Chandra Grahan 2023: साल का आखिरी चंद्र ग्रहण शनिवार रात लगेगा। 28 और 29 अक्तूबर की मध्यरात्रि को यह ग्रहण लगेगा, जिसकी शुरुआत रात 1 बजकर 5 मिनट पर होगी और यह 2 बजकर 24 मिनट तक चलेगा। यह एक खंडग्रास चंद्र ग्रहण होगा। जब धरती की छाया चांद के कुछ हिस्से पर पड़ती है, तो इसे आंशिक यानी खंडग्रास चंद्र ग्रहण कहा जाता है। चंद्र ग्रहण का 1 घंटा, 19 मिनट तक रहेगा।
Chandra Grahan 2023: कब होता है चंद्र ग्रहण? सूर्य ग्रहण से कितना है अलग, जानिए क्या कहता है विज्ञान
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साल में कितनी बार लग सकता है चंद्र ग्रहण?
साल में चंद्र ग्रहण दो से पांच बार लगता है। हर महीने पूर्णिमा होती है, लेकिन चंद्र ग्रहण नहीं होता है। यह इसलिए, क्योंकि चंद्रमा की कक्षा आम तौर पर सूर्य के चारों तरफ धरती की कक्षा के समान क्षैतिज तल पर नहीं पड़ती है। सिर्फ जब धरती, सूर्य और चांद के बीच होती है और चंद्रमा अन्य दो के साथ क्षैतिज रूप से संरेखित होता है, धरती की छाया में चांद आ जाएगा और इससे चंद्र ग्रहण होगा।
कितने प्रकार के होते हैं चंद्र ग्रहण?
आंशिक चंद्र ग्रहण
जब चंद्रमा, सूर्य और धरती पूरी तरह से एक सीधी रेखा में नहीं होते हैं, बल्कि अपूर्ण रूप से संरेखित होते हैं, तो आंशिक चंद्र ग्रहण लगता है। चांद को धरती की छाया पूरी तरह से नहीं ढक पाती है।
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पूर्ण चंद्र ग्रहण
जब चंद्रमा धरती के आंतरिक छाया से गुजरता है, तो पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है। जहां चंद्रमा पर परावर्तित होने वाली सिर्फ सूर्य की रोशनी पहले धरती के वायुमंडल से होते हुए गुजरती है। धरती के वायुमंडल में छोटी तरंग दैर्ध्य वाले रंग फैले जाते हैं। इससे लाल और नारंगी जैसे लंबे तरंग दैर्ध्य वाले रंग पीछे रह जाते हैं, जो चंद्रमा को लाल रंग देते हैं। इसकी वजह से इसको "ब्लड मून" का उपनाम दिया गया है। दूसरों की तुलना पूर्ण चंद्र ग्रहण काफी दुर्लभ है।
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उपछाया चंद्र ग्रहण
जब चांद सिर्फ धरती की छाया के बाहरी भाग, पेनुम्ब्रा से होकर गुजरता है, तो उपच्छाया चंद्र ग्रहण होता है। छाया का एक हल्का हिस्सा होता है पेनुम्ब्रा। इसका अर्थ है कि चंद्रमा सामान्य से थोड़ा गहरे रंग का नजर आएगा।