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इस मंदिर में आज भी मौजूद है समुद्र मंथन से निकला अमृत कलश! ऊपर स्थापित है शिवलिंग

फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Thu, 12 Sep 2019 09:18 AM IST
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Amrit Kalash And Unique ShivLing Found In Bronze Cup From Candi Sukuh Temple Indonesia
कंडी सुकुह मंदिर, इंडोनेशिया - फोटो : Social media

समुद्र मंथन और उससे निकले अमृत कलश की बातें न जाने हम कितने सालों से सुनते आ रहे हैं। हालांकि कुछ लोग इसे सिर्फ एक पौराणिक कथा मानते हैं, सच नहीं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि मुस्लिम देश इंडोनेशिया में एक ऐसा मंदिर है, जहां के बारे में कहा जाता है कि वहां आज भी वो अमृत कलश मौजूद है, जो समुद्र मंथन से निकला था। 



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Amrit Kalash And Unique ShivLing Found In Bronze Cup From Candi Sukuh Temple Indonesia
इंडोनेशिया के कंडी सुकुह मंदिर से मिला 'अमृत कलश' - फोटो : Social media

इस मंदिर का नाम कंडी सुकुह है, जो मध्य और पूर्वी जावा प्रांतों की सीमा पर माउंट लावू (ऊंचाई 910 मीटर यानी 2,990 फीट)) के पश्चिमी ढलान पर स्थित है। इस प्राचीन मंदिर में एक ऐसा कलश मौजूद है, जिसमें एक द्रव्य हजारों सालों से मौजूद है। माना जाता है कि ये अमृत है, जो अभी तक सूखा नहीं है। 

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Amrit Kalash And Unique ShivLing Found In Bronze Cup From Candi Sukuh Temple Indonesia
कंडी सुकुह मंदिर, इंडोनेशिया - फोटो : Social media

दरअसल, साल 2016 में इंडोनेशिया के पुरातत्व विभाग द्वारा इस मंदिर की मरम्मत का काम चल रहा था, तभी विशेषज्ञों को मंदिर की दीवार की नींव से एक तांबे का कलश मिला, जिसके ऊपर एक पारदर्शी शिवलिंग स्थापित था और कलश के भीतर कोई द्रव्य भरा हुआ था। 

Amrit Kalash And Unique ShivLing Found In Bronze Cup From Candi Sukuh Temple Indonesia
इंडोनेशिया के कंडी सुकुह मंदिर से मिला 'अमृत कलश' - फोटो : Social media

शोध में पता चला कि तांबे के उस कलश को इस तरह से जोड़ा गया था कि उसे कोई खोल न सके। एक और बात जो सबसे हैरान करने वाली थी, वो ये कि जिस दीवार की नींव से वो कलश मिला था, उसपर समुद्र-मंथन की नक्काशी थी और महाभारत के आदिपर्व का वर्णन किया गया था। 

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कंडी सुकुह मंदिर, इंडोनेशिया - फोटो : Social media

ऐसा माना जाता है कि तांबे का वो कलश 1000 ईसा. पूर्व का है, जबकि मंदिर 1437 ईसा. पूर्व के आसपास बनाया गया था। इस काल में मलेशिया पूरी तरह से हिंदू राष्ट्र हुआ करता था, लेकिन 15वीं सदी में जब इंडोनेशिया में इस्लाम का वर्चस्व हुआ तो इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया। माना जाता है कि उसी समय तांबे के उस कलश को इस मंदिर में छुपा दिया गया होगा। 

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