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जलवायु परिवर्तन का असर: डेढ़ डिग्री तक बढ़ सकता है अंटार्कटिका प्रायद्वीप का तापमान, शोध में हुआ खुलासा

Sat, 20 Mar 2021 06:05 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Sat, 20 Mar 2021 06:05 AM IST
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antarctica peninsula temperature will increase by 2044 due to global warming climate change
अंटार्कटिका प्रायद्वीप - फोटो : Pixabay

जलवायु परिवर्तन का असर वैसे तो पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है, लेकिन इसका सबसे अधिक प्रभाव अंटार्कटिका प्रायद्वीप पर हो रहा है। इस वजह से दुनियाभर के वैज्ञानिक अंटार्कटिका में आए बदलावों को काफी गंभीरता से लेते हैं। एक अध्ययन के मुताबिक, साल 2044 तक इस प्रायद्वीप में जलवायु परिवर्तन की वजह से तापमान आधे से डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा।

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अंटार्कटिका प्रायद्वीप - फोटो : सोशल मीडिया

बता दें कि यह अध्ययन क्लाइमेट डायनामिक्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने सिम्यूलेशन का विश्लेषण कर ये पाया कि 19 क्लाइमेट मॉडल इस बात को दर्शाते हैं कि अंटार्कटिका प्रायद्वीप में तापमान में बढ़ोत्तरी तय है। इसके साथ ही शोधकर्ताओं ने यह भी पाया है कि इसी दौरान इस प्रयाद्वीप में वर्षण की मात्रा में भी 5 से 10 फीसदी की वृद्धि होने की संभावना है।

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अंटार्कटिका प्रायद्वीप - फोटो : Pixabay

ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के बिर्ड पोलर क्लाइमेट सेंटर में रिसर्च प्रोफेसर और इस अध्ययन के प्रमुख डेविड ब्रोमविक बताते हैं कि उनकी टीम इस प्रायद्वीप में हो रहे बदलावों का अवलोकन कर रही है। प्रायद्वीप लगातार गर्म होते जा रहा है। ऐसे में नरम बर्फ की चट्टानें और ग्लेशियर पिघल कर ठोस बर्फ में बदल रहे हैं। इससे पहले भी हुए कई शोध इस बात का इशारा कर चुके हैं।

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अंटार्कटिका प्रायद्वीप - फोटो : सोशल मीडिया

प्रोफेसर डेविड ब्रोमविक इसका कारण बताते हुए कहते हैं कि "अंटार्कटिका प्रायद्वीप के साथ समस्या यह है कि यह संकरा है, लेकिन इसकी पर्वत शृंखला ऊंची है। बड़े मॉडल पूरे महाद्वीप को अपने अध्ययन में शामिल करते हैं और इस तथ्य को अपने शोध में शामिल नहीं करते हैं। हमारा लक्ष्य इन अनुमानों को और ज्यादा विस्तृत जानकारी देना है।"

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अंटार्कटिका प्रायद्वीप - फोटो : Pixabay

शोधकर्ताओं के मुताबिक, साल 1950 से अंटार्कटिका के पश्चिमी हिस्से सहित प्रायद्वीप पृथ्वी के सबसे तेजी से गर्म हाने वाले इलाकों में शामिल है। अगर यहां अधिक बारिश होती है, तो यहां ऊपरी बर्फ कम होगी, जो सूर्य की किरणों को प्रतिबिंबित कर वापस पहुंचाती है। ऐसे में इस इलाके के और ज्यादा गर्म होने की संभावना होगी, क्योंकि अवशोषित होने वाली रोशनी पूरे क्षेत्र का तापमान बढ़ा सकती है।

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