Zara Hatke: दुनिया के अलग-अलग देशों में अलग-अलग रीति रिवाजों और परंपराओं का पालन किया जाता है। कई देशों की अजोबीरगरीब परंपराओं के बारे में जानकर आपको हैरानी होगी। आज हम आपको अपनी इस खबर में एक अनोखी परंपरा के बारे में बताने जा रहें, जिसका पालन भूटान में किया जाता है। देश की इस पंरपरा के बारे में जानकर आप हैरान हो जाएंगे। साथ ही आपके मन में सवाल खड़ा होगा कि आखिर ऐसा क्या किया जाता है?
Zara Hatke: यहां पर घर के बाहर लोग नींबू मिर्ची नहीं टांगते हैं ऐसी चीज, जानकर सौ बार सोचेंगे आप
Zara Hatke: दुनिया के अलग-अलग देशों में अलग-अलग रीति रिवाजों और परंपराओं का पालन किया जाता है। कई देशों की अजोबीरगरीब परंपराओं के बारे में जानकर आपको हैरानी होगी। आज हम आपको अपनी इस खबर में एक अनोखी परंपरा के बारे में बताने जा रहें, जिसका पालन भूटान में किया जाता है।
भूटान में एक चिमी ल्हाखांग प्रसिद्ध मंदिर। यह मंदिर लामा द्रुकपा क्यूनले को समर्पित है। इन्होंने अपनी शक्तिशाली लिंग से एक राक्षसी को हराया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यहां घरों की दीवारों पर अलग-अलग रंगों और सुंदर डिजाइनों में बनी विशाल लिंग की पेंटिंग लगाई गई हैं। मंदिरों के दरवाजों पर बड़े-बड़े लकड़ी के उकेरे लिंग और छोटे-छोटे लिंग के प्रतीक हैं, जिन्हें घरों और दुकानों के दरवाजों पर लगाया गया है।
एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने वीडियो में गांव को दिखाया गया है। उसके मुताबिक, चिमी ल्हाखांग भूटान के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल है। यहां पर महिलाएं संतान प्राप्ति के आशीर्वाद के लिए आती हैं। इसलिए इसे भूटान का फर्टिलिटी मंदिर कहते हैं। उनका कहना है कि स्थानीय लोग मानते हैं कि लिंग की पेंटिंग न सिर्फ प्रजनन को बढ़ावा देती हैं, बल्कि बुरी आत्माओं को दूर भगाती है और बुरी नजर से भी बचाती है।
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मंदिर की रोचक बातें
नवांग चोग्याल ने मंदिर का निर्माण कराया था, जो 14वें द्रुकपा माने जाते थे। मंदिर के अंदर बने स्तूप को एक योगी ने बनाया था, जिनको वहां 'डिवाइन मैडमैन' के नाम से जाना जाता है। डिवाइन मैडमैन का मतलब होता है कि भगवान की भक्ति में लीन रहने वाला व्यक्ति। द्रुकपा कुनली नाम के बौद्ध धर्म गुरु थे। कहा जाता है कि वह तिब्बत से भूटान आए थे और अपने साथ बौद्ध धर्म को लेकर यहां आए। उनके शिक्षा देने का बिल्कल अलग अंदाज था और पागलों की तरह गाया करते थे। इसकी वजह से उन्हें डिवाइन मैडमैन कहा जाता था।
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बताया जाता है कि पुनाखा में एक आत्मा को भगाने के लिए द्रुकपा कुनली आए थे। उन्होंने लिंग के आकार का डंडा बनाया और उससे भूत पर हमला किया, जसिके बाद भूत ने कुत्ते का रूप धारण कर लिया। डिवाइन मैडमैन मरे कुत्ते को स्तूप में ले आए और तब से लिंग को वहां पर महत्व देने लगे। इसके बाद से ही वहां गांव में लोगों के घर, दुकान आदि पर भी लिंग की आकृति उकेरी रहती है।