दरअसल, यहां महाद्वीप दो भागों में बंट रहा है। वैज्ञानिकों को पता लगाया है कि अफ्रीका भू-भाग को टेक्टोनिक फोर्स दो हिस्सों में बांट रही है और यह अब नजर आने लगा है। सबसे बड़ी बात यह है कि टूटने के साथ ही बीच एक नया महासागर बनने लगा है। पूर्वी अफ्रीका में यह हैरान वाली घटना घट रही है। इसी स्थान तीन प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटें मिलती हैं और धीरे-धीरे अलग हो जाती हैं।



वैज्ञानिकों के मुताबिक, अफ्रीका में जमीन के भीतर एक बड़ी भूगर्भीय हलचल हो रही है। इसकी वजह से यह विशाल महाद्वीप दो हिस्सों में बंट रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अफ्रीका के पूर्वी इलाके में धरती की पपड़ी (Crust) अधिक पतली हो चुकी है। इससे पता चलता है कि महाद्वीप टूट रहा है। नेचर कम्युनिकेशंस में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ था। 

केन्या और इथियोपिया में करीब 500 किमी तक फैला तुर्काना रिफ्ट विशाल पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट प्रणाली का हिस्सा है। यह उत्तर पूर्वी इथियोपिया में अफार डिप्रेशन से मोजाम्बिक तक फैली है और अरब और सोमाली प्लेटों को बांटने का काम करती है। इस इलाके में अफ्रीकी और सोमाली प्लेटें 4.7 मिलीमीटर प्रतिवर्ष के दर धीरे-धीरे एक-दूसरे से अलग हो रही हैं। 
 

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दो हिस्सों में बंट रहा है ये महाद्वीप, बनेगा एक नया महासागर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Freepik

क्या है दो हिस्सों में बंटने की वजह? 

वैज्ञानिकों ने बताया कि अलगाव होने के साथ ही जमीन की पपड़ी पर तनाव पड़ता है, जिसके कारण सतह मुड़ जाती है। सभी दरारों से महाद्वीप नहीं होते हैं, लेकिन तुर्काना में पड़ रही दरार उस तरफ बढ़ती हुई नजर आ रही है। वैज्ञानिकों ने इस जगह पर बहुत अधिक पतली क्रस्ट की खोज की है। 
 

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दो हिस्सों में बंट रहा है ये महाद्वीप, बनेगा एक नया महासागर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock

दरार को देखकर वैज्ञानिक भी हैरान 

कोलंबिया यूनिवर्सिटी की लैमोंड-डोहर्टी अर्थ ऑब्जर्वेटरी के पीएचडी छात्र और स्टडी के प्रमुख लेखकर क्रिश्चियन रोवन ने कहा कि पहले से ज्यादा तेजी से दरार बन रही है और पहले से कहीं ज्यादा क्रस्ट पतली है। उन्होंने बताया कि पूर्वी अफ्रीका में दरार इतनी तेजी से बढ़ रही है, जो वैज्ञानिकों की सोच से भी ज्यादा तेज है। 

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दो हिस्सों में बंट रहा है ये महाद्वीप, बनेगा एक नया महासागर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Freepik

स्टडी के नतीजों से पता चला है कि दरार के केंद्र में पपड़ी की मोटाई करीब 13 किमी है, जबकि इससे दूर यह 35 किमी से ज्यादा है। इस अंतर से नेकिंग का संकेत मिला है। नेकिंग एक अहम टेक्टोनिक चरण का संकेत होता है, जिससे पता चलता है कि पृथ्वी की पपड़ी बीच से कैसे खिंचती और पतली होती है।

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दो हिस्सों में बंट रहा है ये महाद्वीप, बनेगा एक नया महासागर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Freepik

नए महासागर का होगा निर्माण 

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के बदलाव लंबे समय में देखने को मिलते हैं। करीब 4.5 करोड़ साल पहले तुरकाना रिफ्ट के खुलने की शुरुआत हुई थी। शोधकर्ता मानते हैं कि करीब 40 लाख वर्ष पहले बड़े स्तर ज्वालामुखी विस्फोट हुआ था। इसके बाद नेकिंग की शुरुआत हुई। इसके अगले चरण को ओशनाइजेशन कहते हैं यानी महासागर का निर्माण।  हालांकि, अभी इस शुरू होने में लाखों वर्ष लग सकते हैं। उस चरण के दौरान दरारों से मैग्मा ऊपर आएंगे और समुद्र तल पर बनेगा। इस दौरान उत्तर में मौजूद हिंद महासागर का पानी वहां पर भर सकता है। 

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